प्रसूति कॉन का समापन और विशेषज्ञों के विचार
आईएमएस बीएचयू के प्रसूति विभाग और केएजीओएफ की ओर से आयोजित तीन दिवसीय प्रसूति कॉन का समापन शुक्रवार को सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस महत्वपूर्ण आयोजन के दौरान देश भर के चिकित्सा विशेषज्ञ शामिल हुए और प्रसूति विज्ञान से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की। कार्यक्रम के समापन सत्र के दौरान कोल्हापुर स्थित यशवंत आयुर्वेद कॉलेज की डॉक्टर विशाला तिरुपति ने अपने बहुमूल्य विचार साझा किए। उन्होंने अपने संबोधन में इस बात पर जोर दिया कि संतान प्राप्ति में असमर्थ दंपतियों के इलाज के दौरान आयुर्वेद की प्राचीन पद्धतियों को भी प्रमुखता से शामिल किया जाना चाहिए। वर्तमान समय में कई दम्पति कृत्रिम गर्भाधान यानी आईवीएफ की प्रक्रिया से गुजरते हैं परंतु कई बार तमाम प्रयासों के बाद भी उन्हें सफलता नहीं मिल पाती है। ऐसे निराश मामलों में महिलाओं को मुख्य चिकित्सा प्रक्रिया से पहले पंचकर्म चिकित्सा का सहारा लेना चाहिए। डॉक्टर विशाला ने स्पष्ट किया कि पंचकर्म कराने के उपरांत कृत्रिम गर्भाधान के माध्यम से गर्भधारण करने की संभावनाओं में काफी हद तक इजाफा हो जाता है। इस दिशा में कई स्थानों पर सकारात्मक कार्य भी किए जा रहे हैं जिसका लाभ मरीजों को मिल रहा है।
सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम और आयुर्वेदिक उपाय
डॉक्टर विशाला तिरुपति ने अपने संबोधन में महिलाओं में लगातार फैल रही एक गंभीर बीमारी सर्वाइकल कैंसर पर भी गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने बताया कि महिलाओं के शरीर में सर्वाइकल कैंसर के मामले दिन-प्रतिदिन बढ़ते जा रहे हैं जो एक चिंता का विषय है। इस घातक बीमारी को पूरे शरीर में पूरी तरह से फैलने में लगभग 12 साल का लंबा समय लग जाता है। यदि इस बीमारी से ग्रसित मरीज की पहचान शुरुआती चरण में ही हो जाए तो इसे बढ़ने से रोका जा सकता है। शुरुआती स्टेज पर रोग का पता चलने पर क्षार कर्म और विभिन्न आयुर्वेदिक औषधियों के प्रयोग से इस गंभीर समस्या का प्रभावी ढंग से समाधान किया जा सकता है। इसके अलावा कार्यक्रम के दौरान महिलाओं के जीवन से जुड़े अन्य जरूरी स्वास्थ्य पहलुओं पर भी गहन विचार-विमर्श किया गया। विशेषज्ञों ने मासिक धर्म के स्वास्थ्य, खानपान और दिनचर्या से जुड़ी जीवनशैली, विवाह की उचित आयु तथा प्रजनन जीवन चक्र जैसे महत्वपूर्ण कारकों पर मंथन किया। इन तमाम बातों का डिसमेनोरिया यानी दर्दनाक माहवारी, एंडोमेट्रियोसिस और फाइब्रॉइड्स जैसी स्वास्थ्य समस्याओं की रोकथाम में क्या योगदान रहता है इस पर भी विस्तार से प्रकाश डाला गया।
समारोह में प्रमुख हस्तियों की सक्रिय उपस्थिति
आईएमएस बीएचयू में संपन्न हुए इस तीन दिवसीय भव्य प्रसूति कॉन के दौरान चिकित्सा जगत की कई दिग्गज हस्तियों की मौजूदगी विशेष आकर्षण का केंद्र रही। इस महत्वपूर्ण आयोजन की सफलता में संस्थान के प्रमुख अधिकारियों और प्रोफेसरों का सक्रिय योगदान रहा। कार्यक्रम के दौरान आईएमएस बीएचयू के निदेशक प्रोफेसर एसएन संखवार ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और स्वास्थ्य संबंधी विभिन्न शोधों पर अपने विचार रखे। उनके साथ ही आयुर्वेद संकाय के प्रमुख प्रोफेसर केएन मूर्ति भी प्रमुख रूप से मौजूद रहे और उन्होंने आयुर्वेद तथा आधुनिक चिकित्सा के समन्वय पर बल दिया। इन दोनों वरिष्ठ अधिकारियों के अलावा चिकित्सा क्षेत्र के कई अन्य जाने-माने विशेषज्ञ, डॉक्टर और शोधार्थी भी इस संगोष्ठी का हिस्सा बने। सभी ने मिलकर महिला स्वास्थ्य से जुड़ी विभिन्न जटिल समस्याओं और उनके आयुर्वेदिक तथा आधुनिक समाधानों पर अपने अनुभव साझा किए। इस तरह के आयोजनों से न केवल चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में नए रास्ते खुलते हैं बल्कि डॉक्टरों को भी एक दूसरे के अनुभवों से सीखने का बेहतरीन अवसर प्राप्त होता है। समापन समारोह के अंत में सभी ने इस प्रकार के सम्मेलनों को भविष्य में भी निरंतर आयोजित करने का संकल्प लिया।