शैक्षणिक संस्थानों और चिकित्सालयों में स्वच्छता पर जोर
राज्यभर के कालेजों और विश्वविद्यालयों के साथ-साथ चिकित्सालयों में स्थित भोजनालयों की स्वच्छता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पेयजल की सुरक्षा और पौष्टिक श्रीअन्न आधारित भोजन पर जोर दिया जा रहा है ताकि युवा पीढ़ी स्वस्थ रह सके। होटल, भोजनालय, छात्रवासों और विवाह स्थलों पर भोजन की बर्बादी रोकने के लिए एक विशेष संदेश प्रसारित किया जाएगा। इसके तहत लोगों से आग्रह किया जाएगा कि वे अपनी थाली में केवल उतना ही भोजन लें जिससे नाली में कुछ भी व्यर्थ न बहे। बचा हुआ भोजन समय पर जरूरतमंद व्यक्तियों तक पहुँचाने के लिए भी नागरिकों का आह्वान किया जाएगा। यह पूरा कार्यक्रम चौदह दिनों तक विभिन्न चरणों में स्कूलों से लेकर बाजारों तक संचालित किया जाएगा। विद्यार्थियों को जंक फूड, बहुत अधिक वसा और मीठे खाद्य पदार्थों के सेवन से होने वाले नुकसान के बारे में विस्तार से समझाया जाएगा। विद्यालयों में स्वस्थ टिफिन दिवस, मिलेट टिफिन, पौष्टिक नाश्ता और हाथों को सही तरीके से धोने का लाइव प्रदर्शन जैसी कई गतिविधियाँ आयोजित की जाएंगी। इसके अतिरिक्त पोस्टर बनाने, नारे लिखने और निबंध प्रतियोगिताओं का आयोजन भी किया जाएगा।
मोबाइल प्रयोगशालाओं से खाद्य पदार्थों की ऑन-स्पॉट जांच
कार्यक्रम के अगले चरण में शहरों के मुख्य पार्कों और अन्य सार्वजनिक स्थलों पर विशेष रूप से मोबाइल फूड टेस्टिंग लैब तैनात की जाएंगी। इन प्रयोगशालाओं के माध्यम से दूध, घी, तेल, मसालों और विभिन्न प्रकार की मिठाइयों में मिलावट की मौके पर ही जाँच की जाएगी। आम नागरिक अपनी रसोई के खाद्य नमूनों को इन प्रयोगशालाओं में लाकर पूरी तरह निशुल्क जाँच करवा सकेंगे। विद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए मिलावट पकड़ो और वैज्ञानिक बनो जैसी अनोखी गतिविधियाँ भी इस दौरान रखी जाएंगी। इसके बाद के दिनों में लोगों को अपने दैनिक भोजन में नमक, चीनी और तेल का इस्तेमाल आज से थोड़ा कम करने का संदेश दिया जाएगा। नागरिकों को प्रेरित किया जाएगा कि वे अपनी रोजाना की थाली में स्थानीय स्तर पर मिलने वाले फल, हरी सब्जियाँ, विभिन्न दालें, दूध, दही और मोटे अनाजों को शामिल करें। इन सभी विषयों पर विद्यालयों में प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा और सोशल मीडिया के विभिन्न माध्यमों से भी एक बड़ा अभियान चलाया जाएगा। इससे समाज के हर वर्ग तक स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का संदेश आसानी से पहुँच सकेगा और लोग जागरूक होंगे।
पैकेटबंद खाद्य पदार्थों के लेबल पढ़ने का विशेष अभियान
इस चौदह दिवसीय विशेष कार्यक्रम के अंतिम चरण में अधिक भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों पर मुख्य रूप से फोकस किया जाएगा। मॉल, बस अड्डों, रेलवे स्टेशनों तथा धार्मिक और पर्यटन स्थलों जैसे अधिक आवाजाही वाले इलाकों में लोगों को जागरूक किया जाएगा। नागरिकों को डिब्बाबंद और पैकेटबंद खाने-पीने की वस्तुएं खरीदने से पहले उनके लेबल को ध्यान से पढ़ने की आदत डालने के लिए प्रेरित किया जाएगा। लोगों को भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण का लाइसेंस नंबर, निर्माण तिथि, पैकिंग की तारीख और एक्सपायरी तिथि जाँचने का तरीका सिखाया जाएगा। इसके साथ ही खाद्य पदार्थों पर दी जाने वाली पोषण संबंधी जानकारी और शाकाहारी तथा मांसाहारी प्रतीकों की पहचान के बारे में भी विस्तार से समझाया जाएगा। लोगों की जागरूकता को परखने के लिए इस दौरान तीस सेकंड का एक विशेष लेबल चैलेंज भी रखा जाएगा ताकि वे तेजी से जानकारी पढ़ना सीख सकें। यह पूरा चौदह दिवसीय आयोजन राज्य के नागरिकों के खान-पान के तौर-तरीकों को सुधारने और उन्हें सुरक्षित भोजन के प्रति सचेत करने में मील का पत्थर साबित होगा।