बुधवार के कारोबारी सत्र में दोनों प्रमुख सूचकांक लुढ़के
भारतीय शेयर बाजार के भीतर बिकवाली का सिलसिला बुधवार को भी पूरी तरह से जारी रहा। सेंसेक्स और निफ्टी के आंकड़े लाल निशान के दायरे में ही सिमट गए। बीते कल के कारोबार के दौरान सेंसेक्स कुल 48.78 अंक यानी 0.06 प्रतिशत की कमजोरी दर्ज कराते हुए 72,480.29 के स्तर पर बंद हुआ। इसके साथ ही निफ्टी 50 इंडेक्स में भी बड़ी गिरावट देखने को मिली। निफ्टी 50 इंडेक्स 95.75 अंक यानी 0.42 प्रतिशत लुढ़ककर सीधे 22,620.45 के स्तर पर बंद हुआ। इस प्रकार लगातार दूसरे कारोबारी सत्रों में भी बाजार के निवेशकों को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है। सप्ताह के इन शुरुआती दिनों में शेयर बाजार की चाल बेहद सुस्त और कमजोर बनी हुई है। बाजार के इन आंकड़ों ने निवेशकों की चिंता को काफी ज्यादा बढ़ा दिया है। विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा दौर में बाजार की दिशा तय करने वाले कई बाहरी कारक सक्रिय हैं।
विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली से बाजार पर बढ़ा दबाव
घरेलू शेयर बाजार पर इस समय विदेशी निवेशकों की आक्रामक बिकवाली का भारी दबाव बना हुआ है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उछाल आ रहा है। इसके साथ ही बॉन्ड यील्ड में भी जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इन दोनों बड़े कारकों ने मिलकर घरेलू निवेशकों के सेंटीमेंट को बुरी तरह बिगाड़ दिया है। विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी एफआईआई की ओर से भारतीय बाजारों से पैसा निकालने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। सितंबर महीने के पूरे आंकड़ों पर नजर डालें तो विदेशी निवेशकों ने कुल 44,000 करोड़ रुपये के भारतीय शेयर बेच डाले हैं। यह बिकवाली केवल महीने भर तक सीमित नहीं रही बल्कि इसका असर हालिया सत्रों में भी साफ दिखा है। पिछले दो कारोबारी सत्रों के दौरान ही विदेशी निवेशकों द्वारा 2000 करोड़ रुपये से अधिक की बिकवाली दर्ज की जा चुकी है। इस लगातार बिकवाली के कारण बाजार के अंदर लिक्विडिटी और कॉन्फिडेंस दोनों पर असर पड़ रहा है।
अमेरिकी बाजार के तीन बड़े संकेतों का भारतीय बाजार पर असर
इसी बीच अमेरिकी शेयर बाजार की तरफ से तीन बड़े संकेत मिल रहे हैं। इन तीनों संकेतों का सीधा असर आज भारतीय शेयर बाजार पर देखने को मिल सकता है। अमेरिकी महंगाई के ताजा आंकड़ों और बॉन्ड यील्ड की स्थिति से वैश्विक बाजारों में राहत के कुछ संकेत उभरे हैं। अमेरिकी अर्थव्यवस्था से मिल रहे इन घटनाक्रमों का असर एशिया के दूसरे बाजारों के साथ भारतीय बाजार पर भी पड़ता है। निवेशक इस बात पर कड़ी नजर बनाए हुए हैं कि अमेरिकी संकेतों का घरेलू शेयरों पर क्या रुख रहता है। जानकारों के अनुसार अमेरिकी महंगाई के मोर्चे पर नरमी आने से फेडरल रिजर्व के नीतिगत फैसलों को लेकर तस्वीर साफ हो सकती है। घरेलू स्तर पर एफआईआई की बिकवाली और कच्चे तेल के दाम अभी भी मुख्य चिंता बने हुए हैं। आने वाले सत्रों में बाजार की चाल इन्हीं मिलीजुली वैश्विक और घरेलू परिस्थितियों से तय होगी।