रूमेटिक हार्ट डिजीज और दिल के दौरों का बढ़ता प्रकोप बिहार के अंदरूनी और शहरी दोनों ही क्षेत्रों में पिछले कुछ समय से हृदय संबंधी बीमारियों के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, जो चिकित्सा जगत के लिए एक गंभीर चुनौती बनती जा रही है। सामान्य तौर पर लोग केवल दिल के दौरे या मायोकार्डियल इंफार्क्शन को ही हृदय की मुख्य समस्या मानते हैं, परंतु इसके अलावा रूमेटिक हार्ट डिजीज के मरीजों की संख्या में भी तेजी से इजाफा हो रहा है। विशेष रूप से यह स्थिति बच्चों और युवा वर्ग को अपनी चपेट में ले रही है, जिससे स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंताएं काफी बढ़ गई हैं। रूमेटिक फीवर के समय पर इलाज न होने के कारण यह गंभीर बीमारी हृदय के वाल्व को स्थाई रूप से नुकसान पहुंचाती है, जिसके परिणाम स्वरूप भविष्य में दिल के काम करने की क्षमता प्रभावित होती है। राज्य के विभिन्न अस्पतालों और हृदय रोग चिकित्सा केंद्रों में इस प्रकार की जटिलताओं के साथ आने वाले मरीजों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है, जो इस बात का स्पष्ट संकेत है कि मौसमी और जीवनशैली से जुड़ी समस्याओं के अलावा संक्रामक और पुरानी बीमारियां भी स्वास्थ्य पर भारी पड़ रही हैं।
जोखिम के प्रमुख कारण और चिकित्सीय पृष्ठभूमि हृदय से जुड़ी इन गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के पीछे कई तरह के चिकित्सीय और सामाजिक कारण छिपे हुए हैं, जिन्हें समझना आम जनता के लिए बेहद आवश्यक है। रूमेटिक हार्ट डिजीज मुख्य रूप से बचपन में होने वाले गले के संक्रमण या स्ट्रेप्टोकोकल इन्फेक्शन के गलत या अधूरे इलाज की वजह से विकसित होती है, जो बाद में रूमेटिक बुखार का रूप लेकर हृदय के वाल्व को कमजोर कर देती है। इसके अलावा आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली, खानपान में अनियमितता, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, मानसिक तनाव और शारीरिक श्रम की कमी जैसे कारक आम दिल के दौरों के खतरे को कई गुना बढ़ा रहे हैं। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की शुरुआती पहुंच सीमित होने के कारण कई बार साधारण गले के संक्रमण या बुखार को नजरअंदाज कर दिया जाता है, जो बाद में चलकर एक लाइलाज और गंभीर हृदय रोग का कारण बन जाता है। इस प्रकार की चिकित्सीय पृष्ठभूमि यह दर्शाती है कि यदि शुरुआती स्तर पर ही संक्रमणों की सही पहचान करके उनका समुचित उपचार न किया जाए, तो वह दीर्घकालिक रूप से पूरे समाज के स्वास्थ्य ढांचे पर एक बहुत बड़ा बोझ बन सकती है।
बचाव के उपाय और भविष्य की रणनीतियां इस बढ़ती हुई स्वास्थ्य समस्या से निपटने के लिए चिकित्सा विशेषज्ञों ने आम नागरिकों को कुछ महत्वपूर्ण और व्यावहारिक बचाव के उपाय अपनाने की सलाह दी है। सबसे पहले यह जरूरी है कि गले के किसी भी प्रकार के संक्रमण या बुखार को हल्के में न लिया जाए और चिकित्सक की सलाह से एंटीबायोटिक का पूरा कोर्स समय पर पूरा किया जाए ताकि बीमारी जड़ से खत्म हो सके। इसके अलावा अपने दैनिक जीवन में संतुलित आहार को शामिल करना, नियमित रूप से योग या व्यायाम करना, धूम्रपान और अन्य नशीले पदार्थों से पूरी तरह दूरी बनाना तथा अपने रक्तचाप एवं शुगर के स्तर की नियमित जांच करवाते रहना अत्यंत आवश्यक है। स्वास्थ्य विभागों और अस्पतालों को भी चाहिए कि वे विशेष जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को रूमेटिक फीवर और हृदय रोगों के शुरुआती लक्षणों के प्रति जागरूक करें, ताकि समय रहते सही उपचार मिल सके। यदि जनता और चिकित्सा प्रशासन मिलकर इन निवारक उपायों को पूरी गंभीरता से लागू करें, तो आने वाले समय में बिहार के अंदर हृदय रोगों के इस खतरनाक ग्राफ को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।