आयुष्मान आरोग्य मंदिर पर लगा ताला
बाराबंकी जिले के निंदुरा ब्लॉक अंतर्गत आने वाली उधापुर ग्राम पंचायत के गोसाईनपुरवा गांव में स्थित आयुष्मान आरोग्य मंदिर लंबे समय से बंद पड़ा है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा संचालित यह चिकित्सा केंद्र बीते कई महीनों से ग्रामीणों के लिए अनुपलब्ध है। स्वास्थ्य सेवाओं की यह कमी स्थानीय निवासियों के लिए बड़ी मुसीबत बन गई है, क्योंकि उन्हें सामान्य बीमारियों के उपचार हेतु भी भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। जब भी गांव के लोग इस केंद्र पर अपनी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का समाधान पाने के लिए पहुंचते हैं, तो उन्हें केवल मुख्य द्वार पर लगा ताला ही देखने को मिलता है। इस केंद्र के बंद होने के कारण ग्रामीणों का पूरा स्वास्थ्य तंत्र अव्यवस्थित हो गया है, जिसके कारण स्थानीय निवासियों में काफी रोष और असंतोष व्याप्त है। स्वास्थ्य केंद्र के संचालन न होने से रोजमर्रा की बीमारियों से जूझ रहे लोगों को उचित देखभाल नहीं मिल पा रही है, जिससे स्थिति गंभीर होती जा रही है।
ग्रामीणों की बढ़ती स्वास्थ्य समस्याएँ
अस्पताल के लगातार बंद रहने के कारण गोसाईनपुरवा के निवासियों को चिकित्सा सहायता के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है। ग्रामीण रवि कुमार का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों की अनुपस्थिति और केंद्र के संचालन में लापरवाही के चलते पूरी जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस स्वास्थ्य केंद्र के बंद होने से मरीजों को मजबूरन छोटे डॉक्टरों के पास जाना पड़ रहा है, या फिर इलाज के लिए उन्हें कई किलोमीटर दूर जाने के लिए विवश होना पड़ता है, जहां इलाज की प्रक्रिया काफी महंगी होती है। स्थानीय लोगों और मरीजों ने बार-बार केंद्र के चक्कर लगाए हैं, लेकिन हर बार उन्हें मायूसी हाथ लगी है क्योंकि अस्पताल का ताला नहीं खुला। स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति इस तरह की उदासीनता के कारण गरीब परिवारों पर आर्थिक बोझ भी बढ़ गया है। मरीजों को अपनी छोटी-मोटी बीमारियों के लिए भी लंबी दूरी तय करने के बाद महंगी चिकित्सा सेवाएँ लेने की मजबूरी का सामना करना पड़ रहा है, जो सीधे तौर पर स्वास्थ्य सेवाओं की विफलता को दर्शाता है।
प्रशासनिक कार्रवाई और भविष्य की योजना
इस मामले पर संज्ञान लेते हुए घुंघटेर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) के अधीक्षक आर पी वर्मा ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि इस पूरी समस्या की गहराई से जांच की जाएगी ताकि वस्तुस्थिति का पता चल सके। अस्पताल के लंबे समय से बंद रहने के कारणों को ढूंढने के लिए विभागीय स्तर पर पड़ताल शुरू की जाएगी। अधीक्षक आर पी वर्मा के अनुसार, इस पूरे मामले में जो भी जिम्मेदार कर्मचारी या अधिकारी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ सख्त प्रशासनिक और विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया अमल में लाई जाएगी। उन्होंने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया है कि लापरवाही करने वाले कर्मियों की जिम्मेदारी तय कर भविष्य में इसे सुधारा जाएगा। यह घटनाक्रम क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं के सुचारू संचालन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रशासनिक कार्रवाई के माध्यम से जनता को जल्द ही बेहतर और नियमित स्वास्थ्य सेवाएं मिलने की उम्मीद है, ताकि उन्हें दोबारा इलाज के लिए मीलों दूर भटकने की स्थिति का सामना न करना पड़े।