अवैध संचालन और मानकों की अनदेखी लखनऊ जिले में इन दिनों ऐसे कई नशा मुक्ति केंद्र और पुनर्वास केंद्र संचालित किए जा रहे हैं जिनके पास प्रशासन या स्वास्थ्य विभाग का कोई वैध पंजीकरण तक मौजूद नहीं है। इन संस्थानों द्वारा सरकार द्वारा तय किए गए किसी भी मानक का पालन नहीं किया जाता है और मनमाने तरीके से मरीजों को भर्ती किया जाता है। हालात यह हैं कि बिना किसी पेशेवर चिकित्सक या प्रशिक्षित स्टाफ के ही इन केंद्रों का संचालन धड़ल्ले से किया जा रहा है जिससे वहां रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडराता रहता है। न तो यहां पर साफ-सफाई की उचित व्यवस्था होती है और न ही मरीजों के खानपान और दवाइयों का कोई मानक तय होता है। बावजूद इसके, इन जगहों पर लोगों को गुमराह करके भेजा जा रहा है जहां उनके परिजनों से भारी-भरकम फीस वसूली जाती है और बदले में उन्हें केवल आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिलता है। प्रशासन की लचर निगरानी का फायदा उठाकर ऐसे अवैध केंद्र लगातार अपने पैर पसारते जा रहे हैं और समाज के भोले-भाले लोगों को अपने जाल में फंसा रहे हैं।
आर्थिक शोषण और बढ़ती परेशानी नशे की गिरफ्त में फंसे अपने परिजनों को बाहर निकालने की उम्मीद लेकर इन केंद्रों तक पहुंचने वाले आम लोगों की जेबें तेजी से खाली हो रही हैं। इन संस्थानों के संचालक इलाज के नाम पर हर महीने हजारों और लाखों रुपए की मांग करते हैं, लेकिन सुविधाएं शून्य होती हैं। मरीजों के नाम पर भारी भरकम बिल बनाए जाते हैं जिनमें दवाओं और काउंसलिंग के नाम पर फर्जी खर्चे जोड़े जाते हैं, जबकि अंदरखाने मरीजों को बुनियादी मानवाधिकारों से भी वंचित रखा जाता है। जब परिवार वाले विरोध करने की कोशिश करते हैं तो उन्हें तरह-तरह की धमकियां दी जाती हैं और मरीजों को बंधक बनाकर रखने जैसी शिकायतें भी सामने आती हैं। लखनऊ जैसे बड़े शहर में इस तरह के गैरकानूनी तरीके से चल रहे संस्थानों की भरमार होने के कारण मध्यम और गरीब परिवार सबसे ज्यादा पिस रहे हैं। कर्ज लेकर या अपनी जमा पूंजी दांव पर लगाकर लोग अपनों की जिंदगी बचाने की कोशिश करते हैं, लेकिन अंत में उन्हें केवल मानसिक तनाव और खाली हाथ ही मिलते हैं। यह स्थिति समाज में एक बहुत बड़ी चिंता का विषय बनती जा रही है जिस पर समय रहते रोक लगाना बेहद जरूरी हो गया है।
प्रशासनिक कार्रवाई और आगे की राह इस तरह के मामलों के उजागर होने के बाद अब स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग पर दबाव बढ़ गया है कि वे लखनऊ के ऐसे सभी संदिग्ध केंद्रों की जांच करें। उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में प्रशासन औचक निरीक्षण अभियान चलाकर इन गैरकानूनी संस्थानों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करेगा और उनके संचालकों को बेनकाब करेगा। जनता और सामाजिक संगठनों की तरफ से भी यह मांग की जा रही है कि सभी पंजीकृत और गैर-पंजीकृत केंद्रों की सूची सार्वजनिक की जाए ताकि लोग धोखे का शिकार होने से बच सकें। विशेषज्ञों का मानना है कि नशा मुक्ति जैसे संवेदनशील क्षेत्र में केवल कागजी कार्रवाई से काम नहीं चलेगा बल्कि दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त सजा का प्रावधान होना चाहिए ताकि भविष्य में कोई भी आम जनता की मजबूरी का फायदा न उठा सके। सरकार और संबंधित विभागों को मिलकर एक ऐसा प्रभावी तंत्र विकसित करना होगा जो समय-समय पर इन केंद्रों की निगरानी करे और मानकों की अनदेखी करने वालों के लाइसेंस तुरंत रद्द करे। तभी जाकर पीड़ित परिवारों को वास्तविक राहत मिल सकेगी और इस अवैध कारोबार पर पूरी तरह से अंकुश लगाया जा सकेगा।