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स्वास्थ्य और आयुर्वेद: केरल के पारंपरिक औषधि बोर्ड ने शुरू की वैश्विक स्तर पर दुर्लभ जड़ी-बूटियों के संरक्षण की अनूठी योजना

आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति को बढ़ावा देने और विलुप्त होने की कगार पर पहुंच चुकी दुर्लभ औषधीय वनस्पतियों को बचाने के लिए केरल राज्य आयुर्वेद अनुसंधान बोर्ड ने एक महत्वाकांक्षी संरक्षण परियोजना शुरू की है। पश्चिमी घाट के जंगलों में चलाई जाने वाली इस योजना के तहत औषधीय पौधों के प्राकृतिक आवासों को सुरक्षित रखते हुए उनकी वैज्ञानिक खेती को प्रोत्साहित किया जाएगा।

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Kantap News डेस्क
18 अग 2026, 17:34
स्वास्थ्य और आयुर्वेद: केरल के पारंपरिक औषधि बोर्ड ने शुरू की वैश्विक स्तर पर दुर्लभ जड़ी-बूटियों के संरक्षण की अनूठी योजना
भारत की प्राचीन चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद को आज पूरी दुनिया में एक नए सम्मान की दृष्टि से देखा जा रहा है। इसी कड़ी में केरल सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए पश्चिमी घाट की पहाड़ियों में पाई जाने वाली उन दुर्लभ जड़ी-बूटियों के संरक्षण का बीड़ा उठाया है, जो जलवायु परिवर्तन और अंधाधुंध दोहन के कारण विलुप्त होने की कगार पर पहुंच चुकी हैं। राज्य के पारंपरिक औषधि बोर्ड द्वारा शुरू की गई इस परियोजना के तहत स्थानीय किसानों और आदिवासी समुदायों को इन पौधों की वैज्ञानिक खेती करने का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके लिए एक आधुनिक बॉटनिकल पार्क और जीन बैंक की स्थापना भी की जा रही है, जहाँ इन अमूल्य पौधों के बीजों और डीएनए को सुरक्षित रखा जाएगा ताकि भविष्य में किसी भी संकट के समय उनका उपयोग किया जा सके।

वैज्ञानिक शोध और मानकीकरण

इस योजना का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू आयुर्वेदिक औषधियों का मानकीकरण और उनके गुणों पर आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान करना है। देश के प्रतिष्ठित फार्माकोलॉजिकल संस्थानों के साथ मिलकर इन जड़ी-बूटियों के रासायनिक घटकों का बारीकी से अध्ययन किया जा रहा है, ताकि यह साबित किया जा सके कि पारंपरिक नुस्खे आधुनिक वैज्ञानिक कसौटी पर पूरी तरह खरे उतरते हैं। बोर्ड के निदेशक ने बताया कि इस शोध से न केवल नई जीवन रक्षक दवाइयां बनाने में मदद मिलेगी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में आयुर्वेदिक उत्पादों की विश्वसनीयता और गुणवत्ता भी कई गुना बढ़ जाएगी। इसके लिए एक विशेष डिजिटल डेटाबेस भी तैयार किया जा रहा है, जिसमें हर पौधे की भौगोलिक स्थिति और उसके औषधीय गुणों का पूरा विवरण दर्ज होगा।

वैश्विक स्वास्थ्य बाजार में भारत की स्थिति

प्राकृतिक चिकित्सा और हर्बल उत्पादों की वैश्विक मांग में पिछले कुछ वर्षों में जबरदस्त उछाल आया है। ऐसे में केरल सरकार की यह पहल देश को वैश्विक हर्बल बाजार का सिरमौर बनाने में मददगार साबित हो सकती है। सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि इस पूरी प्रक्रिया में पारंपरिक ज्ञान रखने वाले स्थानीय वैद्य और आदिवासी समुदायों को पूरा मान-सम्मान और आर्थिक लाभ मिले, ताकि वे इस संरक्षण अभियान में अपनी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित कर सकें। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस मॉडल को देश के अन्य राज्यों में भी लागू किया जाए, तो भारत पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में एक निर्विवाद वैश्विक महाशक्ति के रूप में स्थापित हो सकता है।
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