राजधानी लखनऊ स्थित चिकित्सा जगत के बड़े संस्थान किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) में बिजली गुल होने की एक गंभीर घटना सामने आई है, जिसने अस्पताल की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अचानक बिजली आपूर्ति बाधित हो जाने के कारण अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। स्थिति इतनी विकट हो गई कि मरीजों के नए पंजीकरण काउंटर पूरी तरह से बंद हो गए और लंबी कतारों में खड़े लोग अपने पर्चे तक नहीं बनवा सके। इसके अलावा पैथोलॉजी और रेडियोलॉजिकल जांचें भी पूरी तरह से रुक गईं, जिससे गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को बिना इलाज या जांच के ही मायूस होकर वापस लौटना पड़ा। इस अप्रत्याशित बाधा के कारण आपातकालीन सेवाओं को छोड़कर लगभग सभी प्रमुख विभागों में कामकाज ठप पड़ गया, जिससे मरीजों और उनके परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने अस्पताल प्रशासन के खिलाफ नाराजगी व्यक्त की।
इस प्रकार की तकनीकी और बुनियादी अव्यवस्थाएं केवल एक दिन की समस्या नहीं हैं, बल्कि यह देश के बड़े सरकारी चिकित्सा संस्थानों में रख-रखाव और विद्युत बैकअप प्रणालियों की पोल खोलती हैं। केजीएमयू जैसे विशाल चिकित्सा संस्थान में प्रतिदिन हजारों की संख्या में मरीज उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों के अलावा पड़ोसी राज्यों से भी अपना इलाज कराने के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में मुख्य बिजली आपूर्ति फेल हो जाना और वैकल्पिक जनरेटर या पावर बैकअप व्यवस्था का समय पर सक्रिय न हो पाना प्रशासनिक लापरवाही की ओर इशारा करता है। अस्पताल परिसरों में निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए आमतौर पर भारी-भरकम बजट और तकनीकी दल तैनात किए जाते हैं, बावजूद इसके इस तरह की तकनीकी खामियां यह दर्शाती हैं कि निगरानी तंत्र और मेंटेनेंस विभागों के बीच तालमेल की भारी कमी है। इस घटना ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या हमारे प्रमुख अस्पताल किसी भी बड़ी आकस्मिक स्थिति से निपटने के लिए वास्तव में तैयार हैं या नहीं।
इस घटना के बाद अब केजीएमयू प्रशासन पर यह नैतिक दबाव बढ़ गया है कि वह भविष्य में ऐसी पुनरावृत्ति को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए और अपने पावर बैकअप सिस्टम को तुरंत दुरुस्त करे। अस्पताल के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा इस मामले की आंतरिक जांच कराए जाने की संभावना है ताकि यह पता लगाया जा सके कि बिजली आपूर्ति अचानक क्यों बाधित हुई और बैकअप जनरेटर ने समय पर काम क्यों नहीं किया। मरीजों और तीमारदारों ने प्रशासन से मांग की है कि बिजली कटने की स्थिति में वैकल्पिक व्यवस्था को तुरंत सुचारू बनाने के लिए कोई स्थायी और स्वचालित तकनीक अपनाई जाए ताकि इस प्रकार मरीजों को घंटों इंतजार न करना पड़े और उनकी जान जोखिम में न आए। आने वाले दिनों में यदि इन व्यवस्थाओं को दुरुस्त नहीं किया गया तो इस तरह के संकट अस्पताल की साख को और अधिक नुकसान पहुंचा सकते हैं, जिससे आम जनता का सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं से भरोसा डगमगा सकता है।