भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद के ताजा आंकड़े भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद द्वारा जारी की गई नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार देश के सबसे बड़े सूबे यानी उत्तर प्रदेश के भीतर घातक और लाइलाज माने जाने वाले कैंसर के मरीजों की संख्या में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि देश भर में इस गंभीर स्वास्थ्य समस्या से जूझने वाले कुल मामलों के लिहाज से यह राज्य शीर्ष स्थान पर पहुंच गया है, जिससे चिकित्सा जगत में हड़कंप मच गया है। विभिन्न जनस्वास्थ्य संस्थानों और अस्पतालों से एकत्र किए गए आंकड़ों के आधार पर तैयार की गई इस रिपोर्ट में सामने आया है कि किस प्रकार यह जानलेवा बीमारी लगातार अपने पैर पसार रही है और हर साल बड़ी संख्या में नए मरीजों को अपनी चपेट में ले रही है। इस खुलासे के बाद से न केवल आम जनता बल्कि तमाम प्रशासनिक और चिकित्सीय हलकों में भी भारी चिंता का माहौल देखा जा रहा है क्योंकि इतनी बड़ी संख्या में मामलों का सामने आना राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर भी एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है।
घातक बीमारी के पीछे छिपी भयावह वजहें इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि आखिर किन कारणों की वजह से उत्तर प्रदेश में इस बीमारी के मामलों में इतनी तेज वृद्धि हो रही है। चिकित्सा विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं का मानना है कि इसके पीछे कई तरह के पर्यावरणीय कारक, बदलती जीवनशैली, खानपान की खराब आदतें और तंबाकू व अन्य नशीले पदार्थों का अत्यधिक सेवन मुख्य रूप से जिम्मेदार हैं। इसके अलावा ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में समय पर बीमारी की पहचान न हो पाना और जागरूकता की कमी भी इस स्थिति को और अधिक बदतर बना रही है। जब तक मरीज किसी बड़े अस्पताल तक पहुंचते हैं, तब तक बीमारी काफी आगे बढ़ चुकी होती है, जिससे इलाज बेहद कठिन और खर्चीला हो जाता है। आधुनिक जीवन में बढ़ते प्रदूषण, रासायनिक खाद्यान्नों का सेवन और पानी की गुणवत्ता में गिरावट ने भी इंसानी शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर किया है, जिसके परिणामस्वरूप इस तरह के घातक रोग तेजी से पनप रहे हैं और लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं।
स्वास्थ्य तंत्र के सामने खड़ी बड़ी चुनौतियां आईसीएमआर की इस डराने वाली रिपोर्ट के सार्वजनिक होने के बाद अब यह अत्यंत आवश्यक हो गया है कि राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग मिलकर इस दिशा में कोई ठोस रणनीति तैयार करें। आने वाले समय में यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए तो स्थिति और भी अधिक भयावह हो सकती है जिसके लिए बड़े पैमाने पर स्क्रीनिंग शिविर आयोजित करने और लोगों को जागरूक करने की आवश्यकता होगी। विशेषज्ञों का सुझाव है कि कैंसर जैसी बीमारी से निपटने के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से लेकर जिला अस्पतालों तक बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जाना चाहिए ताकि शुरुआती स्तर पर ही रोग का पता लगाया जा सके। इसके अलावा तंबाकू नियंत्रण कानूनों का सख्ती से पालन कराने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के प्रति जन-जागरूकता अभियान चलाने पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है ताकि भविष्य में इस खतरनाक आंकड़े को नीचे लाया जा सके और लोगों की अमूल्य जान बचाई जा सके।