पंजीकरण और दस्तावेजों के बिना चल रही थी जांच लैब आजमगढ़ जिले के भीतर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने नियमों की अनदेखी करने वाले चिकित्सा संस्थानों के खिलाफ अपना शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। इसी अभियान के तहत अधिकारियों ने इंडियन पैथोलॉजी नामक प्रतिष्ठान पर अचानक छापा मारा और वहां की व्यवस्थाओं की गहनता से जांच की। जांच के दौरान यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि इस पैथोलॉजी लैब के संचालन के लिए कोई भी वैध पंजीकरण या फिर अनुमति पत्र उपलब्ध नहीं था। इसके साथ ही, संस्थान के पास बायोमेडिकल वेस्ट निस्तारण, प्रशिक्षित तकनीशियनों की उपलब्धता और अन्य अनिवार्य कानूनी दस्तावेज भी पूरी तरह से नदारद पाए गए। स्वास्थ्य विभाग के नियमों के अनुसार किसी भी मेडिकल टेस्टिंग सेंटर को चलाने के लिए मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय से अप्रूवल लेना अनिवार्य होता है, लेकिन यहां इन सभी मानकों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही थीं। मरीजों की सेहत के साथ हो रहे इस खिलवाड़ को देखते हुए प्रशासनिक अधिकारियों ने तत्काल प्रभाव से कड़ा कदम उठाते हुए इस पैथोलॉजी को सील करने की औपचारिक कार्रवाई पूरी की और मौके पर मौजूद सभी जरूरी उपकरणों तथा दस्तावेजों को अपने कब्जे में ले लिया ताकि आगे की कानूनी प्रक्रिया को सुचारू रूप से आगे बढ़ाया जा सके।
अवैध पैथोलॉजी सेंटरों के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग का कड़ा रुख उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में झोलाछाप डॉक्टरों और बिना अनुमति के संचालित होने वाली पैथोलॉजी लैबों के खिलाफ इन दिनों व्यापक स्तर पर अभियान चलाया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग के पास लगातार यह शिकायतें पहुंच रही थीं कि कई स्थानों पर अयोग्य व्यक्तियों द्वारा बिना किसी मानक के खून और अन्य सैंपलों की जांच की जा रही है, जिससे गलत रिपोर्ट आने का खतरा हमेशा बना रहता है। इस तरह की फर्जी रिपोर्टों के आधार पर मरीजों का गलत इलाज शुरू हो जाता है, जो कई बार उनकी जान पर भारी पड़ जाता है। इसी पृष्ठभूमि में आजमगढ़ प्रशासन ने भी सक्रियता दिखाते हुए जिले भर में संचालित हो रहे ऐसे संदेहास्पद चिकित्सा संस्थानों की फेहरिस्त तैयार की है। नियमों के मुताबिक प्रत्येक पैथोलॉजी सेंटर पर पैथोलॉजिस्ट की डिग्री होना और सरकार द्वारा तय किए गए मानकों का पालन करना अनिवार्य है। जब कोई केंद्र इन बुनियादी शर्तों को पूरा नहीं करता है, तो स्वास्थ्य विभाग को मजबूरन तालाबंदी जैसी सख्त कार्रवाई करनी पड़ती है। इस प्रकार के छापों से न केवल अवैध कारोबार करने वालों में हड़कंप मचता है, बल्कि आम जनता को भी यह संदेश मिलता है कि वे अपने स्वास्थ्य की जांच केवल अधिकृत और भरोसेमंद संस्थानों से ही करवाएं ताकि किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी या गलत निदान से बचा जा सके।
आगे की कानूनी कार्रवाई और संचालकों पर गिरेगी गाज इंडियन पैथोलॉजी को सील किए जाने के बाद अब स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों ने इसके मुख्य संचालकों और मालिकों के खिलाफ सख्त कानूनी शिकंजा कसने की पूरी तैयारी कर ली है। विभाग की ओर से इस मामले में संबंधित थाने में एफआईआर दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है ताकि गैरकानूनी तरीके से चिकित्सा सेवाएं देने वालों के खिलाफ एक कड़ा उदाहरण पेश किया जा सके। अधिकारियों का कहना है कि बिना लाइसेंस के लैब चलाना गंभीर अपराध है और इसमें लिप्त किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। इसके अलावा, इस पैथोलॉजी से पहले जिन मरीजों की जांच रिपोर्ट जारी की गई थीं, उनकी भी समीक्षा करने पर विचार किया जा रहा है ताकि यह पता लगाया जा सके कि जनता को किस स्तर का नुकसान पहुंचाया गया है। स्वास्थ्य विभाग के इस सख्त रुख से जिले के अन्य अवैध सेंटर चलाने वालों में भी भारी दहशत का माहौल बन गया है और कई लोगों ने खुद ही अपनी दुकानें बंद कर दी हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में भी इस प्रकार के औचक निरीक्षण लगातार जारी रहेंगे और नियमों को ताक पर रखकर जनता की जिंदगी से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ निरंतर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी ताकि स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को पूरी तरह से सुरक्षित रखा जा सके।