अस्पतालों में बड़े पैमाने पर धांधली का खुलासा
आयुष्मान भारत योजना के तहत उपचार के नाम पर लखनऊ और गोंडा के 21 निजी चिकित्सा संस्थानों में गंभीर फर्जीवाड़ा सामने आया है। राज्य स्वास्थ्य एजेंसी, जिसे साचीज के नाम से जाना जाता है, ने इन अस्पतालों के खिलाफ जांच के बाद कड़ा रुख अपनाया है। लखनऊ में जिन प्रमुख संस्थानों की गहन जांच की गई, उनमें चंद्रावती अस्पताल, दुबे जी अस्पताल, जीवक अस्पताल, काइंड अस्पताल, मेडलाइफ रिसर्च एंड ट्रामा सेंटर तथा एसआर अस्पताल शामिल हैं। इन अस्पतालों में मरीजों को भर्ती करने की प्रक्रिया और इलाज के दावों में भारी विसंगतियां मिली हैं। जांच के दौरान यह पाया गया कि सामान्य बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को भी केवल अधिक भुगतान प्राप्त करने के उद्देश्य से आईसीयू और एचडीयू यानी हाई डिपेंडेंसी यूनिट में भर्ती दिखाया गया था। चिकित्सा मानकों का पालन न करना और रिकॉर्ड में हेरफेर करना इन संस्थानों की कार्यप्रणाली का हिस्सा बन गया था, जिसके कारण अब प्रशासन ने इन सभी केंद्रों को जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए नोटिस जारी कर दिए हैं।
वित्तीय अनियमितताएं और बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव
साचीज की मुख्य कार्यकारी अधिकारी अर्चना वर्मा के अनुसार, अस्पतालों की जांच में धन की अवैध वसूली और सुविधाओं में कमी के कई मामले उजागर हुए हैं। कैशलेस सुविधा उपलब्ध होने के बावजूद मरीजों और उनके परिजनों से नकद भुगतान लेने की अनेक शिकायतें प्राप्त हुई थीं। इसके अतिरिक्त, ड्यूटी रोस्टर का सही ढंग से पालन नहीं हो रहा था और कई स्थानों पर विशेषज्ञ चिकित्सक अनुपस्थित मिले। गंभीर मरीजों की देखभाल के लिए प्रशिक्षित स्टाफ की भारी कमी पाई गई है। गोंडा के 15 अस्पतालों की पड़ताल में तो स्थिति और भी चिंताजनक रही, जहां आयुष्मान भारत योजना से जुड़ी अनिवार्य जानकारी और टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर प्रदर्शित नहीं थे। कहीं-कहीं संक्रमण से बचाव के लिए बायो-मेडिकल कचरे का सुरक्षित निस्तारण तक नहीं हो रहा था। एक अस्पताल में पैथोलॉजी लैब का अस्तित्व ही नहीं था और न ही किसी मान्यता प्राप्त लैब के साथ कोई अनुबंध मिला। एक अन्य मामले में, सुरक्षा मानकों को दरकिनार कर अस्पताल के बेसमेंट में ही ऑपरेशन थिएटर और आईसीयू का संचालन किया जा रहा था, जबकि वहां अग्निशमन के उपकरण भी नहीं थे।
दोषियों के विरुद्ध भविष्य की कानूनी कार्ययोजना
सरकारी कैशलेस चिकित्सा योजना के दायरे में घटिया इंप्लांट का उपयोग करने के आरोपों ने मामले को और गंभीर बना दिया है। इन अस्पतालों से मांगे गए जवाबों की विस्तृत समीक्षा की जाएगी और उसके उपरांत साचीज द्वारा सख्त कानूनी कदम उठाए जाएंगे। संबंधित अस्पतालों के पास अपना पक्ष रखने का अवसर है, परंतु संतोषजनक उत्तर न मिलने की स्थिति में उन पर भारी जुर्माना लगाने और वित्तीय नुकसान की भरपाई करने के निर्देश दिए जाएंगे। यदि जांच में कोई संस्थान पूरी तरह से दोषी पाया जाता है, तो योजना के तहत उनकी सूचीबद्धता को स्थाई रूप से रद्द करने की प्रक्रिया भी शुरू की जा सकती है। स्वास्थ्य विभाग इन सभी निजी चिकित्सा केंद्रों की गतिविधियों पर बारीकी से नजर रखे हुए है ताकि मरीजों के साथ हो रहे इस खिलवाड़ को रोका जा सके। भविष्य में इस प्रकार की धांधली रोकने के लिए अस्पतालों को कड़े दिशा-निर्देशों का पालन करना होगा और किसी भी प्रकार की कोताही को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, क्योंकि यह मामला सीधे तौर पर आम नागरिकों के जीवन और उनके अधिकारों से जुड़ा हुआ है।