कानपुर में मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता रैली का आयोजन किया गया
कानपुर में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति समाज में जागरूकता बढ़ाने और डिप्रेशन से पीड़ित व्यक्तियों को सहायता के वास्ते प्रेरित करने के लिए एक विशेष रैली निकाली गई। इस अवसर पर विभिन्न वर्गों के लोगों ने बढ़-चढ़कर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए लोगों को जागरूक किया। इस आयोजन का मूल उद्देश्य यह था कि आम जनता मानसिक विकारों के प्रति अपनी सोच में बदलाव ला सके। कलीम ने इस बात की जानकारी दी कि इस पहल के जरिए समाज के भीतर मानसिक बीमारियों से जुड़े संकोच और भय को पूरी तरह से समाप्त करना हमारा मुख्य लक्ष्य है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में यह भी समझाया कि किसी भी प्रकार की मानसिक बीमारी कोई व्यक्तिगत कमजोरी नहीं होती है। यह एक विशुद्ध चिकित्सीय स्थिति होती है जिसका उचित समय पर डॉक्टर से संपर्क करके सही उपचार कराया जा सकता है। वर्तमान समय में बहुत से लोग अपने मन की बात किसी के साथ साझा नहीं करते हैं क्योंकि उनके भीतर एक प्रकार की झिझक बनी रहती है। इसी झिझक के कारण उनकी यह समस्या आगे चलकर और अधिक गंभीर रूप धारण कर लेती है जिससे उनकी मुश्किलें और ज्यादा बढ़ जाती हैं।
रैली के दौरान तख्तियों और नारों के जरिए दिए गए संदेश
कार्यक्रम में शामिल होने वाले सभी प्रतिभागियों ने अपने हाथों में तख्तियां और बैनर थाम रखे थे जिनके माध्यम से आम नागरिकों तक महत्वपूर्ण संदेश पहुंचाए गए। इन तख्तियों पर मुख्य रूप से यह पंक्तियां लिखी हुई थीं कि डिप्रेशन का इलाज पूरी तरह संभव है और इसके अलावा लोगों को आपस में खुलकर बात करने तथा समय पर मदद लेने के लिए कहा गया। इस प्रकार के आयोजनों से समाज में यह संदेश देने का प्रयास किया गया कि यदि किसी परिचित या परिजन के भीतर लगातार उदास रहने के लक्षण दिखाई दें। इसके अलावा यदि कोई व्यक्ति अत्यधिक अकेलापन महसूस कर रहा हो या उसके दैनिक व्यवहार में किसी प्रकार का अचानक बदलाव नजर आ रहा हो। ऐसी स्थिति में उस व्यक्ति के साथ बिना किसी संकोच के खुलकर बातचीत करनी चाहिए और तुरंत किसी पेशेवर डॉक्टर से परामर्श लेने में बिल्कुल भी देर नहीं करनी चाहिए। इस पूरी मुहिम में समाज के कई जागरूक नागरिकों ने अपनी सहभागिता सुनिश्चित की। इस दौरान स्वास्थ्य कर्मियों और तमाम सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी कंधे से कंधा मिलाकर हिस्सा लिया। इसके अतिरिक्त बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं और स्थानीय निवासियों ने भी इस जनहित के कार्य में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और इस संदेश को दूर-दूर तक फैलाने में अपना पूरा सहयोग प्रदान किया।
गलतफहमियों को दूर करने के लिए ली गई सामूहिक शपथ
रैली के समापन अवसर पर वहां मौजूद सभी लोगों ने मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी तमाम प्रकार की गलतफहमियों को हमेशा के लिए दूर करने का दृढ़ संकल्प लिया। इस सामूहिक शपथ के माध्यम से यह दोहराया गया कि मानसिक समस्याओं को छुपाने के बजाय उनके खिलाफ खुलकर आवाज उठाई जानी चाहिए। जानकारों का ऐसा मानना है कि जब तक समाज से इस विषय पर फैला हुआ डर और संकोच बाहर नहीं निकलेगा तब तक पीड़ित लोगों को सही राहत मिलना कठिन हो जाएगा। कलीम ने इस बात पर भी जोर दिया कि लोगों को यह समझना होगा कि शारीरिक बीमारियों की तरह ही मानसिक स्वास्थ्य भी उतना ही महत्वपूर्ण है। इस तरह के जागरूकता अभियानों के माध्यम से भविष्य में भी लोगों को शिक्षित करने का प्रयास जारी रखने की बात कही गई है। स्थानीय स्तर पर इस प्रकार के आयोजनों के होने से आम जनता के बीच में यह संदेश स्पष्ट रूप से पहुंच रहा है कि डिप्रेशन जैसी स्थिति से घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है। यदि समय रहते पेशेवर चिकित्सा सहायता ले ली जाए तो पीड़ित व्यक्ति पूरी तरह से स्वस्थ जीवन जी सकता है और अपने दैनिक कार्यों को सामान्य रूप से संचालित कर सकता है।