बारिश के बाद छप्पर पर गिरा विशाल पेड़
उत्तर प्रदेश के अयोध्या जिले के बीकापुर तहसील क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले बनकट ग्राम पंचायत के बेदी का पुरवा गांव में एक गंभीर दुर्घटना सामने आई है। यहाँ देर रात बारिश पूरी तरह रुकने के बाद अचानक एक विशाल महुआ का पेड़ घर के ऊपर बने छप्पर पर आ गिरा। इस भयानक हादसे के समय छप्पर के नीचे पूनम देवी जिनकी उम्र पैंतीस वर्ष है और उनका ग्यारह वर्ष का बेटा अनमोल दोनों बैठे हुए थे। अचानक हुए इस भारी मलबे के गिरने से मां और बेटा दोनों ही बुरी तरह फंस गए और गंभीर रूप से घायल हो गए। पेड़ के गिरने से हुई तेज आवाज को सुनकर आसपास के तमाम ग्रामीण तुरंत दौड़ते हुए घटनास्थल पर पहुंचे। ग्रामीणों ने बिना किसी देरी के आपसी मदद से मलबे और भारी पेड़ की शाखाओं को हटाना शुरू किया। उन्होंने काफी मशक्कत के बाद पूनम देवी और उनके बेटे अनमोल को पेड़ और मलबे के नीचे से सुरक्षित बाहर निकाल लिया। इस अप्रत्याशित घटना के तुरंत बाद घटनास्थल पर बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ जमा हो गई और सभी घायलों की स्थिति को लेकर काफी चिंतित नजर आए। ग्रामीणों की तत्परता से दोनों को समय रहते बाहर निकाल लिया गया वरना स्थिति और भी ज्यादा भयावह हो सकती थी। हादसे के बाद से पूरे इलाके में हड़कंप मचा हुआ है और स्थानीय लोग इस प्रकार की प्राकृतिक आपदाओं से उत्पन्न खतरे को लेकर काफी सहमे हुए दिखाई दे रहे हैं।
अस्पताल में प्राथमिक उपचार और रेफर
घायलों को मलबे से बाहर निकाले जाने के बाद उनकी गंभीर शारीरिक स्थिति को देखते हुए तुरंत एक एंबुलेंस को मौके पर बुलाया गया। एंबुलेंस के आने के बाद परिवार के सदस्यों और ग्रामीणों की सहायता से दोनों घायलों को तुरंत बीकापुर अस्पताल पहुंचाया गया। बीकापुर अस्पताल में मौजूद डॉक्टर संत कुमार मौर्य ने दोनों घायलों का तुरंत परीक्षण किया और उनका प्राथमिक उपचार शुरू किया। डॉक्टर मौर्य ने पूनम देवी और उनके बेटे अनमोल की गंभीर चोटों और खराब हालत को पूरी तरह से परख लिया। प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने यह पाया कि दोनों की स्थिति में सुधार की संभावना के लिए बड़े अस्पताल की आवश्यकता है। डॉक्टरों ने उनकी गंभीर हालत का हवाला देते हुए दोनों घायलों को बेहतर और उन्नत चिकित्सा इलाज के लिए जिला अस्पताल रेफर कर दिया। डॉक्टर के निर्देश मिलते ही परिवार के सभी परिजन दोनों घायलों को लेकर तुरंत जिला अस्पताल के लिए रवाना हो गए। जिला अस्पताल में उनका आगे का इलाज किया जा रहा है ताकि उनकी गंभीर चोटों का सही उपचार हो सके। इस घटना के बाद से अस्पताल में भी परिजनों की चिंता साफ तौर पर देखी जा सकती है और वे दोनों की सलामत वापसी के लिए प्रार्थना कर रहे हैं। चिकित्सा कर्मियों द्वारा घायलों को हरसंभव चिकित्सीय सहायता प्रदान करने की पूरी कोशिश की जा रही है ताकि उनकी जान को और अधिक खतरे से बचाया जा सके।
परिवार में चिंता और ग्रामीणों की मांग
इस अचानक हुए दुखद हादसे के बाद से पीड़ित परिवार के भीतर गहरा चिंता और भय का माहौल बना हुआ है। परिवार के लोगों को समझ नहीं आ रहा है कि इस अचानक आई आफत से वे कैसे निपटेंगे क्योंकि उनका घर भी क्षतिग्रस्त हो गया है। इस बीच इलाके के तमाम स्थानीय ग्रामीणों ने प्रशासन के सामने अपनी कुछ महत्वपूर्ण और जरूरी मांगें रखी हैं। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से स्पष्ट रूप से मांग की है कि इस पीड़ित और गरीब परिवार को तत्काल आर्थिक सहायता प्रदान की जाए। इसके साथ ही ग्रामीणों ने प्रशासन से यह भी आग्रह किया है कि वे इस दुर्घटना स्थल और क्षतिग्रस्त छप्पर तथा घर का तुरंत जायजा लें। घर और छप्पर के पूरी तरह टूट जाने के कारण परिवार के सामने रहने की बड़ी समस्या खड़ी हो गई है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन को प्रभावित परिवार को तुरंत राहत सामग्री और मुआवजा राशि उपलब्ध करानी चाहिए ताकि वे दोबारा अपनी जिंदगी पटरी पर ला सकें। इस प्रकार की प्राकृतिक घटनाओं से निपटने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षात्मक उपायों की मांग भी जोर पकड़ने लगी है। लोग चाहते हैं कि प्रशासन ऐसे पुराने और खतरनाक पेड़ों को चिन्हित कर हटाए ताकि भविष्य में किसी अन्य मासूम की जान खतरे में न पड़े। परिवार और ग्रामीण अब जिला प्रशासन की तरफ से मिलने वाली मदद और राहत का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं ताकि इस संकट की घड़ी से उन्हें कुछ राहत मिल सके।