अल्मोड़ा जिले में हृदय रोग विशेषज्ञों का गंभीर अकाल
उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्र अल्मोड़ा में चिकित्सा व्यवस्थाओं को लेकर एक अत्यंत गंभीर स्थिति सामने आई है। इस पर्वतीय जिले के किसी भी सरकारी अथवा बड़े चिकित्सा संस्थान में एक भी अधिकृत हृदय रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं है। इस बात की पुष्टि हाल ही में सामने आई रिपोर्ट से हुई है जो स्थानीय स्वास्थ्य ढांचे की पोल खोलती है। पहाड़ों की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बीच रहने वाले आम नागरिकों के लिए यह स्थिति किसी बड़े संकट से कम नहीं है। दिल की बीमारी से पीड़ित मरीजों को समय पर विशेषज्ञ डॉक्टर की सलाह नहीं मिल पाती है। स्थानीय अस्पतालों में सामान्य चिकित्सक ही मरीजों का प्राथमिक उपचार करने का प्रयास करते हैं। जब किसी मरीज की हालत अचानक गंभीर हो जाती है तो डॉक्टरों के पास उसे हायर सेंटर रेफर करने के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं बचता है। अल्मोड़ा जैसे दूरदराज के पर्वतीय इलाकों में आपातकालीन स्थिति के दौरान दिल के मरीजों को बचाना एक बड़ी चुनौती बन गया है। इस समस्या के कारण मरीजों के परिजनों को हमेशा अनहोनी का डर सताता रहता है और उन्हें भारी मानसिक तनाव का सामना करना पड़ता है। जिला मुख्यालय से लेकर ग्रामीण अंचलों तक स्वास्थ्य सुविधाओं की इस बड़ी कमी ने पूरे चिकित्सा तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पहाड़ के मरीजों की जान भगवान भरोसे चलने वाली व्यवस्था
अल्मोड़ा जनपद के अंतर्गत आने वाले दूरस्थ गाँवों और कस्बों से आने वाले दिल के मरीजों के लिए हालात बेहद दयनीय बने हुए हैं। जब कभी किसी व्यक्ति को सीने में तेज दर्द या दिल का दौरा पड़ता है तो उसे तुरंत अस्पताल लाया जाता है। लेकिन वहाँ विशेषज्ञ चिकित्सक न मिलने के कारण परिजनों की घबराहट और अधिक बढ़ जाती है। ऐसी आपात स्थिति में मरीजों की जान पूरी तरह से भगवान के भरोसे ही रह जाती है क्योंकि नजदीकी स्तर पर कोई कार्डियोलॉजिस्ट उपलब्ध नहीं होता है। जिला अस्पताल या अन्य स्वास्थ्य केंद्रों में तैनात चिकित्सा कर्मियों के पास आधुनिक हृदय उपकरणों और विशेषज्ञता की भारी कमी देखने को मिलती है। कई बार मरीजों को हल्द्वानी या देहरादून जैसे बड़े शहरों के लिए रेफर किया जाता है। पहाड़ी रास्तों की लंबी दूरी और यातायात के साधनों की समस्याओं के कारण कई मरीज रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं। समय पर उचित चिकित्सा सहायता न मिलने के कारण कई हंसते-खेते परिवार उजड़ चुके हैं। स्थानीय लोग लंबे समय से इस दिशा में ठोस कदम उठाए जाने की मांग कर रहे हैं ताकि उनके इलाकों में भी विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति हो सके। लेकिन अभी तक इस गंभीर समस्या का कोई भी स्थायी और संतोषजनक समाधान धरातल पर नजर नहीं आया है जिससे जनता में गहरा रोष व्याप्त है।
पर्वतीय स्वास्थ्य सेवाओं की पृष्ठभूमि और भविष्य की चुनौतियाँ
उत्तराखंड राज्य के पहाड़ी जिलों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी कोई नई बात नहीं है बल्कि यह एक पुरानी और गंभीर समस्या है। स्वतंत्रता के इतने वर्षों बाद भी पर्वतीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं का पूरी तरह से विकास नहीं हो पाया है। बड़े शहरों की तरफ डॉक्टरों का आकर्षण और पहाड़ी इलाकों में बुनियादी सुविधाओं की कमी इसके प्रमुख कारणों में शामिल हैं। सरकारें लगातार स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को सुधारने के दावे करती हैं लेकिन धरातल पर स्थिति जस की तस बनी हुई है। अल्मोड़ा जैसे क्षेत्रों में दिल के मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए कार्डियोलॉजिस्ट की तैनाती अति आवश्यक हो चुकी है। यदि समय रहते सरकार और स्वास्थ्य विभाग ने इस ओर ध्यान नहीं दिया तो आने वाले दिनों में यह संकट और अधिक विकराल रूप धारण कर सकता है। मरीजों के जीवन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पर्वतीय जिलों में विशेष प्रोत्साहन भत्ते देकर डॉक्टरों को रोकना होगा। आधुनिक चिकित्सा उपकरणों से लैस एम्बुलेंस सेवा और टेलीमेडिसिन जैसी सुविधाओं का विस्तार करना भी बेहद जरूरी हो गया है ताकि हर नागरिक को समय पर इलाज मिल सके। आम जनता की यह बुनियादी मांग है कि उनके स्वास्थ्य अधिकारों को प्राथमिकता दी जाए और पर्वतीय अंचलों में भी मैदानी इलाकों की तरह उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं।