भूमि पूजन के साथ दीपोत्सव की विधिवत शुरुआत
उत्सव की रूपरेखा को धरातल पर उतारने के लिए शुक्रवार के दिन विशेष धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराया गया। इस कार्यक्रम के दौरान उच्च शिक्षा संस्थान के प्रमुख प्रशासनिक अधिकारी ने प्राध्यापकों तथा छात्र कार्यकर्ताओं की उपस्थिति में अनुष्ठान को पूरा किया। इसके बाद पवित्र नदी के तट पर विशेष पूजा-अर्चना कर इस बड़े आयोजन की सफलता के लिए प्रार्थना की गई। नगर में आयोजित होने वाले इस दसवें दीपोत्सव को लेकर स्थानीय स्तर पर उत्साह का माहौल है और सभी लोग तैयारियों में जुट गए हैं। इस शुरुआत के साथ ही शहर में रोशनी के पर्व को ऐतिहासिक बनाने की दिशा में पहला कदम बढ़ा दिया गया है। प्रशासनिक और शैक्षणिक संस्थानों के आपसी सहयोग से इस भव्य आयोजन की रूपरेखा तैयार की जा रही है ताकि आने वाले दिनों में किसी भी प्रकार की असुविधा न हो और सभी कार्य समयबद्ध तरीके से पूरे किए जा सकें।
तीस लाख दीपों को प्रज्ज्वलित करने का विशाल लक्ष्य
आगामी उत्सव के दौरान निर्धारित किए गए लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए बड़े पैमाने पर श्रमदान और भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है। योजना के अनुसार इस बार नदी के किनारे रिकॉर्ड संख्या में मिट्टी के दीये जलाने का बड़ा लक्ष्य तय किया गया है। इस कठिन और विशाल कार्य को सुचारू रूप से पूरा करने के लिए संबंधित उच्च शिक्षण संस्थान के हजारों छात्र कार्यकर्ता पूरी निष्ठा के साथ अपनी सेवाएं देंगे। अपनी जिम्मेदारियों को निभाने के लिए इन सभी कार्यकर्ताओं को अलग-अलग दायित्व सौंपे गए हैं ताकि आयोजन के दिन किसी भी प्रकार की व्यवस्था में कोई कमी न रह जाए। प्रशासन और विश्वविद्यालय प्रबंधन आपसी समन्वय के साथ इस पूरी प्रक्रिया की लगातार निगरानी कर रहा है ताकि निर्धारित समय सीमा के भीतर सभी दीपों को सुरक्षित रूप से प्रज्ज्वलित किया जा सके।
पुराने रिकॉर्ड को पीछे छोड़ने की अनूठी तैयारी
यह शिक्षण संस्थान अपने ही द्वारा पहले स्थापित किए गए श्रेष्ठ कीर्तिमान को एक बार फिर से पार करने के लिए पूरी ताकत झोंक रहा है। अतीत में भी इस प्रकार के वृहद कार्यक्रमों में संस्था के विद्यार्थियों ने अपनी सक्रिय भागीदारी से देश-दुनिया का ध्यान आकर्षित किया था। इस बार के आयोजन का दायरा और अधिक विस्तृत रखा गया है ताकि रोशनी के इस पर्व को वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान मिल सके। लगातार बढ़ाई जा रही इस क्षमता से न केवल उत्सव की भव्यता में वृद्धि होगी बल्कि युवाओं को बड़े आयोजनों के प्रबंधन का व्यावहारिक अनुभव भी प्राप्त होगा। स्थानीय नागरिकों और देश भर से आने वाले श्रद्धालुओं में इस अद्वितीय नजारे को देखने को लेकर भारी उत्सुकता बनी हुई है।