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शक्तिशाली राष्ट्र: भारत अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए सामर्थ्य बढ़ाना चाहता है

उपराष्ट्रपति ने स्पष्ट किया है कि भारत किसी अन्य देश पर नियंत्रण करने की इच्छा नहीं रखता है। राष्ट्र का मुख्य उद्देश्य अपनी संप्रभुता और अखंडता की सुरक्षा के लिए स्वयं को शक्तिशाली बनाना है।

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Ankit Yadav
13 अक्ट 2026, 12:08
शक्तिशाली राष्ट्र: भारत अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए सामर्थ्य बढ़ाना चाहता है

संप्रभुता की रक्षा के लिए भारत का संकल्प

भारत की विदेश नीति और सुरक्षा दृष्टिकोण का केंद्र बिंदु अपनी संप्रभुता की रक्षा करना है। उपराष्ट्रपति ने इस बात पर जोर दिया है कि देश का लक्ष्य किसी अन्य राष्ट्र पर अपना हुक्म चलाना या किसी पर प्रभुत्व स्थापित करना बिल्कुल नहीं है। आज 12 अक्टूबर 2026 को सामने आए इस बयान से स्पष्ट होता है कि भारत एक शांतिप्रिय लेकिन मजबूत राष्ट्र के रूप में अपनी पहचान बनाए रखना चाहता है। संप्रभुता किसी भी देश का सबसे महत्वपूर्ण अधिकार होता है और इसकी सुरक्षा के लिए सैन्य, आर्थिक और कूटनीतिक रूप से शक्तिशाली होना अनिवार्य है। भारत का यह रुख स्पष्ट करता है कि देश की प्राथमिकताएं अपने नागरिकों के हितों की रक्षा और सीमाओं की सुरक्षा के इर्द-गिर्द घूमती हैं। किसी अन्य देश के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने के बजाय भारत अपनी प्रगति और विकास की राह पर आगे बढ़ने के लिए प्रतिबद्ध है। यह दृष्टिकोण राष्ट्र की दीर्घकालिक सुरक्षा रणनीति का एक अभिन्न हिस्सा है जो वैश्विक मंच पर भारत की एक जिम्मेदार और स्वाभिमानी छवि को दर्शाता है।

शक्ति प्रदर्शन का उद्देश्य और भारत की नीति

उपराष्ट्रपति ने अपने संबोधन में यह स्पष्ट किया कि भारत की शक्ति का विस्तार केवल अपनी रक्षात्मक क्षमताओं को सुदृढ़ करने के लिए है। किसी भी राष्ट्र के लिए अपनी संप्रभुता की रक्षा करना उसका प्राथमिक कर्तव्य होता है और इसके लिए उसे हर क्षेत्र में सक्षम होना पड़ता है। भारत अपनी रक्षा तैयारियों को आधुनिक बनाकर और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनकर यह सुनिश्चित करना चाहता है कि देश के सामने कोई बाहरी चुनौती न आए। दुनिया के अन्य देशों पर हुक्म चलाने की मानसिकता भारत की संस्कृति और संवैधानिक मूल्यों के विपरीत है। इसके बजाय, भारत आपसी सहयोग, कूटनीति और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के सिद्धांतों पर विश्वास करता है। उपराष्ट्रपति के इस कथन से यह संदेश जाता है कि भारत अपनी सीमाओं की सुरक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने के लिए तैयार है, लेकिन उसका यह सामर्थ्य किसी के विरुद्ध आक्रामकता दिखाने के लिए नहीं है। यह संतुलित दृष्टिकोण भारत को एक ऐसे राष्ट्र के रूप में स्थापित करता है जो अपनी सुरक्षा के प्रति सजग है और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का सम्मान करता है।

शक्तिशाली भारत का महत्व और भविष्य की दिशा

पृष्ठभूमि के तौर पर देखा जाए तो भारत हमेशा से ही वसुधैव कुटुंबकम की भावना के साथ आगे बढ़ा है। हालांकि, बदलते वैश्विक परिदृश्य में अपनी संप्रभुता की रक्षा करना और भी अधिक चुनौतीपूर्ण हो गया है। एक शक्तिशाली भारत न केवल अपने नागरिकों के लिए सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करेगा, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। जब कोई राष्ट्र आर्थिक और सैन्य रूप से मजबूत होता है, तो वह वैश्विक स्तर पर अपनी बात अधिक प्रभावी ढंग से रख सकता है। उपराष्ट्रपति का यह स्पष्टीकरण उन सभी अटकलों को समाप्त करता है जो भारत की बढ़ती शक्ति को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर की जाती रही हैं। भारत का उद्देश्य किसी भी प्रकार का विस्तारवाद नहीं है, बल्कि अपनी सीमाओं और अपनी संप्रभुता की अखंडता को बनाए रखना है। भविष्य में, भारत इसी नीति के आधार पर अपने रक्षा और कूटनीतिक संबंधों को आगे बढ़ाएगा। यह स्पष्ट है कि भारत की शक्ति का मुख्य आधार उसकी आंतरिक मजबूती और अपनी संप्रभुता के प्रति उसकी अटूट निष्ठा बनी रहेगी, जो आने वाले वर्षों में देश को और अधिक स्वावलंबी बनाएगी।

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