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शिक्षा ब्रेकिंग

यूपी में सड़कों पर दंगा किया तो सरकारी नौकरी नहीं मिलेगी, सीएम योगी ने दी चेतावनी

UP Sarkari Naukari : उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी की सीधी भर्ती के लिए उम्मीदवारों के चरित्र सत्यापन से जुड़े नियम सख्त किए गए हैं। दंगा करने वाले छात्रों को सरकारी नौकरी दी जाएगी।

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Administrator
29 अक्ट 2026, 13:14
यूपी में सड़कों पर दंगा किया तो सरकारी नौकरी नहीं मिलेगी, सीएम योगी ने दी चेतावनी

UP Sarkari Naukari : उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी की सीधी भर्ती के लिए उम्मीदवारों के चरित्र सत्यापन से जुड़े नियम सख्त किए गए हैं। नियुक्ति विभाग के प्रमुख सचिव एम. देवराज की ओर से जारी निर्देशों के मुताबिक, नए नियम सरकारी विभागों, निगमों, परिषदों और स्थानीय निकायों में सीधी भर्ती से नियुक्त होने वाले उम्मीदवारों पर लागू होंगे।

 

नई व्यवस्था के तहत पुलिस को उम्मीदवारों की कैरेक्टर वेरिफिकेशन रिपोर्ट 30 दिनों के भीतर जमा करनी होगी। हालांकि, केवल एफआईआर दर्ज होने या जांच लंबित रहने से किसी उम्मीदवार को अपने आप नौकरी के लिए अयोग्य नहीं माना जाएगा। प्रत्येक मामले में आरोपों की प्रकृति, उपलब्ध तथ्यों और वेरिफिकेशन रिपोर्ट पर विचार किया जाएगा।

 

हिंसक गतिविधियों पर भी होगी नजर

 

नए निर्देशों में ऐसे मामलों का भी उल्लेख है, जिनमें उम्मीदवार सरकार बदलने के उद्देश्य से हिंसक गतिविधियों में शामिल पाए जाएं। ऐसे आचरण को पात्रता तय करते समय ध्यान में रखा जा सकता है। हालांकि, केवल किसी उम्मीदवार की राजनीतिक विचारधारा के आधार पर उसे नौकरी से वंचित नहीं किया जाएगा।

 

यह कदम मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उन हालिया टिप्पणियों के बीच आया है, जिनमें उन्होंने भारत में बांग्लादेश जैसी राजनीतिक उथल-पुथल पैदा करने की कथित कोशिशों को लेकर चेतावनी दी थी। सोशल मीडिया मंच एक्स पर उन्होंने कहा था, “लोकतंत्र में सत्ता का रास्ता लोगों के जनादेश से निकलता है, अव्यवस्था से नहीं।”

 

किन गतिविधियों को माना जा सकता है गंभीर?

 

चरित्र सत्यापन के दौरान उम्मीदवार के आचरण और संबंधित मामलों की जांच की जाएगी। इनमें परीक्षा और भर्ती से जुड़ी अनियमितताएं, गंभीर अपराध और अन्य गतिविधियां शामिल हो सकती हैं, जैसे:

 

- पेपर लीक या परीक्षा में धोखाधड़ी 

- सॉल्वर गैंग की मदद से परीक्षा पास करना 

- अपनी जगह किसी दूसरे व्यक्ति को परीक्षा में बैठाना या डमी उम्मीदवार का इस्तेमाल 

- जाली प्रमाणपत्र या फर्जी दस्तावेज जमा करना 

- साइबर अपराध, डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगी और यूपीआई धोखाधड़ी 

- आतंकवाद, भ्रष्टाचार और गंभीर आपराधिक गतिविधियां 

 

21 साल की उम्र के बाद के आचरण की भी जांच

 

निर्देशों के मुताबिक, उम्मीदवार के 21 वर्ष की उम्र पूरी करने के बाद के आचरण को भी चरित्र सत्यापन में देखा जा सकता है। रिपोर्ट में संबंधित गतिविधियों में पिछले तीन वर्षों के दौरान लगातार शामिल रहने के संकेत मिलने पर उन पर विचार किया जा सकता है। हालांकि, उम्मीदवार के व्यवहार में बदलाव के ठोस प्रमाण मिलने पर मामले का अलग से आकलन किया जा सकता है।

 

क्या एफआईआर दर्ज होने पर नौकरी रुक जाएगी?

 

नहीं। नई नीति स्पष्ट करती है कि सिर्फ एफआईआर दर्ज होना या आपराधिक जांच लंबित होना अपने आप में अयोग्यता नहीं है। उम्मीदवार के खिलाफ लगे आरोप, उपलब्ध साक्ष्य और जांच के निष्कर्षों को देखकर फैसला किया जाएगा। यानी मामला दर्ज होने और दोषी साबित होने के बीच अंतर रखा जाएगा।

 

पुलिस को 30 दिन में देनी होगी रिपोर्ट

 

भर्ती प्रक्रिया में देरी कम करने के लिए पुलिस अधिकारियों को कैरेक्टर वेरिफिकेशन रिपोर्ट 30 दिनों के भीतर देनी होगी। इसका मकसद यह है कि सिर्फ सत्यापन लंबित होने के कारण नियुक्ति अनिश्चित समय तक न अटकी रहे। जरूरत पड़ने पर उम्मीदवार के पिछले विभाग से उसके आचरण और सेवा संबंधी जानकारी भी मांगी जा सकती है।

 

पहले से सरकारी सेवा में कार्यरत कर्मचारियों पर क्या लागू होगा?

 

नई व्यवस्था का दायरा सीधी भर्ती के जरिए सरकारी सेवा में आने वाले उम्मीदवारों तक सीमित है। पहले से सरकारी विभागों में कार्यरत कर्मचारियों को इन नए प्रावधानों के तहत दोबारा कैरेक्टर वेरिफिकेशन कराने की जरूरत नहीं होगी।

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