पिथौरागढ़ अस्पताल में सर्जन की नियुक्ति
उत्तराखंड के पर्वतीय जिले पिथौरागढ़ में स्थित उप जिला चिकित्सालय को आखिरकार एक नया ऑर्थोपेडिक सर्जन मिल गया है। अस्पताल प्रशासन और स्थानीय स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार यह तैनाती पूरे दो साल के लंबे इंतजार के बाद संभव हो सकी है। इस चिकित्सा संस्थान में लंबे समय से हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉक्टर का पद पूरी तरह से खाली चल रहा था। पद रिक्त होने के कारण मरीजों को गंभीर चोट लगने या हड्डी टूटने जैसी समस्याओं के दौरान जिला मुख्यालय से बाहर रेफर किया जाता था। अब इस नए चिकित्सक के आने से अस्पताल की चिकित्सीय क्षमता में सीधा इजाफा हुआ है। पिथौरागढ़ क्षेत्र के निवासियों को अब छोटी-मोटी और सामान्य हड्डियों की समस्याओं के लिए दूरदराज के बड़े शहरों या निजी क्लीनिकों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। अस्पताल की आंतरिक व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने की दिशा में इसे एक बहुत बड़ा सकारात्मक कदम माना जा रहा है। चिकित्सालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने नए सर्जन के कार्यभार संभालने की पुष्टि करते हुए मरीजों को हरसंभव बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने का पूरा भरोसा जताया है। स्थानीय लोगों और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने भी इस पद के भरे जाने पर अपनी गहरी संतुष्टि व्यक्त की है।
दो साल की कमी और मरीजों की समस्याएं
पिथौरागढ़ के उप जिला चिकित्सालय में पिछले चौबीस महीनों से ऑर्थोपेडिक सर्जन की अनुपस्थिति ने आम जनता के सामने कई तरह की गंभीर चुनौतियां खड़ी कर दी थीं। हड्डी के फ्रैक्चर, जोड़ों के दर्द और अन्य दुर्घटना पीड़ितों को प्राथमिक उपचार के बाद अक्सर उच्च चिकित्सा केंद्रों के लिए रेफर कर दिया जाता था। पर्वतीय क्षेत्रों की कठिन भौगोलिक स्थिति और खराब रास्तों के बीच मरीजों को दूसरे शहरों तक ले जाना उनके परिवारों के लिए आर्थिक और मानसिक रूप से काफी कष्टदायक होता था। कई बार आपातकालीन स्थितियों में समय पर विशेषज्ञ डॉक्टर न मिलने के कारण मरीजों की तकलीफें और अधिक बढ़ जाती थीं। इस दो साल की लंबी अवधि के दौरान अस्पताल आने वाले मरीजों और उनके तीमारदारों को कई प्रकार की प्रशासनिक और चिकित्सीय कठिनाइयों का लगातार सामना करना पड़ा था। स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों द्वारा लगातार किए जा रहे प्रयासों के बाद इस महत्वपूर्ण पद पर नियुक्ति प्रक्रिया पूरी हो पाई है। अस्पताल के प्रशासनिक सूत्रों ने बताया कि नए डॉक्टर के आने से ओपीडी यानी बाह्य रोगी विभाग में आने वाले हड्डी रोग से जुड़े मरीजों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। डॉक्टर के उपस्थित रहने से अब आपातकालीन मामलों में भी त्वरित और प्रभावी उपचार देना संभव हो सकेगा जिससे मरीजों को काफी बड़ी राहत मिलेगी।
पर्वतीय स्वास्थ्य सेवाओं पर इसका असर
उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्यों के दूरदराज के इलाकों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती हमेशा से एक बड़ी और संवेदनशील प्रशासनिक चुनौती रही है। पिथौरागढ़ जैसे सीमावर्ती और पर्वतीय जिले में ऑर्थोपेडिक सर्जन जैसे विशेषज्ञ चिकित्सक का होना जनस्वास्थ्य के दृष्टिकोण से बेहद आवश्यक माना जाता है। इस प्रकार की नियुक्तियों से ग्रामीण और पर्वतीय अंचलों में स्वास्थ्य सेवाओं का ढांचा मजबूत होता है और सरकार के बुनियादी स्वास्थ्य लक्ष्यों को पूरा करने में मदद मिलती है। चिकित्सा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि इस प्रकार के विशेषज्ञ पदों के भरने से बड़े अस्पतालों पर पड़ने वाला अतिरिक्त दबाव भी कम हो जाता है। मरीजों को समय पर सही इलाज मिलने से गंभीर संक्रमण या अन्य शारीरिक जटिलताओं का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है। आने वाले समय में स्वास्थ्य विभाग इस क्षेत्र में अन्य रिक्त पदों को भी भरने की योजना पर तेजी से काम कर रहा है ताकि चिकित्सा व्यवस्था को पूरी तरह से सुचारू बनाया जा सके। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि चिकित्सालयों में डॉक्टर नियमित रूप से अपनी सेवाएं दें तो आम जनता का सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर भरोसा और अधिक मजबूत होगा। इस नई नियुक्ति के बाद अब अस्पताल प्रबंधन अन्य प्रकार की चिकित्सीय सुविधाओं को भी और अधिक उन्नत करने की दिशा में लगातार अपने कदम बढ़ा रहा है।