प्रयोगशाला जांच में खुले मिलावट के राज रायबरेली जिले के विभिन्न बाजारों से खाद्य सुरक्षा विभाग की विशेष टीम द्वारा संग्रहित किए गए आइसक्रीम के नमूनों की जब प्रयोगशाला में सूक्ष्म जांच कराई गई, तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। जांच के दौरान कई लोकप्रिय ब्रांड और स्थानीय विक्रेताओं के यहां से उठाए गए सैंपल मानकों पर पूरी तरह विफल साबित हुए। इन नमूनों में ऐसे तत्वों की पुष्टि हुई है जो आम नागरिकों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकते हैं। मिलावटखोरों द्वारा आइसक्रीम के निर्माण में घटिया और प्रतिबंधित सामग्रियों का धड़ल्ले से इस्तेमाल किया जा रहा था, जिससे यह साबित होता है कि उपभोक्ताओं की जिंदगी के साथ सीधा खिलवाड़ हो रहा है। प्रयोगशाला की रिपोर्ट आने के बाद प्रशासन ने तुरंत संज्ञान लेते हुए संबंधित दुकानदारों और निर्माताओं की पहचान की और उन्हें नियमानुसार आधिकारिक नोटिस थमाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है ताकि इस अवैध कारोबार पर प्रभावी ढंग से लगाम कसी जा सके।
खाद्य सुरक्षा और स्वास्थ्य मानकों की अनदेखी इस प्रकार के खाद्य उत्पादों में मिलावट का खेल कोई नया नहीं है, बल्कि त्योहारी सीजन और गर्म दिनों में मांग बढ़ने पर मुनाफाखोर सक्रिय हो जाते हैं। खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रशासन विभाग समय-समय पर अभियान चलाकर ऐसे मामलों का पर्दाफाश करता है, लेकिन जमीनी स्तर पर निगरानी कमजोर होने के कारण मिलावटखोरों के हौसले बुलंद रहते हैं। बिना लाइसेंस और अस्वच्छ वातावरण में संचालित होने वाली इकाइयों में बनने वाली ये खाद्य सामग्रियां सीधे तौर पर बच्चों और युवाओं के पेट में जाती हैं, जो सबसे ज्यादा आइसक्रीम का सेवन करते हैं। रासायनिक रंगों, सड़े हुए दूध के अवशेष और सिंथेटिक फैट का इस्तेमाल कर तैयार की जाने वाली इन चीजों से पेट की गंभीर बीमारियां, फूड पॉइजनिंग और यकृत संबंधी समस्याएं होने का खतरा लगातार बना रहता है। जिला प्रशासन और खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की यह जिम्मेदारी होती है कि वे नियमित रूप से ऐसी दुकानों और फैक्टरियों का औचक निरीक्षण करें, ताकि आम जनता की थाली तक पहुंचने वाली हर वस्तु सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण हो सके।
दुकानदारों को नोटिस और आगामी कानूनी कार्रवाई जांच में नमूने असुरक्षित पाए जाने के बाद प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए सभी संबंधित दुकानदारों और प्रतिष्ठान संचालकों को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं। इन दुकानदारों को एक निश्चित समय सीमा के भीतर अपना स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया गया है, और यदि उनका जवाब संतोषजनक नहीं पाया जाता है, तो उनके खिलाफ खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत भारी जुर्माने से लेकर लाइसेंस निरस्तीकरण तक की कड़ी कार्रवाई की जाएगी। विभाग का यह भी कहना है कि इस अवैध व्यापार की गहराई से पड़ताल की जाएगी ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह मिलावटी सामान कहां से बनकर आ रहा था और इसके पीछे कौन-कौन से बड़े सप्लायर जुड़े हुए हैं। इस पूरी कार्रवाई से स्थानीय व्यापारियों और मिलावट का कारोबार करने वाले तत्वों में हड़कंप मच गया है। आम नागरिकों ने भी प्रशासन से मांग की है कि ऐसे मिलावटखोरों के खिलाफ केवल नोटिस तक सीमित न रहकर जेल भेजने जैसी कठोर मिसाली कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि भविष्य में कोई भी जनस्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने का दुस्साहस न कर सके।