पाठशाला परिसर में अभियान का आयोजन स्थानीय शैक्षणिक संस्थान यानी पाठशाला के प्रांगण में हाल ही में विकसित भारत जन सेवा अभियान का भव्य आयोजन किया गया जिसमें अनेक प्रकार की गतिविधियों का संचालन किया गया। इस विशेष कार्यक्रम की शुरुआत विद्यालय के मुख्य द्वार पर स्वागत समारोह के साथ हुई जहाँ उपस्थित सभी अतिथियों और विद्यार्थियों ने देश के विकास में अपनी सहभागिता सुनिश्चित करने का संकल्प लिया। आयोजन के दौरान वक्ताओं ने अपने संबोधन में इस बात पर विशेष बल दिया कि किस प्रकार एक सशक्त और आत्मनिर्भर राष्ट्र के निर्माण में शिक्षा और जन कल्याणकारी योजनाओं की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। विद्यालय के शिक्षकों और प्रबंध समिति के सदस्यों ने मिलकर इस पूरे कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार की थी ताकि छोटे बच्चों और युवाओं के मन में राष्ट्र निर्माण के प्रति समर्पण की भावना को मजबूत किया जा सके। कार्यक्रम स्थल पर विभिन्न प्रकार के सांस्कृतिक और शैक्षणिक कार्यक्रमों की प्रस्तुतियां भी दी गईं जिन्होंने वहां मौजूद सभी लोगों का ध्यान आकर्षित किया और इस अभियान के उद्देश्यों को बेहद सरल तरीके से सबके सामने रखा।
राष्ट्र निर्माण और जन सेवा की रूपरेखा इस प्रकार के राष्ट्रव्यापी अभियानों का मुख्य उद्देश्य समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक सरकारी नीतियों और जनकल्याण की योजनाओं का लाभ सुगमता से पहुँचाना होता है। जब ऐसे आयोजनों को विद्यालयों और शिक्षण संस्थानों के स्तर पर आयोजित किया जाता है तो इसका सीधा सकारात्मक प्रभाव देश की युवा पीढ़ी पर पड़ता है जो भविष्य की नींव होती है। पाठशालाओं के माध्यम से जब विद्यार्थी इन अभियानों से जुड़ते हैं तो उनमें सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना का स्वतः विकास होने लगता है और वे देश की प्राथमिकताओं को बेहतर ढंग से समझने लगते हैं। विभिन्न प्रशासनिक और सामाजिक मंचों पर लगातार यह बात रेखांकित की जाती रही है कि बच्चों में नैतिक मूल्यों के साथ-साथ व्यावहारिक ज्ञान का होना भी उतना ही आवश्यक है जितना किताबी शिक्षा का। इस दिशा में विकसित भारत जन सेवा अभियान जैसे आयोजन मील का पत्थर साबित होते हैं जो विद्यार्थियों को किताबी दुनिया से बाहर निकालकर जमीनी वास्तविकताओं से रूबरू कराते हैं और उन्हें यह अहसास कराते हैं कि एक नागरिक के रूप में राष्ट्र के प्रति उनके क्या कर्तव्य हैं।
भविष्य की योजनाएं और जन भागीदारी आने वाले दिनों में इस तरह के आयोजनों के दायरे को और अधिक व्यापक बनाने की रूपरेखा तैयार की जा रही है ताकि देश के हर कोने तक इस संदेश को प्रभावी ढंग से पहुँचाया जा सके। स्थानीय प्रशासन और शिक्षण संस्थानों के बीच आपसी समन्वय को मजबूत करते हुए इस अभियान के तहत भविष्य में कई अन्य रचनात्मक गतिविधियों को भी जोड़ने का विचार किया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक समाज का प्रत्येक वर्ग इन विकासपरक अभियानों से पूरी सक्रियता के साथ नहीं जुड़ेगा, तब तक परिकल्पित लक्ष्यों को पूरी तरह से प्राप्त करना संभव नहीं होगा। इस सफल आयोजन के बाद स्थानीय स्तर पर लोगों में एक नया उत्साह देखने को मिला है और अभिभावकों ने भी विद्यालय प्रबंधन के इस प्रयास की खुलकर सराहना की है। आने वाले समय में इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रमों को अन्य विद्यालयों में भी चलाए जाने की संभावना है ताकि अधिक से अधिक विद्यार्थियों और उनके परिवारों को इसके उद्देश्यों से जोड़ा जा सके और एक मजबूत सामाजिक ताने-बाने का निर्माण किया जा सके।