बक्सर में स्वास्थ्य सेवाएं ठप
बक्सर जिले के तमाम सरकारी अस्पतालों में इस समय चिकित्सा व्यवस्था पूरी तरह से लड़खड़ा गई है। बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ के आह्वान पर स्थानीय इकाई के सभी डॉक्टर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। यह आंदोलन 24 सितंबर से विधिवत रूप से आरंभ किया गया था। इस हड़ताल की वजह से जिले के सभी प्रखंडों में स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की ओपीडी सेवाएं पूरी तरह से बंद पड़ी हुई हैं। इन स्वास्थ्य केंद्रों पर बाह्य रोगी विभाग में आने वाले सामान्य मरीजों को देखने वाला कोई चिकित्सक उपलब्ध नहीं है। वर्तमान समय में मौसम बदलने के कारण जिले भर में वायरल बीमारियों का प्रकोप तेजी से फैल रहा है। आम लोग सर्दी, खांसी और बुखार जैसी समस्याओं से बुरी तरह जूझ रहे हैं। ऐसे हालात के बीच डॉक्टरों के काम पर नहीं आने से मरीजों की तकलीफें कई गुना बढ़ गई हैं। सदर अस्पताल से लेकर ग्रामीण इलाकों के स्वास्थ्य केंद्रों तक सन्नाटा पसरा हुआ है।
सदर और अनुमंडलीय अस्पताल में असर
हड़ताल के पिछले पांच दिनों के दौरान बक्सर सदर अस्पताल में ओपीडी सेवा पूरी तरह से बाधित रही है। इस अस्पताल में सामान्य दिनों में प्रतिदिन छह सौ से साढ़े सात सौ मरीजों का पंजीकरण किया जाता था। बीते पांच दिनों से ओपीडी बंद रहने के कारण अकेले सदर अस्पताल में लगभग पैंतीस हजार मरीज इलाज से वंचित रह गए हैं। वहीं दूसरी तरफ डुमरांव अनुमंडलीय अस्पताल का भी हाल कमोबेश ऐसा ही बना हुआ है। इस अस्पताल में हर दिन तीन सौ से साढ़े तीन सौ लोग इलाज के लिए पहुंचते हैं। यहां भी पिछले पांच दिनों से ओपीडी का ताला नहीं खुला है जिसके चलते लगभग पंद्रह सौ मरीजों को चिकित्सीय परामर्श नहीं मिल सका है। हालात यह हो गए हैं कि इन जरूरतमंदों को सरकारी स्तर पर एक अदद गोली तक नसीब नहीं हो पाई है। जिले के कुल ग्यारह प्रखंडों में चिकित्सा का पूरा ढांचा बुरी तरह से प्रभावित हो चुका है। हालांकि तमाम दबाव और कठिनाइयों के बीच अस्पतालों की आपातकालीन सेवाएं किसी तरह से चालू रखने का प्रयास किया जा रहा है।
मरीजों की परेशानी और निजी क्लीनिक
सरकारी अस्पतालों में ओपीडी सेवाएं बंद होने से गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों पर सबसे भारी मार पड़ी है। इस तबके के लोगों के पास महंगे निजी अस्पतालों में इलाज कराने के लिए पैसे नहीं होते हैं और वे पूरी तरह सरकारी चिकित्सा पर आश्रित रहते हैं। अब उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि वे अपनी रोजी-रोटी के लिए पैसे बचाएं या फिर बीमारियों के इलाज में खर्च करें। चौगाईं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भी ओपीडी पूरी तरह से ठप है और केवल आपातकालीन सेवा ही चल रही है। अस्पताल प्रशासन के निर्देशों के तहत वहां आपातकालीन ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर चौबीस घंटे अपनी सेवाएं दे रहे हैं। हड़ताल के कारण चौगाईं केंद्र में केवल एक ही डॉक्टर लगातार चौबीस घंटे मुस्तैद रहकर मरीजों को संभाल रहा है। मजबूरी में आम लोग छोटी और बड़ी बीमारियों के इलाज के लिए निजी अस्पतालों तथा क्लीनिकों का रुख कर रहे हैं। हालांकि मरीजों की भारी भीड़ और अनगिनत बीमारियों के सामने ये निजी क्लीनिक भी नाकाफी साबित हो रहे हैं जिससे आम जनता की मुश्किलें और अधिक बढ़ गई हैं।