कंटाप
NEWS
शुक्रवार, 23 अक्तूबर 2026
Follow Us
ब्रेकिंग
जो US लगा रहा था एक्स्ट्रा टैरिफ, अब वही पढ़ रहा कसीदे; भारत की तेल आयात नीति पर क्या बोले मार्को रुबियो      ‘उतनी तो श्रीहरिकोटा से लॉन्चिंग नहीं होती जितनी...', PM मोदी ने कांग्रेस पर कसा जोरदार तंज; जानें और क्या      फ़्रांस के राष्ट्रपति विदेशी नेताओं पर भड़के, 'इस्लामी और प्रवासी भीड़' के आरोप पर दिया जवाब      ‘CJP प्रोटेस्ट के लिए फंडिंग कहां से आती है?’ RSS के Indresh Kumar ने उठाए सवाल      टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस: कोर्ट में फूट-फूटकर रोई राधा, अब पुलिस उगलवाएगी राज      सऊदी अरब में दो बांग्लादेशियों को मौत की सज़ा दिए जाने से जुड़े वे सवाल जो हैं अनसुलझे      दिल्ली में AAP और कांग्रेस की पार्षद भिड़ीं, MCD सदन में खींचतान के बाद आई हाथापाई की नौबत      कौन हैं निर्मला सीतारमण के पति परकला प्रभाकर जो प्रकाश राज और अभिजीत दिपके साथ CJP का प्रदर्शन में शामिल होंगे     
SENSEX लोड हो रहा... | NIFTY लोड हो रहा... | GOLD (10g) ₹— | SILVER (10g) ₹— | USD/INR ₹— | CRUDE OIL $— | Uttar Pradesh — लोड हो रहा है | --:--:-- | लाइव अपडेट
@NewsKantap:
स्वास्थ्य

पशु अस्पताल में वसूली: चिनहट के सरकारी केंद्र पर दवाओं के नाम पर अवैध उगाही के आरोप

लखनऊ के चिनहट स्थित सरकारी पशु अस्पताल में इलाज के बदले पैसे मांगने का मामला सामने आया है। पशुपालकों ने आरोप लगाया है कि यहां मुफ्त दवाओं के लिए भी उनसे अवैध वसूली की जाती है।

A
Ankit Yadav
30 सित 2026, 14:24
पशु अस्पताल में वसूली: चिनहट के सरकारी केंद्र पर दवाओं के नाम पर अवैध उगाही के आरोप

चिनहट पशु अस्पताल में उगाही के आरोप

लखनऊ के चिनहट इलाके में स्थित सरकारी पशु अस्पताल गंभीर आरोपों के घेरे में आ गया है। यहां उपचार के लिए आने वाले पशुपालकों ने अस्पताल के कर्मचारियों पर दवाओं और इंजेक्शन के नाम पर पैसे मांगने का आरोप लगाया है। शिकायतकर्ताओं का स्पष्ट कहना है कि अपने बीमार पालतू जानवरों का इलाज कराने के दौरान उन्हें लगातार आर्थिक दबाव का सामना करना पड़ता है। जब कोई व्यक्ति इन पैसों का विरोध करने की कोशिश करता है, तो उसे अस्पताल प्रशासन की ओर से दवाएं बाहर से खरीदकर लाने का फरमान सुना दिया जाता है। इस तरह की घटनाओं ने स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। हाल ही में एक महिला ने इस मनमानी का खुलकर विरोध किया था, जिसके बाद उसे भी बाहर से दवा लाने के लिए मजबूर होना पड़ा था। अस्पताल की यह व्यवस्था अब आम जनता के लिए बड़ी परेशानी का सबब बनी हुई है।

अधीक्षक ने माना दवाओं की कमी का संकट

अस्पताल के अधीक्षक डॉ. सुधीर वर्मा ने इन आरोपों पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए स्थितियों को स्पष्ट करने का प्रयास किया है। उनका कहना है कि सरकारी स्तर पर दवाओं की आपूर्ति तो की जाती है, लेकिन वह हर स्थिति में पर्याप्त नहीं होती है। डॉक्टर वर्मा के अनुसार, विशेष रूप से कुत्ते और बिल्लियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली सभी प्रकार की दवाएं अस्पताल के पास हमेशा उपलब्ध नहीं रहती हैं। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि अस्पताल के कुछ कर्मचारी निजी तौर पर अतिरिक्त कार्य करते हैं। अधीक्षक का तर्क है कि कर्मचारियों द्वारा निजी दवाओं का उपयोग पशुपालकों की सहमति से किया जाता है, जिसके लिए वे पैसे लेते हैं। हालांकि, सरकारी केंद्र के भीतर इस तरह की निजी व्यवस्था और उसके नाम पर होने वाली वसूली पर अब बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं। अस्पताल प्रशासन को अब अपनी कार्यप्रणाली की पारदर्शिता साबित करने की चुनौती है।

दवाओं की उपलब्धता और व्यवस्था पर सवाल

इस पूरे मामले ने लखनऊ के सरकारी पशु चिकित्सा तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। जब सरकारी अस्पताल में ही इलाज के लिए पैसे मांगे जाने लगे, तो गरीब पशुपालकों के लिए अपने जानवरों को बचाना मुश्किल हो जाता है। अस्पताल में मौजूद दवाओं का स्टॉक और वितरण व्यवस्था फिलहाल जांच के दायरे में है। निजी दवाओं के इस्तेमाल के नाम पर की जाने वाली उगाही की परंपरा अब व्यवस्था की मुख्य खामी मानी जा रही है। आम लोगों की मांग है कि अस्पताल में आवश्यक दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए ताकि उन्हें बाहर के बाजारों पर निर्भर न रहना पड़े। प्रशासन के इस ढीले रवैये के कारण अस्पताल की विश्वसनीयता पर असर पड़ रहा है। भविष्य में इस तरह की शिकायतों को रोकने के लिए अस्पताल को अपनी दवा सूची और शुल्क मुक्त सेवाओं को स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करने की तत्काल आवश्यकता है।

कंटाप
NEWS
होम 🇮🇳 देश 🗺️ राज्य 🌍 विदेश 🏛️ राजनीति 💼 व्यापार 🏏 खेल 🎬 मनोरंजन 💻 टेक्नोलॉजी 🏥 स्वास्थ्य 📚 शिक्षा 🕉️ धर्म वीडियो राशिफल खोज