लखनऊ के निजी अस्पताल में हुई घटना
लखनऊ जिले के सुशांत गोल्फ सिटी क्षेत्र स्थित एक चिकित्सा संस्थान में उपचार के दौरान पच्चीस वर्ष की एक विवाहिता की जान चली गई। मृतका की पहचान मनीषा के रूप में हुई है, जिन्हें स्वास्थ्य संबंधी विभिन्न परेशानियों के चलते चिकित्सा केंद्र में दाखिल कराया गया था। मिली जानकारी के अनुसार गोसाईगंज की रहने वाली इस महिला का विवाह बाराबंकी के किस्तीपुर निवासी नरेंद्र कुमार से हुआ था और उनके परिवार में कुल तीन बच्चे भी हैं। पीड़िता को स्वास्थ्य में खराबी के कारण छह अक्टूबर को इस निजी चिकित्सालय में भर्ती कराया गया था। परिजनों का यह भी कहना है कि चिकित्सा सुविधा देने के नाम पर अस्पताल प्रबंधन द्वारा एक लाख अस्सी हजार रुपये की मांग की गई थी। इलाज की इस पूरी प्रक्रिया के दौरान सोमवार दोपहर बारह बजे के समय मनीषा की मृत्यु हो गई।
परिजनों का गंभीर आरोप और पुलिस कार्रवाई
सोमवार के दिन जैसे ही महिला की मौत का दुखद समाचार परिजनों तक पहुंचा, उनका गुस्सा फूट पड़ा और वे तुरंत अस्पताल परिसर में एकत्रित होकर विरोध प्रदर्शन करने लगे। परिजनों ने सीधे तौर पर संबंधित चिकित्सकों पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है और इस संबंध में पुलिस अधिकारियों के पास अपनी शिकायत दर्ज कराई है। स्थिति की गंभीरता और विवाद के लगातार बढ़ने की आशंका को देखते हुए स्थानीय पुलिस बल ने शव को तुरंत एचसीएल चौकी पर स्थानांतरित कर दिया। दुखी परिजनों ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि जब तक इस मामले में उचित कानूनी कार्रवाई नहीं की जाती, तब तक वे पंचायतनामा दस्तावेज पर अपने हस्ताक्षर नहीं करेंगे। पुलिस प्रशासन ने मामले की संवेदनशीलता को समझते हुए शिकायत दर्ज कर ली है और आगे की विधिक प्रक्रिया के तहत शव को मोर्चरी में सुरक्षित रखवा दिया है।
बीमारी के लक्षण और आगे की प्रक्रिया
इस दुखद प्रकरण से पहले मृतका को स्वास्थ्य से जुड़ी कई प्रकार की दिक्कतें परेशान कर रही थीं जिन्हें दूर करने के लिए उन्हें अस्पताल लाया गया था। मरीज को मुख्य रूप से खांसी की शिकायत थी, तेज बुखार से शरीर तप रहा था तथा सांस लेने में भी भारी कठिनाई महसूस हो रही थी। इन्हीं गंभीर लक्षणों को ध्यान में रखते हुए परिजनों ने छह अक्टूबर को उन्हें धन्वंतरि प्रीति चैरिटेबल ट्रस्ट अस्पताल में दाखिल करवाया था ताकि सही समय पर बेहतर उपचार मिल सके। दुर्भाग्यवश तमाम कोशिशों के बावजूद मरीज की स्थिति में सुधार नहीं हुआ और तय समय पर उनकी सांसें थम गईं। परिवार के सदस्यों का गुस्सा इस बात पर भी था कि अस्पताल ने भारी भरकम राशि की मांग की थी लेकिन उचित देखभाल नहीं मिल सकी। अब पुलिस इस पूरे मामले की विभिन्न पहलुओं से जांच कर रही है और परिवार द्वारा दी गई लिखित शिकायत के आधार पर आगे के कदम उठाए जा रहे हैं।