सोशल मीडिया से दूरी और मानसिक दबाव का सच
फिल्मों में अपने अभिनय से पहचानी जाने वाली अभिनेत्री तापसी पन्नू ने हाल ही में मीडिया के साथ बातचीत के दौरान अपने निजी अनुभवों को साझा किया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार उन्होंने वर्चुअल दुनिया से पूरी तरह रिश्ता तोड़ लिया क्योंकि वह अपने वास्तविक स्वभाव के साथ कोई समझौता नहीं करना चाहती थीं। उनके सामने दो ही रास्ते बचे थे जिनमें से एक सोशल मीडिया से पूरी तरह किनारा करना था और दूसरा मानसिक रूप से परेशान होते रहना था। उन्होंने समझदारी दिखाते हुए पहला विकल्प चुना और ऑनलाइन दुनिया से अपनी दूरी बना ली। उन्होंने स्पष्ट किया कि एक कलाकार के रूप में उन्हें यह कदम इसलिए उठाना पड़ा क्योंकि वह अपनी असलियत को छिपाकर कोई झूठी दास्तां नहीं बयां कर सकती थीं। आज के समय में इंटरनेट पर केवल वही रूप दिखाया जाता है जो लोगों को आकर्षित करे और देखने में पूरी तरह से परफेक्ट लगे। इस बनावटीपन की वजह से कलाकारों पर लगातार दबाव बना रहता है और वे अपनी असली पहचान को दुनिया के सामने लाने से कतराने लगे हैं। यह स्थिति धीरे-धीरे कलाकारों के मानसिक स्वास्थ्य पर बहुत बुरा असर डालती है और उन्हें अंदर से पूरी तरह से कमजोर बना देती है।
ट्रोलिंग और ब्रांड बनने की दौड़ के बुरे प्रभाव
डंकी फिल्म में नजर आ चुकी अभिनेत्री ने आगे बताया कि आजकल कलाकारों का मजाक उड़ाना एक आम बात बन चुकी है जिसका बुरा असर हर किसी के जीवन पर पड़ता है। इंटरनेट पर सक्रिय ट्रोल्स अक्सर यह बेतुके सवाल उठाते हैं कि कलाकारों को फिल्मों में काम क्यों मिल रहा है या उन्हें किसी प्रोजेक्ट से क्यों हटाया जा रहा है। ऐसे सवाल उठाने वाले लोग अमूमन किसी के भी पेशे पर सवाल खड़े करने की योग्यता बिल्कुल नहीं रखते हैं। इस तरह की नकारात्मक टिप्पणियों ने कलाकारों को बेहद असुरक्षित कर दिया है और इसका सीधा परिणाम यह निकला है कि उन्होंने इंटरनेट पर अपनी असली शख्सियत दिखाना बंद कर दिया है। अब वे केवल वही छवि अपना रहे हैं जो बाजार में ज्यादा बिकती है और आम जनता को अधिक पसंद आती है। इस तरह के माहौल में दर्शक किसी असली इंसान से नहीं जुड़ रहे होते हैं बल्कि वे केवल एक निर्जीव ब्रांड के साथ जुड़ रहे होते हैं। इसके अलावा फोटोग्राफर और विभिन्न मीडिया प्लेटफॉर्म भी लगातार कलाकारों की आलोचना करके उनकी मानसिक स्थिति को प्रभावित करते हैं। इन सभी कारणों से आज के समय में कलाकार भारी चिंता और लगातार हो रही तुलना की समस्या का बहुत तेजी से शिकार बन रहे हैं।
मानसिक स्वास्थ्य को लेकर बदली हुई सोच और सबक
अपनी पुरानी सोच को याद करते हुए तापसी ने बताया कि अधिकांश भारतीयों की तरह वह भी यही मानती थीं कि मानसिक सहायता की आवश्यकता केवल तब पड़ती है जब कोई व्यक्ति पूरी तरह से मानसिक रूप से अस्वस्थ हो जाता है। उन्हें ऐसा लगता था कि चिकित्सक के पास जाने की जरूरत तभी होती है जब इंसान गंभीर अवसाद में डूब जाए या अपने जज्बात खुलकर व्यक्त न कर पाए। लेकिन समय बीतने के साथ उन्हें यह वास्तविकता समझ में आई कि मानसिक स्वास्थ्य के कई अलग-अलग और महत्वपूर्ण पहलू होते हैं। इसका असली अर्थ वर्तमान समय में जीना और आपके पास जो कुछ भी मौजूद है उसी में सच्ची शांति तलाश करना है। उन्होंने स्वीकार किया कि वह लंबे समय तक हर इंसान को खुश करने की एक नाकाम और थका देने वाली कोशिश में लगी हुई थीं। इस पूरी स्थिति को स्वीकार करने और खुद को समझने में उन्हें कई साल का लंबा वक्त लग गया। उन्हें अंततः अहसास हुआ कि उन्होंने ट्रोलर्स को संतुष्ट करने में अपने जीवन के कई बहुमूल्य वर्ष बर्बाद कर दिए हैं। यदि उन्होंने वह समय बर्बाद करने के बजाय अपने अभिनय कौशल को निखारने पर लगाया होता तो वह उनके लिए कहीं अधिक बेहतर साबित होता।