झांसी जिला अस्पताल में चालू हुई लिफ्ट
झांसी स्थित जिला अस्पताल में पिछले एक लंबे समय से खराब पड़ी लिफ्ट को आखिरकार सोमवार को सुचारू रूप से चालू कर दिया गया है। अस्पताल परिसर के मुख्य चिकित्सा भवन में यह लिफ्ट पिछले एक साल से तकनीकी खराबी के कारण पूरी तरह से बंद पड़ी थी। इस लिफ्ट के बंद होने के कारण मरीजों, बुजुर्गों और गंभीर रूप से बीमार लोगों को अस्पताल की ऊपरी मंजिलों पर जाने के लिए भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। अस्पताल प्रशासन द्वारा की गई नई व्यवस्था के बाद अब इस लिफ्ट को ठीक कराकर आम जनता के लिए खोल दिया गया है। लिफ्ट के चालू होने की सूचना मिलते ही अस्पताल आने वाले लोगों ने राहत की सांस ली है क्योंकि अब उन्हें सीढ़ियों का इस्तेमाल करने की मजबूरी से छुटकारा मिल गया है। मरीजों को एक मंजिल से दूसरी मंजिल पर ले जाने के लिए स्ट्रेचर और व्हीलचेयर का इस्तेमाल करने वाले कर्मचारियों को भी अब काफी आसानी होगी।
एक साल तक लिफ्ट बंद रहने से बढ़ी परेशानी
अस्पताल के भीतर मरीजों की आवाजाही को सुगम बनाने के लिए लगाई गई यह लिफ्ट पिछले बारह महीनों से अधिक समय से ठप पड़ी हुई थी। इस लंबी अवधि के दौरान अस्पताल के जिम्मेदार अधिकारियों और तकनीकी टीम के बीच कई बार चर्चा हुई लेकिन मशीनरी ठीक नहीं हो सकी थी। लिफ्ट के ठप होने के कारण मरीजों को डॉक्टरों के पास पहुंचने या जांच कराने के लिए सीढ़ियों का ही सहारा लेना पड़ता था जो कि गंभीर रोगियों के लिए बेहद कष्टदायक साबित होता था। तीमारदारों को अपने मरीजों को गोद में या स्ट्रेचर पर लिटाकर सीढ़ियों के जरिए ऊपर ले जाना पड़ता था जिससे दुर्घटनाओं का खतरा भी हमेशा बना रहता था। स्थानीय लोगों और मरीजों के परिजनों ने कई बार इस समस्या को लेकर अपनी नाराजगी भी जाहिर की थी। अब इस तकनीकी बाधा को पूरी तरह से दूर कर लिया गया है और मरम्मत का कार्य पूरा होने के बाद लिफ्ट को सुरक्षित मानकर इसे नियमित संचालन के लिए हरी झंडी दिखा दी गई है।
मरीजों और तीमारदारों को मिली बड़ी राहत
सरकारी अस्पतालों में बुनियादी सुविधाओं का सुचारू रूप से चलना आम जनता के स्वास्थ्य लाभ के लिए बेहद आवश्यक माना जाता है। झांसी के जिला अस्पताल की इस लिफ्ट के फिर से शुरू होने से रोजाना आने वाले हजारों मरीजों को इसका सीधा लाभ मिलना शुरू हो गया है। चिकित्सा संस्थानों में लिफ्ट और रैंप जैसी सुविधाएं दिव्यांगों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों के लिए जीवन रेखा की तरह होती हैं जिनके बिना अस्पताल का चक्कर लगाना किसी चुनौती से कम नहीं होता है। स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के महत्वपूर्ण उपकरणों का नियमित रखरखाव किया जाना चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी लंबी खराबी दोबारा न देखने को मिले। अस्पताल प्रशासन ने भी यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया है कि आने वाले दिनों में किसी भी प्रकार की तकनीकी लापरवाही न बरती जाए। इस घटनाक्रम के बाद अब अस्पताल प्रबंधन और स्थानीय नागरिकों के बीच संतोष का माहौल है क्योंकि एक साल पुरानी इस समस्या का स्थायी समाधान मिल गया है।