रात के वक्त जिला अस्पताल पहुंचे डीजी हेल्थ
सरकारी चिकित्सालयों की कार्यप्रणाली और वहां आने वाले मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं की जमीनी हकीकत परखने के लिए एक महत्वपूर्ण अभियान चलाया गया। इसी कड़ी के तहत डीजी हेल्थ पवन कुमार ने तय समय से अलग रात के समय उन्नाव जिला अस्पताल का औचक दौरा किया। यह निरीक्षण रात्रि में ठीक 10 बजे शुरू किया गया था जिसमें प्रशासनिक अमला भी उनके साथ मौजूद रहा। इस औचक निरीक्षण के दौरान मुख्य चिकित्सा अधीक्षक और डिप्टी सीएमओ डॉ। जयराम दास समेत अन्य कई प्रमुख स्वास्थ्यकर्मी भी उनके साथ मुस्तैद दिखे। इस पूरी प्रक्रिया का मुख्य केंद्र रात्रि के समय अस्पताल की इमरजेंसी सेवाओं का संचालन देखना था। डीजी हेल्थ ने अस्पताल परिसर में पहुंचते ही सबसे पहले सीधे इमरजेंसी वार्ड की तरफ रुख किया। उन्होंने वहां की मौजूदा व्यवस्थाओं का बारीकी से निरीक्षण किया और चिकित्सा कर्मियों से कामकाज के बारे में पूछताछ की। रात के वक्त अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को समय पर इलाज मिल रहा है या नहीं, यह इस दौरे का प्रमुख बिंदु था। इस दौरान अस्पताल के विभिन्न विभागों में चल रहे कार्यों की भी समीक्षा की गई।
इमरजेंसी वार्ड में मरीजों से सीधे की गई बातचीत
अस्पताल के भीतर का जायजा लेने के दौरान डीजी हेल्थ ने सीधे मरीजों और उनके तीमारदारों से संवाद स्थापित किया। उन्होंने वार्ड में भर्ती एक-एक मरीज के पास जाकर उनके स्वास्थ्य लाभ और उपचार के बारे में विस्तृत पूछताछ की। मरीजों ने खुलकर अपनी बात रखी और बताया कि उन्हें संस्थान के भीतर समय पर समुचित उपचार मिल रहा है। इस बातचीत के दौरान यह महत्वपूर्ण बात सामने आई कि सरकारी अस्पताल के भीतर महंगे इंजेक्शन और कई प्रकार की जरूरी दवाएं पूरी तरह निशुल्क उपलब्ध कराई जा रही हैं। निरीक्षण के समय विशेष रूप से एंटी-डी और एंटी-रेबीज जैसे अत्यंत आवश्यक इंजेक्शनों के स्टॉक और उनकी उपलब्धता की भी गहन जांच की गई। अधिकारियों ने यह सुनिश्चित किया कि किसी भी मरीज को आवश्यक दवाओं की कमी के कारण किसी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े। मरीजों ने इस बात पर संतोष व्यक्त किया कि उन्हें अस्पताल के अंदर ही सभी आवश्यक चिकित्सीय सुविधाएं सुलभता से प्राप्त हो रही हैं। किसी भी मरीज ने इलाज के दौरान किसी बड़ी परेशानी या असुविधा की शिकायत नहीं की। इस प्रकार वार्ड की आंतरिक व्यवस्था पूरी तरह सुचारू रूप से चलती हुई पाई गई।
अस्पताल की व्यवस्थाओं और सरकारी निर्देशों का मूल्यांकन
प्रदेश के मुख्यमंत्री और डिप्टी सीएम के स्पष्ट निर्देशों के अनुपालन में यह विशेष निरीक्षण अभियान संचालित किया गया था। इस औचक दौरे का मूल उद्देश्य यह था कि सरकारी अस्पतालों में आने वाले प्रत्येक जरूरतमंद मरीज को समय पर सही उपचार मिल सके। रात के समय इमरजेंसी सेवाओं के संचालन में किसी भी प्रकार की लापरवाही न हो, यह इस पूरी कवायद का मुख्य उद्देश्य था। अधिकारियों से लंबी बातचीत के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं के सुचारू संचालन और चिकित्सीय सुविधाओं के विस्तार पर भी विस्तार से चर्चा की गई। डीजी हेल्थ ने अस्पताल के सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि मरीजों की सुविधाओं में किसी भी स्तर पर कोताही नहीं बरती जानी चाहिए। इस प्रकार के रात्रि निरीक्षणों से चिकित्सीय कर्मचारियों में भी अपनी जिम्मेदारियों को लेकर एक नई सक्रियता और सतर्कता देखने को मिलती है। उन्नाव जिला अस्पताल में हुई इस जांच से यह स्पष्ट हो गया कि सरकारी स्तर पर मरीजों को राहत देने के लिए जो योजनाएं चलाई जा रही हैं, उनका लाभ धरातल पर पहुंच रहा है। भविष्य में भी स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को बनाए रखने के लिए इस तरह के औचक निरीक्षण जारी रहने की संभावना है।