सुबह दस बजे तक का विसर्जन आंकड़ा
जिले की सीमा के भीतर कुल चौवालीस सौ साठ दुर्गा प्रतिमाओं को स्थापित किया गया था। इनमें से गुरुवार के दिन सुबह के दस बजने से पहले ही चार हजार प्रतिमाओं को जल स्रोतों में प्रवाहित किया जा चुका था। इन सभी प्रतिमाओं में शहरी इलाके के भीतर स्थापित चौदह सौ तीस प्रतिमाएं भी शामिल थीं। शहरी क्षेत्र की इन प्रतिमाओं में से ग्यारह सौ तंतीस प्रतिमाओं का विसर्जन गुरुवार की सुबह तक संपन्न हो चुका था। बाकी बची हुई प्रतिमाओं को सुरक्षित तरीके से विसर्जित करने की प्रक्रिया लगातार जारी रखी गई। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान कानून व्यवस्था को पूरी तरह से कायम रखने के लिए प्रशासन की तरफ से विशेष प्रबंध किए गए थे। विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया था ताकि किसी भी प्रकार की असुविधा से बचा जा सके और सब कुछ शांतिपूर्ण ढंग से पूरा हो सके।
प्रशासनिक निगरानी और सुरक्षा इंतजाम
अधिकारियों ने सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेने के लिए देर रात तक विभिन्न क्षेत्रों का भ्रमण किया। राजघाट सहित सभी महत्वपूर्ण विसर्जन स्थलों पर भारी संख्या में पुलिस बल को तैनात किया गया था। घाटों पर सुरक्षा की दृष्टि से सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से लगातार नजर रखी जा रही थी। इसके अलावा बम निरोधक दस्ते की टीम ने भी घाटों और अन्य भीड़भाड़ वाले स्थानों की सघन जांच की। विसर्जन व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए एक अनूठी व्यवस्था बनाई गई थी जिसमें प्रत्येक प्रतिमा के साथ एक सिपाही को नोडल अधिकारी के रूप में नियुक्त किया गया था। प्रतिमा का विसर्जन पूरा होने के तुरंत बाद यह नोडल सिपाही कंट्रोल रूम को अपनी रिपोर्ट भेज रहे थे। कंट्रोल रूम से लगातार थाना प्रभारियों के संपर्क में रहकर पूरे घटनाक्रम पर पैनी नजर रखी जा रही थी ताकि किसी भी संभावित खतरे को समय रहते टाला जा सके और स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में रहे।
शांतिपूर्ण संचालन और आगे की स्थिति
जिले भर में चल रहे इस बड़े धार्मिक आयोजन के दौरान शांति और व्यवस्था बनाए रखना पुलिस और प्रशासन की प्राथमिकता रही। अधिकारियों की लगातार सक्रियता के कारण सभी जगह विसर्जन का कार्य सुचारू रूप से आगे बढ़ रहा है। शहरी और ग्रामीण दोनों ही क्षेत्रों में स्थापित कुल प्रतिमाओं में से अधिकांश का विसर्जन तय समय के भीतर ही पूरा हो गया। जो थोड़ी बहुत प्रतिमाएं विसर्जन के लिए शेष रह गई थीं उनके लिए भी सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी लगातार कंट्रोल रूम के माध्यम से स्थिति की समीक्षा कर रहे थे और मैदानी अमले को आवश्यक निर्देश दे रहे थे। तकनीकी उपकरणों और सतर्क जवानों की तैनाती से घाटों पर किसी भी प्रकार की अव्यवस्था नहीं फैल पाई। प्रशासन के पुख्ता इंतजामों और नोडल सिपाहियों की मुस्तैदी के चलते पूरा विसर्जन अभियान बिना किसी बाधा के सफलतापूर्वक आगे बढ़ता रहा और अधिकारियों ने राहत की सांस ली।