फैजुल्लागंज में जलभराव से हुई मौत
लखनऊ के फैजुल्लागंज इलाके में लोहरामऊ के पास स्थित पतंग मैदान के निवासी हजरत अली के परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। हजरत अली की डेढ़ साल की बेटी शिफा पिछले काफी समय से गंभीर बीमारी से जूझ रही थी। उसका नियमित उपचार संजय गांधी पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज यानी एसजीपीजीआई में चल रहा था। बच्ची को कुछ दिनों से लगातार तेज बुखार की शिकायत थी, जिसके चलते उसकी स्थिति दिन-प्रतिदिन बिगड़ती जा रही थी। शनिवार की रात को अचानक शिफा की तबीयत और ज्यादा खराब हो गई और उसे तत्काल अस्पताल ले जाने की जरूरत महसूस हुई। हालांकि, उस समय इलाके के रास्तों पर इतना अधिक पानी भरा हुआ था कि घर से बाहर निकलना नामुमकिन सा हो गया था। स्थानीय जलभराव ने इस परिवार के लिए अस्पताल का रास्ता पूरी तरह बंद कर दिया था, जिससे बच्ची को समय रहते आवश्यक चिकित्सीय मदद नहीं मिल पाई और उसने घर में ही दम तोड़ दिया।
परिजनों का अस्पताल तक पहुँचने का संघर्ष
परिवार के सदस्य मोहम्मद हासिम ने बताया कि शिफा की नाजुक हालत को देखते हुए उसे तुरंत अस्पताल पहुंचाने के लिए हर संभव प्रयास किए गए थे। स्थिति की गंभीरता को समझते हुए उन्होंने एक निजी एम्बुलेंस को भी मौके पर बुलाया था, लेकिन घर के आसपास फैले भारी जलभराव के कारण वाहन का वहां तक पहुंचना संभव नहीं हो सका। पानी के भारी जमाव को देखकर एम्बुलेंस चालक और अन्य निजी वाहनों ने भी उस रास्ते पर आने से साफ इनकार कर दिया। रात के समय अंधेरा होने के कारण जलमग्न रास्तों से निकलना बेहद जोखिम भरा हो गया था। परिजनों ने काफी देर तक मशक्कत की, लेकिन कोई भी वाहन उस जलभराव को पार करने की हिम्मत नहीं जुटा सका। इस असहाय स्थिति में, एम्बुलेंस के इंतजार और रास्ते के अवरुद्ध होने के कारण बच्ची को इलाज नहीं मिल पाया और अंततः उसने दम तोड़ दिया। यह घटना स्थानीय परिवहन और आपातकालीन चिकित्सा सुविधाओं की विफलता को दर्शाती है।
स्थानीय प्रशासन की अनदेखी का आरोप
स्थानीय निवासियों का कहना है कि जलभराव की यह समस्या यहां कोई नई बात नहीं है, बल्कि काफी समय से बनी हुई है। बारिश के पानी की निकासी को लेकर निवासियों ने क्षेत्र के पार्षद से कई बार गुहार लगाई थी और समस्या के समाधान के लिए निवेदन भी किया था। बावजूद इसके, संबंधित जनप्रतिनिधि द्वारा इस मुद्दे पर कोई ठोस सुनवाई नहीं की गई और न ही जल निकासी के लिए कोई प्रभावी कदम उठाए गए। यदि समय रहते पानी की उचित निकासी की व्यवस्था की गई होती, तो शायद शिफा को समय पर अस्पताल पहुंचाया जा सकता था। इस दुखद घटना ने स्थानीय प्रशासन की लापरवाही की पोल खोल दी है और निवासियों में गहरा रोष व्याप्त है। इलाके में जलजमाव की निरंतर समस्या के कारण लोग अब स्वयं को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। बिना किसी प्रशासनिक कार्यवाही के, यह क्षेत्र अब स्वास्थ्य आपातकाल जैसी स्थितियों के लिए बेहद संवेदनशील बना हुआ है।