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धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा: भजनलाल सरकार करेगी 300 से अधिक स्थलों का कायाकल्प
राजस्थान में धार्मिक पर्यटन को अभूतपूर्व बढ़ावा देने के लिए भजनलाल सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है, जिसके तहत राज्यभर के तीन सौ से अधिक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों का कायाकल्प किया जाएगा।
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Ankit Yadav
04 सित 2026, 15:57
राजस्थान की भजनलाल सरकार ने राज्य के भीतर धार्मिक पर्यटन को और अधिक सशक्त और उन्नत बनाने की दिशा में एक बहुत ही महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। इस महत्वाकांक्षी पहल के अंतर्गत, प्रदेश के विभिन्न जिलों में स्थित तीन सौ से अधिक प्रमुख धार्मिक और आध्यात्मिक स्थलों का समग्र रूप से कायाकल्प किया जाएगा। सरकार का मुख्य उद्देश्य इन पवित्र स्थानों पर आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं प्रदान करना और राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक एवं धार्मिक विरासत को राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान दिलाना है। इस योजना के माध्यम से ऐतिहासिक मंदिरों और तीर्थस्थलों की दशा में अभूतपूर्व सुधार देखने को मिलेगा।
बुनियादी ढांचे का विकास और श्रद्धालुओं की सुविधा
राजस्थान सरकार की इस व्यापक योजना के तहत चयनित किए गए सभी धार्मिक केंद्रों पर बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाया जाएगा। इनमें मुख्य रूप से श्रद्धालुओं के लिए विश्राम गृह, बेहतर परिवहन संपर्क, स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति, प्रकाश व्यवस्था, पार्किंग की पर्याप्त जगह और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम शामिल हैं। पिछले कुछ समय से लगातार यह मांग की जा रही थी कि ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में स्थित प्राचीन मंदिरों का जीर्णोद्धार किया जाए, ताकि वहां पर्यटन की असीम संभावनाओं को तलाशा जा सके। इस नई पहल से न केवल स्थानीय स्तर पर धार्मिक गतिविधियों में वृद्धि होगी, बल्कि आसपास के क्षेत्रों के आर्थिक विकास को भी एक नई गति मिलने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है।
रोजगार के नए अवसरों का सृजन
धार्मिक स्थलों के कायाकल्प से केवल पर्यटन को ही बढ़ावा नहीं मिलेगा, बल्कि इसके दूरगामी परिणाम स्थानीय रोजगार के अवसरों के रूप में भी सामने आएंगे। जब इन पवित्र स्थलों पर यात्रियों की संख्या में बढ़ोतरी होगी, तो वहां छोटे व्यवसायों, हस्तशिल्प विक्रेताओं, स्थानीय गाइडों और होटल तथा परिवहन उद्योगों से जुड़े लोगों की आय में भी उल्लेखनीय सुधार होगा। सरकार की ओर से यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि जीर्णोद्धार कार्य के दौरान इन ऐतिहासिक और प्राचीन धरोहरों की मूल वास्तुकला और ऐतिहासिक स्वरूप के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ न हो, बल्कि उनकी प्राचीन गरिमा को पूरी तरह से सुरक्षित रखते हुए उन्हें आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया जाए।
आने वाले दिनों में राज्य प्रशासन और पर्यटन विभाग मिलकर इस पूरी परियोजना की रूपरेखा तैयार करेंगे और चरणबद्ध तरीके से निर्माण तथा सौंदर्यीकरण के कार्यों को अमलीजामा पहनाएंगे। स्थानीय लोगों, पुजारियों और धार्मिक कमेटियों से भी इस कार्य में सहयोग लिया जाएगा ताकि विकास कार्य पारदर्शी और प्रभावी ढंग से पूरे हो सकें। भजनलाल सरकार के इस दूरदर्शी कदम से यह साफ जाहिर होता है कि राज्य में धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन आने वाले वर्षों में विकास का एक नया और मजबूत स्तंभ बनने जा रहा है, जिससे प्रदेश के पर्यटन नक्शे पर एक ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिलेगा।