गंभीर मरीजों के लिए संजीवनी है आधुनिक ईसीएमओ प्रणाली चिकित्सा जगत में क्रिटिकल केयर प्रबंधन के दौरान कई बार ऐसी जटिल स्थितियां सामने आती हैं जहां पारंपरिक वेंटिलेटर और दवाएं नाकाफी साबित होने लगती हैं। ऐसे अत्यंत गंभीर मामलों में जब फेफड़े और हृदय दोनों ही ठीक प्रकार से कार्य करना बंद कर देते हैं, तब एक्स्ट्राकॉर्पोरेल मेंब्रेन ऑक्सीजनेशन तकनीक एक जीवनरक्षक उपाय के रूप में सामने आती है। प्रख्यात चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. नीरज यादव ने इस उन्नत तकनीक के महत्व को रेखांकित करते हुए स्पष्ट किया है कि यह प्रणाली शरीर के बाहर रक्त को ऑक्सीजन युक्त करने का कार्य करती है। जब किसी रोगी के प्राण संकट में होते हैं और उसके आंतरिक अंग गंभीर संक्रमण या आघात के कारण अपनी क्षमता खो देते हैं, तब यह आधुनिक मशीन कृत्रिम रूप से रक्त संचार और श्वसन प्रक्रिया को संभालती है। इससे शरीर के मुख्य अंगों को आवश्यक ऑक्सीजन मिलती रहती है और उन्हें प्राकृतिक रूप से ठीक होने के लिए पर्याप्त समय मिल जाता है। देश के बड़े चिकित्सा संस्थानों और उच्चस्तरीय अस्पतालों में इस तकनीक का उपयोग लगातार बढ़ रहा है, जिससे अनगिनत गंभीर रोगियों को नया जीवनदान मिल रहा है।
क्रिटिकल केयर यूनिट में तकनीक की बढ़ती महत्ता आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं के बुनियादी ढांचे में क्रिटिकल केयर यूनिट यानी आईसीयू का स्थान सर्वोपरि माना जाता है जहां हर सेकंड मरीज की जिंदगी बचाने का संघर्ष चलता है। पिछले कुछ वर्षों के दौरान चिकित्सा अनुसंधान में हुई अभूतपूर्व प्रगति के कारण अनेक ऐसी जीवनरक्षक प्रणालियों का विकास हुआ है जो पहले असंभव सी प्रतीत होती थीं। एक्स्ट्राकॉर्पोरेल मेंब्रेन ऑक्सीजनेशन भी इसी श्रेणी की एक अत्यंत उन्नत और जटिल तकनीक है जिसके संचालन के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित डॉक्टरों, हृदय रोग विशेषज्ञों, पल्मोनोलॉजिस्ट और कुशल पारा मेडिकल स्टाफ की आवश्यकता होती है। सामान्य तौर पर जब किसी मरीज को गंभीर निमोनिया, हृदयघात, दिल की शल्य चिकित्सा के बाद की जटिलताएं या फिर गंभीर श्वसन विफलता का सामना करना पड़ता है, तब यह तकनीक वरदान साबित होती है। इस प्रणाली के जरिए मरीज के रक्त को पंप किया जाता है और उसे एक कृत्रिम फेफड़े के माध्यम से गुजारा जाता है जहां कार्बन डाइऑक्साइड को हटाकर उसमें शुद्ध ऑक्सीजन मिलाई जाती है। इसके पश्चात यह ऑक्सीजन युक्त रक्त पुनः मरीज की रक्त वाहिकाओं में प्रवाहित कर दिया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी के लिए अत्यंत अत्याधुनिक उपकरणों और निरंतर सतर्कता की जरूरत होती है ताकि रोगी की हर गतिविधि और उसके शरीर के सभी मापदंडों पर पैनी नजर रखी जा सके।
भविष्य की स्वास्थ्य सेवाएं और तकनीकी विस्तार चिकित्सा विज्ञान और तकनीक के इस दौर में डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मुख्य उद्देश्य यही है कि देश के अधिक से अधिक मेडिकल संस्थानों और अस्पतालों में इस प्रकार की उन्नत जीवनरक्षक प्रणालियों को सुलभ कराया जा सके। डॉ. नीरज यादव जैसे अनुभवी चिकित्सकों द्वारा समय-समय पर इस प्रकार की तकनीकों के प्रति जागरूकता बढ़ाना इस बात का परिचायक है कि आधुनिक चिकित्सा पद्धति अब परिणामों को बेहतर बनाने की दिशा में निरंतर अग्रसर है। आने वाले समय में स्वास्थ्य क्षेत्र के भीतर ऐसे प्रयासों से न केवल क्रिटिकल केयर की गुणवत्ता में सुधार होगा, बल्कि देश के दूरदराज के क्षेत्रों से आने वाले गंभीर रोगियों को भी महानगरों के बड़े अस्पतालों की तर्ज पर उच्चस्तरीय चिकित्सा सुविधाएं प्राप्त हो सकेंगी। विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे-जैसे चिकित्सा तकनीक अधिक किफायती और व्यापक होगी, वैसे-वैसे गंभीर मामलों में मृत्यु दर को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकेगा। इसके साथ ही चिकित्सकों और तकनीकी विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि इस दिशा में निरंतर प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन किया जाना चाहिए ताकि अधिक से अधिक युवा डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ इस जटिल तकनीक के संचालन में पूरी तरह से पारंगत हो सकें और आपातकालीन स्थितियों में तुरंत निर्णय लेकर मरीजों के प्राणों की रक्षा कर सकें।