लखनऊ कलेक्ट्रेट के सामने महिलाओं का अनूठा प्रदर्शन
राजधानी लखनऊ में कलेक्ट्रेट के ठीक सामने आज दोपहर 3 बजे एक अनोखा विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। कम्युनिस्ट पार्टी के बैनर तले आयोजित इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल हुईं। इन प्रदर्शनकारी महिलाओं के हाथों में लाल झंडे के साथ-साथ खाली थाली और बेलन भी मौजूद थे। हाथों में रसोई के बर्तन थामे इन महिलाओं ने सरकार की आर्थिक नीतियों के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की और अपना आक्रोश व्यक्त किया। यह पूरा विरोध प्रदर्शन आवश्यक खाद्य पदार्थों और ईंधन के दामों में लगातार हो रही बेतहाशा बढ़ोतरी के खिलाफ था। प्रदर्शन में हिस्सा लेने वाली अधिकतर महिलाएं बेहद साधारण और गरीब परिवारों से ताल्लुक रखती हैं। इनमें से कई महिलाएं दूसरों के घरों में झाड़ू और पोंछा लगाकर अपने परिवार का गुजारा चलाने को मजबूर हैं। रसोई चलाना इन महिलाओं के लिए हर दिन एक बड़ा संघर्ष बनता जा रहा है क्योंकि हर घरेलू वस्तु की कीमत आसमान छू रही है। घर की रसोई की मुख्य संचालक होने के नाते महंगाई की सबसे गहरी मार इन्हीं महिलाओं को झेलनी पड़ रही है। इसी पीड़ा को उजागर करने के लिए इन महिलाओं ने सड़कों पर उतरकर यह अनूठा मार्च निकाला और प्रशासन तक अपनी बात पहुंचाई।
महंगाई और जमाखोरी पर नेताओं के तीखे बयान
प्रदर्शन के दौरान ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक वीमेंस एसोसिएशन से जुड़ीं मधु गर्ग ने सरकार की नीतियों पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने मंच से कहा कि आज का आम नागरिक भयंकर महंगाई से बुरी तरह त्रस्त है। सरकार एक तरफ उद्योगपतियों के बड़े-बड़े टैक्स माफ कर रही है और बैंकों के लाखों-करोड़ों रुपए के कर्ज पर पानी फेर रही है। दूसरी तरफ देश का सामान्य आदमी गरीबी और बढ़ती बेरोजगारी के कारण मरने की स्थिति में पहुंच गया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार से जुड़े कारणों का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि ईरान से तेल आयात बंद करके अमेरिका से महंगा तेल खरीदा जा रहा है। इसी गलत फैसले के कारण पेट्रोल और डीजल के दाम लगातार बढ़ते जा रहे हैं। यदि सरकार अपनी मौजूदा नीतियों में उचित सुधार कर ले तो आम जनता को महंगाई से बड़ी राहत मिल सकती है। प्रदर्शनकारियों के साथ चल रहे प्रवीण सिंह ने कहा कि रसोई को संभालने की पूरी जिम्मेदारी महिलाओं के कंधों पर होती है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बाजार में सामानों के दाम प्राकृतिक रूप से नहीं बढ़ रहे हैं बल्कि इसके पीछे जमाखोरी का बड़ा खेल चल रहा है। इस पूरी कालाबाजारी और मूल्य वृद्धि का कोई भी सीधा फायदा देश के मेहनतकश किसानों तक नहीं पहुंच रहा है।
दाल और सब्जियों के महंगे होने से बढ़ी मुश्किलें
वर्तमान समय में बाजार की स्थिति यह हो चुकी है कि हरी सब्जियां, दाल, चीनी और दूध जैसी बुनियादी जरूरत की चीजें लगातार महंगी होती जा रही हैं। आम आदमी की मासिक आमदनी में किसी भी प्रकार की बढ़ोतरी नहीं हो रही है लेकिन खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है। घर का बजट पूरी तरह से बिगड़ चुका है और दो वक्त की रोटी जुटाना भी गरीब परिवारों के लिए कठिन हो गया है। प्रदर्शन में शामिल लोगों ने सरकार के सामने अपनी स्पष्ट मांगें रखीं। उनकी मुख्य मांग यह है कि प्रशासन और सरकार तत्काल प्रभाव से महंगाई पर लगाम कसे। जमाखोरी करने वाले तत्वों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि आम जनता को बढ़ती कीमतों से कुछ राहत मिल सके। यदि समय रहते इन आर्थिक समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो गरीबों का जीवन और अधिक कठिन हो जाएगा। सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि देश के प्रत्येक नागरिक को उसकी बुनियादी जरूरतें उचित दामों पर आसानी से मिल सकें। इस पूरी स्थिति ने एक बार फिर से यह साबित कर दिया है कि देश के निचले और मध्यम वर्ग के सामने महंगाई एक बहुत बड़ा संकट बन चुकी है।