गुजरात से शुरू हुई प्रशासनिक सुधारों की यात्रा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में सत्ता की कमान संभाली थी। उस समय वह क्षेत्र भुज में आए विनाशकारी भूकंप के परिणामों से संघर्ष कर रहा था। इसके अलावा राज्य के सामने पानी की गंभीर कमी, सूखा, बिजली आपूर्ति का संकट और राजनीतिक अस्थिरता जैसी तमाम बड़ी समस्याएं मुंह बाए खड़ी थीं। इन कठिन परिस्थितियों का सामना करते हुए उन्होंने शासन प्रणाली को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और प्रभावी बनाने की दिशा में काम करना शुरू किया। उनका मुख्य जोर बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और नए निवेश तथा उद्योगों के लिए एक अनुकूल माहौल तैयार करने पर था। इसी शुरुआती दौर में उन्होंने तकनीक आधारित एक अनूठी पहल शुरू की थी जिसका नाम SWAGAT यानी स्टेट वाइड अटेंशन ऑन ग्रीवांसेंज बाय एप्लीकेशन ऑफ टेक्नोलॉजी था। इस व्यवस्था के माध्यम से आम नागरिक अपनी समस्याओं और शिकायतों को सीधे सरकार तक पहुंचाने में सक्षम हुए। इस अनूठी प्रशासनिक पहल को वर्ष 2010 में प्रतिष्ठित संयुक्त राष्ट्र पब्लिक सर्विस अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था। इसके साथ ही ज्योतिग्राम योजना के तहत गांवों में कृषि कार्यों और घरेलू उपयोग के लिए अलग-अलग बिजली फीडर की व्यवस्था सुनिश्चित की गई ताकि ऊर्जा संकट से निपटा जा सके।
राष्ट्रीय स्तर पर फैली योजनाओं की पहुंच और तकनीक
वर्ष 2013 में जब नरेंद्र मोदी को भारतीय जनता पार्टी की तरफ से प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया गया, तब तक गुजरात का विकास मॉडल देश भर में एक बड़ा राजनीतिक और आर्थिक मुद्दा बन चुका था। वर्ष 2014 में केंद्र में सरकार बनने के बाद इस विकास के दायरे को और अधिक व्यापक रूप दे दिया गया। केंद्र सरकार द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार पिछले पच्चीस वर्षों के दौरान देश भर में लगभग 60 करोड़ जनधन बैंक खाते खोले गए हैं। इसके अतिरिक्त जरूरतमंद परिवारों के लिए चार करोड़ से अधिक आवास उपलब्ध कराए गए हैं और करीब 25 करोड़ नागरिकों को गरीबी रेखा से बाहर निकाला गया है। किसानों की आर्थिक मदद के लिए शुरू की गई पीएम-किसान योजना के अंतर्गत अब तक चार लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे लाभार्थियों के खातों में ट्रांसफर की जा चुकी है। सरकारी कामकाज और जनता के बीच की दूरी को पाटने के लिए तकनीक का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया गया है। गुजरात के दौर की SWAGAT प्रणाली की सोच का विस्तार आगे चलकर केंद्र सरकार के PRAGATI प्लेटफॉर्म में दिखाई दिया। इस डिजिटल माध्यम से केंद्र की बड़ी परियोजनाओं की नियमित समीक्षा की जाती है और उनके रास्ते में आने वाली बाधाओं को तुरंत दूर किया जाता है। कार्यालय के आंकड़ों के मुताबिक इस प्रणाली के जरिए अब तक करोड़ों और अरबों रुपये की परियोजनाओं को तेज गति प्रदान की गई है।
आत्मनिर्भर भारत और भविष्य का विकसित राष्ट्र लक्ष्य
समय के साथ देश की आर्थिक नीतियों और विकास के प्राथमिक लक्ष्यों में भी महत्वपूर्ण बदलाव दर्ज किए गए हैं। वर्ष 2020 में फैली कोरोना वायरस महामारी के बाद वैश्विक स्तर पर आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुई जिससे घरेलू उत्पादन और रणनीतिक क्षेत्रों में आत्मनिर्भर बनने की जरूरत और अधिक बढ़ गई। इसके बाद मेक इन इंडिया और डिजिटल इंडिया के साथ आत्मनिर्भर भारत अभियान को देश की नीतियों के केंद्र में रखा गया। वर्तमान समय में सरकार इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण, रक्षा उपकरणों के उत्पादन, सेमीकंडक्टर क्षेत्र में निवेश और बढ़े हुए पूंजीगत खर्च को इन बदलावों के प्रमुख उदाहरणों के रूप में पेश करती है। इन सभी पहलों और सुधारों का सबसे बड़ा और अंतिम उद्देश्य वर्ष 2047 तक भारत को एक पूरी तरह विकसित राष्ट्र बनाना है, जो देश की आजादी का शताब्दी वर्ष भी होगा। इस महत्वाकांक्षी विजन के तहत उन्नत बुनियादी ढांचे, आधुनिक विनिर्माण इकाइयों, उच्च तकनीक, बड़े पैमाने पर निवेश और नागरिक केंद्रित सरकारी सेवाओं को एक साथ जोड़ा जा रहा है। सरकार का यह पूरा सफर केवल नारों तक सीमित नहीं रहा बल्कि इसने आम जनता के जीवन स्तर को ऊंचा उठाने और देश की प्रशासनिक कार्यप्रणाली को पूरी तरह से बदलने का काम किया है।