कंकरखेड़ा में तैयार हो रहा नया अस्पताल
मेरठ जिले के भीतर पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों का दायरा लगातार विस्तृत होता जा रहा है। इसी क्रम में अगले वर्ष की शुरुआत तक कंकरखेड़ा में पचास बेड की क्षमता वाला एक नया आयुर्वेद अस्पताल पूरी तरह तैयार हो जाएगा। इस तीन मंजिल के बड़े अस्पताल की मुख्य बिल्डिंग का निर्माण कार्य लगभग पूरा कर लिया गया है। वर्तमान समय में इन सभी मंजिलों पर आधुनिक और उच्च स्तर की फिनिशिंग का कार्य तेजी से चल रहा है। निर्माण कार्य से जुड़ी संस्था ने आधिकारिक तौर पर यह जानकारी साझा की है कि यह अस्पताल अगले वर्ष की निर्धारित अवधि के भीतर पूरी तरह से हैंडओवर कर दिया जाएगा। इस बहुप्रतीक्षित स्वास्थ्य केंद्र के शुरू हो जाने से शहर के आम नागरिकों को मरीजों को अस्पताल के भीतर ही भर्ती करके इलाज कराने की बहुत बड़ी सुविधा मिल जाएगी। यहाँ आने वाले सभी रोगियों को मौसमी बीमारियों से लेकर अन्य गंभीर रोगों के खिलाफ बेहतरीन चिकित्सा सेवाएँ एक ही स्थान पर सुलभ कराई जाएंगी ताकि बीमारियों को उनकी जड़ से पूरी तरह खत्म किया जा सके। आयुष मंत्रालय के अंतर्गत आने वाली सभी प्रमुख चिकित्सा पद्धतियों को इसमें शामिल किया गया है।
एक ही छत के नीचे मिलेंगी कई सुविधाएँ
इस आधुनिक अस्पताल परिसर के भीतर मरीजों के लिए एक ही छत के नीचे कई प्रकार की चिकित्सा पद्धतियों की सुविधा उपलब्ध होगी। यहाँ लोगों को आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा के अलावा यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी जैसी तमाम पद्धतियों से जुड़ी आईपीडी, ओपीडी तथा विशेष थेरेपी की सुविधाएँ मिलेंगी। अस्पताल के भीतर गंभीर और सामान्य मरीजों के इलाज के लिए पंचकर्म और क्षार सूत्र जैसी विशेष चिकित्सा विधियों का व्यापक रूप से उपयोग किया जाएगा। इसके अलावा अस्पताल परिसर में एक सुसज्जित योग एवं ध्यान केंद्र भी बनाया गया है जहाँ वेलनेस और निवारक स्वास्थ्य देखभाल पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। मरीजों के बेहतर और सटीक इलाज के लिए आवश्यक मेडिकल जाँचों का पूरा प्रबंध किया गया है जिनमें एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड और सभी प्रकार की जरूरी प्रयोगशाला जाँचें शामिल रहेंगी। रोगियों को दवा देने के लिए एक विशेष औषधालय की स्थापना की गई है जहाँ परंपरागत औषधियों की पर्याप्त उपलब्धता और उनका सुचारू वितरण सुनिश्चित किया जाएगा। अस्पताल की इन सभी व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से चलाने के लिए प्रशिक्षित आयुष चिकित्सकों, कुशल नर्सिंग स्टाफ और अनुभवी पारा-मेडिकल कर्मियों की पूरी टीम मौके पर मौजूद रहेगी।
प्राकृतिक चिकित्सा और प्रशासनिक दृष्टिकोण
क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी गोपाल सिंह के अनुसार जिले में प्राकृतिक चिकित्सा की तरफ लोगों का रुझान लगातार काफी तेजी से बढ़ा है। आज के समय में देश का आयुष मंत्रालय भी विभिन्न प्रकार की जनहित योजनाएँ चलाकर प्राकृतिक चिकित्सा के प्रति आम नागरिकों को लगातार जागरूक कर रहा है। इसी विजन के तहत आयुष मंत्रालय ने आयुर्वेद, योग, प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्धा और होम्योपैथी को अपने दायरे में पूरी तरह शामिल किया है। अस्पताल के सुचारू संचालन के लिए वहाँ आधुनिक रसोई और आहार संबंधी विशेष सेवाओं के साथ-साथ शुद्ध जल आपूर्ति, निर्बाध बिजली, कचरे के सही प्रबंधन के लिए अपशिष्ट प्रबंधन और आधुनिक शौचालयों का निर्माण किया गया है। निर्माण कार्य पूरा होने के बाद नए साल में शहरवासियों को इन सभी आधुनिक सुविधाओं का सीधा लाभ मिलना शुरू हो जाएगा। यह नया अस्पताल क्षेत्र के स्वास्थ्य ढांचे को और अधिक मजबूत बनाने में एक मील का पत्थर साबित होगा। अधिकारीयों का मानना है कि इस तरह के पारंपरिक और प्राकृतिक चिकित्सा संस्थानों के बढ़ने से समाज का हर वर्ग लाभान्वित होगा और लोगों का स्वास्थ्य स्तर बेहतर होगा।