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स्वास्थ्य

गंभीर वित्तीय फर्जीवाड़ा: लखनऊ में सील अस्पताल पुराने पंजीकरण पर उठा रहा था आयुष्मान योजना का लाभ

राजधानी लखनऊ में स्वास्थ्य विभाग की बड़ी लापरवाही और अस्पताल संचालकों की गड़बड़ी का मामला सामने आया है। एक ऐसा चिकित्सा संस्थान जिसे पहले ही सील किया जा चुका था, वह अपने पुराने और निरस्त पंजीकरण के आधार पर सरकारी स्वास्थ्य बीमा योजना का अनुचित लाभ ले रहा था।

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Ankit Yadav
23 सित 2026, 12:17
गंभीर वित्तीय फर्जीवाड़ा: लखनऊ में सील अस्पताल पुराने पंजीकरण पर उठा रहा था आयुष्मान योजना का लाभ

सील अस्पताल का फर्जीवाड़ा और पंजीकरण की धांधली लखनऊ जिले के स्वास्थ्य महकमे में उस समय हड़कंप मच गया जब एक सील किए गए अस्पताल द्वारा आयुष्मान भारत योजना के तहत किए जा रहे फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। नियमों के अनुसार किसी भी मेडिकल संस्थान को मरीजों के इलाज और सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए वैध लाइसेंस और सक्रिय पंजीकरण की आवश्यकता होती है, लेकिन इस मामले में एक ऐसा अस्पताल लिप्त पाया गया जिसे प्रशासनिक कार्रवाई के तहत पहले ही बंद या सील कर दिया गया था। इसके बावजूद संस्थान के संचालकों ने पुराने और अमान्य पंजीकरण दस्तावेजों का गुप्त रूप से इस्तेमाल जारी रखा। इस अवैध साठगांठ के जरिए न केवल नियमों की धज्जियां उड़ाई गईं, बल्कि सरकारी खजाने से मिलने वाले पैसों का भी गलत तरीके से आहरण किया जाता रहा। स्वास्थ्य विभाग की शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि किस प्रकार कागजों में मृत या बंद हो चुके संस्थान सक्रिय योजनाओं का हिस्सा बने रहे और किसी को इसकी भनक तक नहीं लगी।

आयुष्मान भारत योजना और चिकित्सा निगरानी की स्थिति आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना देश के गरीब और जरूरतमंद नागरिकों को उच्च गुणवत्ता वाला स्वास्थ्य उपचार उपलब्ध कराने के लिए शुरू की गई एक महत्वाकांक्षी योजना है, जिसके तहत सूचीबद्ध अस्पतालों में मुफ्त इलाज का प्रावधान है। हालांकि, कई बार कुछ निजी अस्पताल इस योजना के वित्तीय प्रावधानों का दुरुपयोग करने के लिए विभिन्न प्रकार के शॉर्टकट अपनाते हैं। लखनऊ जैसे बड़े महानगरों में निजी चिकित्सालयों की बढ़ती संख्या के कारण जिला प्रशासन और मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय के लिए प्रत्येक संस्थान पर निरंतर नजर रखना एक जटिल चुनौती साबित होता है। इस तरह के मामलों में अक्सर अस्पताल प्रबंधन प्रशासनिक अमले की आंखों में धूल झोंककर अपने पुराने कागजात, नवीनीकरण न कराए गए लाइसेंस या फर्जी दस्तावेजों के सहारे सरकारी पोर्टल पर अपनी सक्रियता बनाए रखते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की अनियमितताएं न केवल ईमानदार अस्पतालों की छवि को धूमिल करती हैं, बल्कि वास्तव में जरूरतमंद मरीजों के अधिकारों पर भी डाका डालती हैं, जिससे पूरी स्वास्थ्य प्रणाली की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।

प्रशासनिक कार्रवाई और आगे की सख्त निगरानी इस ताजा खुलासे के बाद लखनऊ के स्वास्थ्य प्रशासन और आयुष्मान योजना के नोडल अधिकारियों ने अपनी निगरानी व्यवस्था को पूरी तरह से दुरुस्त करने के निर्देश दे दिए हैं। सील किए गए अस्पतालों की सूची का मिलान सीधे डिजिटल पोर्टल से किया जा रहा है ताकि भविष्य में इस तरह की किसी भी अन्य धोखाधड़ी को समय रहते रोका जा सके। प्रशासन अब ऐसे तमाम चिकित्सा संस्थानों के दस्तावेजों की नए सिरे से गहन जांच करवा रहा है जिनके पंजीकरण की स्थिति संदिग्ध पाई गई है या जिन पर पहले किसी प्रकार की अनुशासनात्मक कार्रवाई हो चुकी है। इस प्रकरण में शामिल अस्पताल के संचालकों और उनके सहयोगियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई करने की तैयारी चल रही है, जिसमें वित्तीय रिकवरी और लाइसेंस पूरी तरह रद्द करने जैसे कदम शामिल हो सकते हैं। सरकार और स्वास्थ्य विभाग की यह कोशिश है कि सार्वजनिक धन के इस तरह के दुरुपयोग को पूरी तरह से समाप्त किया जाए ताकि आम जनता का भरोसा सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं पर और अधिक मजबूत हो सके।

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