अस्पतालों में अंग्रेजी पर्चों की समस्या
उत्तर प्रदेश के संभल जिले के सरकारी अस्पतालों में इलाज कराने के लिए पहुंचने वाले मरीजों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। जिला अस्पताल और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर डॉक्टरों द्वारा लिखे जाने वाले पर्चों पर आज भी अंग्रेजी भाषा का ही प्रयोग किया जा रहा है। हालात यह हैं कि ओपीडी में डॉक्टर को दिखाने के बाद मरीजों को यह तक समझ में नहीं आता है कि उनके पर्चे पर क्या लिखा गया है। कई मरीजों ने मीडिया के सामने अपनी व्यथा बताते हुए कहा कि पर्चे की भाषा पूरी तरह अपठित होती है। उन्हें यह बिल्कुल पता नहीं चल पाता है कि डॉक्टर ने कौन सी दवा किस समस्या के लिए लिखी है और कौन सी मेडिकल जांच कराने की सलाह दी है। मरीजों के लिए पर्चे पर अंकित अंग्रेजी के शब्दों को खुद पढ़ना असंभव सा हो जाता है। इस वजह से उन्हें अपनी बीमारी, निर्धारित दवा और जांच के बारे में डॉक्टर से सीधे कोई जानकारी नहीं मिल पाती है। मरीजों को केवल वही बातें पता चल पाती हैं जो दवा काउंटर पर बैठे कर्मचारी उन्हें समझाते हैं। ऐसी स्थिति में मरीजों की पूरी निर्भरता सिर्फ और सिर्फ काउंटर के कर्मचारियों पर ही टिकी रह जाती है। यह समस्या जिले के प्रमुख स्वास्थ्य केंद्रों पर लगातार बनी हुई है और मरीज इस बात से खासे परेशान नजर आ रहे हैं।
दवा काउंटर के कर्मचारियों पर निर्भरता
संभल के जिला अस्पताल और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र यानी सीएचसी में इलाज की स्थिति बहुत अजीब बनी हुई है। सोमवार के दिन जिला अस्पताल में कुल 22 डॉक्टरों ने ओपीडी में बैठकर मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण किया। इस दौरान अस्पताल में कुल 1062 मरीजों की ओपीडी दर्ज की गई और सभी को डॉक्टरों ने देखा। वहीं दूसरी ओर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भी चार डॉक्टरों ने मरीजों की जांच की और पर्चों पर दवाएं लिखकर उपचार शुरू किया। सीएचसी में कुल 360 मरीजों को डॉक्टरों ने देखकर उनका इलाज शुरू किया। इन सभी अस्पतालों में जब मरीजों को पर्चे थमाए गए तो उन पर दवाइयों के नाम अंग्रेजी में ही दर्ज थे। मरीज जब दवा काउंटर पर पहुंचते हैं तब वहां के कर्मचारी उन्हें समझाते हैं कि कौन सी गोली कैसे और कब खानी है। यदि दवा और जांच के नाम हिंदी भाषा में लिखे जाएं तो मरीजों को अपने उपचार की पूरी जानकारी खुद ही मिल जाएगी। मरीजों का साफ तौर पर कहना है कि हिंदी में पर्चे मिलने से पारदर्शिता आएगी और उन्हें कर्मचारियों के भरोसे नहीं बैठना पड़ेगा। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि डॉक्टरों द्वारा पर्चे लिखने की पुरानी अंग्रेजी शैली में अभी तक कोई बदलाव नहीं आया है। मरीज काउंटर पर कर्मचारियों के बताए गए निर्देशों के आधार पर ही दवाइयां खरीदने और खाने के लिए मजबूर हो रहे हैं।
जिम्मेदार अधिकारियों के बयान और निर्देश
राज्य के उप मुख्यमंत्री की ओर से पहले ही यह निर्देश जारी किए गए थे कि अस्पतालों में पर्चे हिंदी भाषा में ही लिखे जाएं। इस आदेश का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि मरीजों को उनकी बीमारी, दी जा रही दवा और जरूरी जांच की जानकारी आसानी से मिल सके। सरकार चाहती है कि इससे चिकित्सा व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़े और डॉक्टर तथा मरीज के बीच का आपसी भरोसा मजबूत हो सके। मगर संभल जिले के अस्पतालों में इन निर्देशों का पालन अभी तक शुरू नहीं हो सका है। जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक यानी सीएमएस डॉ. राजेंद्र सैनी ने इस मामले पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि उप मुख्यमंत्री की तरफ से जो भी निर्देश दिए गए हैं, उनका पूरी कड़ाई से पालन कराया जाएगा। हालांकि उन्होंने यह भी बताया कि अभी तक उनके पास इस संबंध में कोई लिखित आदेश प्राप्त नहीं हुआ है। इसके अलावा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. मनीष अरोड़ा ने भी कहा है कि उच्च स्तर से मिले निर्देशों का शत-प्रतिशत क्रियान्वयन सुनिश्चित कराया जाएगा। स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों के इन बयानों के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पर्चों की भाषा कब तक अंग्रेजी से बदलकर हिंदी में की जाती है।