कंटाप
NEWS
गुरुवार, 22 अक्तूबर 2026
Follow Us
ब्रेकिंग
PM बोले-कुछ लोग विदेशों में भारत को बदनाम कर रहे: कांग्रेस कब तक अपने फेल प्रोडक्ट की लॉन्चिंग के लिए देश क...      सऊदी अरब में बांग्लादेशी महिला कामगार कितनी सुरक्षित हैं?      मुझे गालियां पड़ेंगी, लेकिन...; योगेंद्र यादव ने कहा- अभी मोदी का इस्तीफा नहीं चाहते लोग      Tiger Shroff Attack Case में बड़ा खुलासा, वारदात से पहले शूटरों ने की थी बंदूक चलाने की प्रैक्टिस, हुआ था म      Rain Alert: बन गया है कम दबाव का क्षेत्र, इन राज्यों में होने जा रही मूसलाधार बारिश, आंधी तूफान का भी अलर्ट      'पाकिस्तान को अलग-थलग नहीं कर सकता भारत', मार्को रुबियो के बयान पर बोले पाकिस्तानी डिफेंस एक्सपर्ट      हरियाणा में बिजली कर्मियों की हड़ताल: छुट्टी से 25 अधिकारी-कर्मचारी वापस बुलाए, चार राज्यों से मांगे कर्मचारी      कौन हैं निर्मला सीतारमण के पति परकला प्रभाकर जो प्रकाश राज और अभिजीत दिपके साथ CJP का प्रदर्शन में शामिल होंगे     
SENSEX लोड हो रहा... | NIFTY लोड हो रहा... | GOLD (10g) ₹— | SILVER (10g) ₹— | USD/INR ₹— | CRUDE OIL $— | Uttar Pradesh — लोड हो रहा है | --:--:-- | लाइव अपडेट
@NewsKantap:
स्वास्थ्य

सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी: कैंसर दवाओं पर 10 गुना तक मुनाफाखोरी नरसंहार जैसी, एमआरपी कैपिंग पर मांगा जवाब

उच्चतम न्यायालय ने देश के अस्पतालों और दवा कंपनियों द्वारा जीवनरक्षक कैंसर दवाओं पर बेतहाशा मुनाफा कमाने पर कड़ा ऐतराज जताया है। अदालत ने इसे नरसंहार जैसा करार देते हुए केंद्र सरकार को दवाओं के अधिकतम खुदरा मूल्य पर सीमा तय करने के निर्देश दिए हैं।

A
Ankit Yadav
30 सित 2026, 11:48
सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी: कैंसर दवाओं पर 10 गुना तक मुनाफाखोरी नरसंहार जैसी, एमआरपी कैपिंग पर मांगा जवाब

अदालत में कैंसर दवाओं के दामों पर गंभीर बहस

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की खंडपीठ ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान अस्पतालों में दवाओं के मनमाने दामों पर गहरी नाराजगी व्यक्त की। याचिका में दिखाया गया था कि जिस कैंसर इंजेक्शन की लागत अस्पताल को कुछ सौ रुपये पड़ती है, उसे मरीजों को हजारों रुपये में बेचा जाता है। अदालत ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि असाध्य बीमारियों से जूझ रहे परिवारों की मजबूरी का इस तरह आर्थिक दोहन करना किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार्य नहीं हो सकता।

रिटेलर मूल्य से अधिकतम 16 प्रतिशत मार्जिन का प्रस्ताव

खंडपीठ ने केंद्र सरकार और राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण से पूछा कि जीवनरक्षक दवाओं पर अधिकतम लाभ सीमा सोलह प्रतिशत क्यों नहीं तय की जा सकती। अदालत ने कहा कि जब तक सरकार स्पष्ट नीति नहीं बनाती, तब तक आम नागरिकों की जेब पर यह डाका जारी रहेगा। याचिकाकर्ता ने दलील दी कि भारत में लाखों परिवार केवल चिकित्सा खर्चों के चलते गरीबी रेखा के नीचे चले जाते हैं, जिसमें दवाओं की भूमिका सबसे प्रमुख है।

केंद्र सरकार को चार सप्ताह के भीतर हलफनामा दाखिल करने का निर्देश

न्यायालय ने स्वास्थ्य मंत्रालय और रसायन व उर्वरक मंत्रालय को नोटिस जारी करते हुए चार सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब तलब किया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार इस दिशा में नीतिगत कदम उठाने में विफल रहती है तो न्यायालय को स्वयं दिशानिर्देश जारी करने के लिए बाध्य होना पड़ेगा। इस फैसले से देशभर के लाखों कैंसर मरीजों और उनके परिजनों में राहत की उम्मीद जगी है।

कंटाप
NEWS
होम 🇮🇳 देश 🗺️ राज्य 🌍 विदेश 🏛️ राजनीति 💼 व्यापार 🏏 खेल 🎬 मनोरंजन 💻 टेक्नोलॉजी 🏥 स्वास्थ्य 📚 शिक्षा 🕉️ धर्म वीडियो राशिफल खोज