गाजियाबाद में स्क्रीन का बढ़ता उपयोग
गाजियाबाद क्षेत्र में आधुनिक तकनीक और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का दैनिक जीवन में उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। लोग अपने दफ्तर के कामों के लिए लैपटॉप का उपयोग करते हैं और मनोरंजन या संवाद के लिए मोबाइल फोन का सहारा लेते हैं। इन गैजेट्स का उपयोग दिन-प्रतिदिन के जीवन का एक अहम हिस्सा बन चुका है जिसके बिना किसी भी व्यक्ति का काम पूरा नहीं होता है। लगातार कई-कई घंटों तक बिना किसी ब्रेक के स्क्रीन के सामने जमे रहने की इस आदत ने लोगों की शारीरिक बनावट और स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालना शुरू कर दिया है। विशेष रूप से नौकरीपेशा लोग और छात्र अपने अधिकांश घंटे कंप्यूटर या मोबाइल की स्क्रीन पर बिताते हैं। इस प्रकार की जीवनशैली के कारण शरीर की प्राकृतिक स्थिति प्रभावित होती है और रीढ़ की हड्डी पर अत्यधिक दबाव पड़ने लगता है। लोग यह नहीं समझ पाते हैं कि उनकी यह छोटी सी लापरवाही उनके स्वास्थ्य के लिए कितनी खतरनाक साबित हो सकती है। इस समस्या के कारण अब चिकित्सा विशेषज्ञों और स्वास्थ्य कर्मियों के पास ऐसे मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा देखा जा रहा है जो पीठ और गर्दन के पुराने दर्द से पीड़ित होकर पहुंच रहे हैं। तकनीक का यह नया संकट आधुनिक समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी बनता जा रहा है।
रीढ़ की हड्डी पर पड़ता है बुरा असर
लगातार कई घंटों तक कुर्सी पर झुककर बैठने या लेटकर मोबाइल चलाने की मुद्रा रीढ़ की हड्डियों के प्राकृतिक आकार को बिगाड़ देती है। जब कोई व्यक्ति अपने लैपटॉप या फोन पर नजरें गड़ाए रखता है तो उसकी गर्दन आगे की ओर झुक जाती है जिससे रीढ़ के ऊपरी हिस्से पर सबसे अधिक खिंचाव पैदा होता है। चिकित्सा विज्ञान के अनुसार मानव शरीर की रीढ़ की हड्डी को सीधी और संतुलित स्थिति में रहने की आवश्यकता होती है। लेकिन घंटों तक एक ही मुद्रा में रहने से मांसपेशियों में अकड़न आ जाती है और रक्त का संचार भी ठीक प्रकार से नहीं हो पाता है। इस स्थिति के कारण डिस्क पर दबाव बढ़ता है जो आगे चलकर स्लिप डिस्क या गंभीर पीठ दर्द जैसी समस्याओं का रूप ले लेता है। लोग इस बात से पूरी तरह अनजान रहते हैं कि उनका यह दैनिक व्यवहार उनके शरीर के सबसे मजबूत ढांचे को अंदर से कमजोर कर रहा है। समय बीतने के साथ यह समस्या इतनी बढ़ जाती है कि सामान्य चलना-फिरना या बैठना भी कठिन हो जाता है। चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े जानकारों का कहना है कि यदि समय रहते इस आदत में सुधार नहीं किया गया तो यह शारीरिक विकलांगता या क्रोनिक पेन का स्थायी कारण बन सकती है। गैजेट्स के अत्यधिक प्रयोग के प्रति यह अनदेखी आने वाले समय में स्वास्थ्य के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती के रूप में उभर रही है।
बचाव के उपाय और आधुनिक पृष्ठभूमि
इस बढ़ती हुई स्वास्थ्य समस्या से निपटने के लिए यह समझना आवश्यक है कि आधुनिक तकनीक का उपयोग सावधानी के साथ किया जाना चाहिए। इतिहास गवाह है कि जैसे-जैसे समाज डिजिटल उपकरणों की तरफ बढ़ा है, वैसे-वैसे शारीरिक श्रम वाले काम कम हुए हैं और बैठने वाली जीवनशैली का विस्तार हुआ है। कंप्यूटर और मोबाइल फोन के आने से कार्यक्षमता तो बढ़ी है परंतु इसके साथ ही रीढ़ से जुड़ी बीमारियां भी आमजन के बीच तेजी से फैली हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि हर आधे घंटे के बाद अपनी सीट से उठकर थोड़ा टहलना चाहिए और शरीर को स्ट्रेच करना चाहिए ताकि मांसपेशियों का तनाव कम हो सके। काम करते समय बैठने की सही मुद्रा यानी अर्गोनॉमिक्स का पालन करना बेहद जरूरी होता है ताकि रीढ़ की हड्डी पर अनावश्यक भार न पड़े। इसके अलावा मोबाइल या लैपटॉप की स्क्रीन को आंखों के बिल्कुल सामने रखना चाहिए ताकि गर्दन को ज्यादा झुकाना न पड़े। यदि हम अपनी दिनचर्या में इन छोटे-छोटे बदलावों को शामिल कर लें तो रीढ़ की हड्डी को होने वाले गंभीर नुकसान से काफी हद तक बचा जा सकता है। डिजिटल युग में तकनीक का उपयोग करें लेकिन अपने स्वास्थ्य की कीमत पर नहीं, यही इस समय की सबसे बड़ी सीख है।