चिनहट पशु अस्पताल में उगाही के आरोप
लखनऊ के चिनहट इलाके में स्थित सरकारी पशु अस्पताल गंभीर आरोपों के घेरे में आ गया है। यहां उपचार के लिए आने वाले पशुपालकों ने अस्पताल के कर्मचारियों पर दवाओं और इंजेक्शन के नाम पर पैसे मांगने का आरोप लगाया है। शिकायतकर्ताओं का स्पष्ट कहना है कि अपने बीमार पालतू जानवरों का इलाज कराने के दौरान उन्हें लगातार आर्थिक दबाव का सामना करना पड़ता है। जब कोई व्यक्ति इन पैसों का विरोध करने की कोशिश करता है, तो उसे अस्पताल प्रशासन की ओर से दवाएं बाहर से खरीदकर लाने का फरमान सुना दिया जाता है। इस तरह की घटनाओं ने स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। हाल ही में एक महिला ने इस मनमानी का खुलकर विरोध किया था, जिसके बाद उसे भी बाहर से दवा लाने के लिए मजबूर होना पड़ा था। अस्पताल की यह व्यवस्था अब आम जनता के लिए बड़ी परेशानी का सबब बनी हुई है।
अधीक्षक ने माना दवाओं की कमी का संकट
अस्पताल के अधीक्षक डॉ. सुधीर वर्मा ने इन आरोपों पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए स्थितियों को स्पष्ट करने का प्रयास किया है। उनका कहना है कि सरकारी स्तर पर दवाओं की आपूर्ति तो की जाती है, लेकिन वह हर स्थिति में पर्याप्त नहीं होती है। डॉक्टर वर्मा के अनुसार, विशेष रूप से कुत्ते और बिल्लियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली सभी प्रकार की दवाएं अस्पताल के पास हमेशा उपलब्ध नहीं रहती हैं। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि अस्पताल के कुछ कर्मचारी निजी तौर पर अतिरिक्त कार्य करते हैं। अधीक्षक का तर्क है कि कर्मचारियों द्वारा निजी दवाओं का उपयोग पशुपालकों की सहमति से किया जाता है, जिसके लिए वे पैसे लेते हैं। हालांकि, सरकारी केंद्र के भीतर इस तरह की निजी व्यवस्था और उसके नाम पर होने वाली वसूली पर अब बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं। अस्पताल प्रशासन को अब अपनी कार्यप्रणाली की पारदर्शिता साबित करने की चुनौती है।
दवाओं की उपलब्धता और व्यवस्था पर सवाल
इस पूरे मामले ने लखनऊ के सरकारी पशु चिकित्सा तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। जब सरकारी अस्पताल में ही इलाज के लिए पैसे मांगे जाने लगे, तो गरीब पशुपालकों के लिए अपने जानवरों को बचाना मुश्किल हो जाता है। अस्पताल में मौजूद दवाओं का स्टॉक और वितरण व्यवस्था फिलहाल जांच के दायरे में है। निजी दवाओं के इस्तेमाल के नाम पर की जाने वाली उगाही की परंपरा अब व्यवस्था की मुख्य खामी मानी जा रही है। आम लोगों की मांग है कि अस्पताल में आवश्यक दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए ताकि उन्हें बाहर के बाजारों पर निर्भर न रहना पड़े। प्रशासन के इस ढीले रवैये के कारण अस्पताल की विश्वसनीयता पर असर पड़ रहा है। भविष्य में इस तरह की शिकायतों को रोकने के लिए अस्पताल को अपनी दवा सूची और शुल्क मुक्त सेवाओं को स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करने की तत्काल आवश्यकता है।