मऊ में स्ट्रोक की समस्या और प्रमुख लक्षण
मऊ जिले के केसरी राज हॉस्पिटल के चिकित्सक डॉक्टर सुमंत कुमार गुप्ता ने गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के बारे में महत्वपूर्ण जानकारियां साझा की हैं। उन्होंने स्थानीय मीडिया बातचीत के दौरान बताया कि मौजूदा समय में लोगों के बीच स्ट्रोक की बीमारी तेजी से पैर पसार रही है और इसकी चपेट में आकर कई लोग अपनी जान गंवा रहे हैं। दिमाग के अंदर रक्त का संचार कम हो जाने की स्थिति में यह घातक समस्या उत्पन्न हो सकती है। इसके अलावा मस्तिष्क के किसी हिस्से में खून का रिसाव होने यानी ब्रेन हेमरेज और नसों में सूजन आने की वजह से भी मरीजों को इस गंभीर बीमारी का सामना करना पड़ता है। स्ट्रोक की शुरुआत होने पर पीड़ित व्यक्ति के चेहरे और शरीर के अंगों में कई प्रकार के शारीरिक बदलाव और असामान्य लक्षण स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगते हैं। शुरुआत में रोगी के चेहरे का आकार एक तरफ से टेढ़ा होने लगता है और मुंह से लगातार लार टपकने जैसी समस्याएं सामने आती हैं। इसके साथ ही आंखों की बनावट में भी विकृति नजर आने लगती है तथा आंखें एक निश्चित दिशा की तरफ झुकने लगती हैं। पीड़ित के हाथों और पैरों में लगातार झनझनाहट महसूस होने लगती है जिससे धीरे-धीरे उन अंगों की कार्यक्षमता पूरी तरह प्रभावित हो जाती है।
गोल्डन आवर का महत्व और जरूरी सावधानियां
मरीज के शरीर के अंग काम करना बंद कर देते हैं और अंततः वह अपने शरीर पर से अपना नियंत्रण पूरी तरह खो बैठता है। यदि किसी भी व्यक्ति के शरीर में इस प्रकार के चेतावनी संकेत दिखाई दें तो बिना किसी विलंब के किसी विशेषज्ञ डॉक्टर से संपर्क करके तुरंत इलाज शुरू करवा देना चाहिए। यदि इन शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर दिया जाए तो मरीज की शारीरिक स्थिति अत्यधिक नाजुक हो सकती है और उसकी जान भी जा सकती है। चिकित्सक के अनुसार किसी भी स्ट्रोक पीड़ित के मस्तिष्क को सुरक्षित रखने के लिए शुरुआती तीन से चार घंटे का समय बेहद कीमती होता है। चिकित्सा विज्ञान की भाषा में इस विशेष समयावधि को गोल्डन आवर की संज्ञा दी जाती है। इस महत्वपूर्ण समय के भीतर यदि रोगी को अस्पताल पहुंचाकर सही चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करा दी जाए तो भविष्य में होने वाले गंभीर दुष्प्रभावों के खतरे को काफी हद तक टाला जा सकता है और मरीज तेजी से स्वस्थ हो सकता है। स्ट्रोक के प्रकोप के दौरान कुछ स्वास्थ्य संबंधी बातों का विशेष रूप से ध्यान रखना बहुत आवश्यक होता है। शरीर में अत्यधिक मात्रा में मधुमेह होना या रक्तचाप का स्तर लगातार बढ़ना रक्त संचार व्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है। इसलिए इन स्वास्थ्य कारकों को हमेशा अपने नियंत्रण में रखना बहुत जरूरी माना गया है।
चालीस वर्ष से अधिक उम्र के लोगों के लिए विशेष सलाह
स्ट्रोक जैसी जानलेवा बीमारी के जोखिम से सुरक्षित रहने के लिए अपने खानपान की आदतों में बदलाव करना बेहद जरूरी है। विशेषज्ञ चिकित्सक की सलाह के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति को अपने भोजन में नमक की मात्रा कम रखनी चाहिए और वसायुक्त खाद्य पदार्थों के सेवन से बचना चाहिए। इसके साथ ही अपने शरीर को स्वस्थ बनाए रखने के लिए प्रतिदिन नियमित रूप से व्यायाम करना भी बहुत फायदेमंद होता है। चालीस वर्ष की आयु पार कर चुके सभी नागरिकों को समय-समय पर अपने स्वास्थ्य की संपूर्ण जांच करवाते रहना चाहिए। इस नियमित स्वास्थ्य परीक्षण के अंतर्गत मुख्य रूप से मधुमेह की जांच, रक्त शर्करा का स्तर और रक्तचाप की स्थिति की जांच करवाना अनिवार्य माना गया है क्योंकि यही कारक इस गंभीर समस्या को बढ़ावा देते हैं। यदि किसी व्यक्ति में स्ट्रोक के कोई भी लक्षण दिखाई दें तो उसे तुरंत अपने नजदीकी अस्पताल में जाकर डॉक्टर से मिलना चाहिए। अस्पताल पहुंचकर जांच पूरी कराने के बाद फौरन चिकित्सीय उपचार शुरू करवा देना चाहिए और अपनी मर्जी से किसी भी प्रकार की दवा का सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए। निर्धारित गोल्डन आवर के दौरान समय पर अस्पताल पहुंच जाने से डॉक्टर को इलाज करने में आसानी होती है और मरीज के पूरी तरह ठीक होने की संभावना बहुत अधिक बढ़ जाती है। उपचार में किसी भी प्रकार की देरी होने पर रोगी को पैरालिसिस का सामना करना पड़ सकता है और कई बार परिस्थितियां इतनी बिगड़ जाती हैं कि मरीज की मृत्यु भी हो सकती है।