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स्वास्थ्य

स्वास्थ्य संकट: बिहार की महिलाओं के लिए समर्पित चिकित्सा संस्थानों का अभाव

बिहार में महिलाओं के स्वास्थ्य सुधार के लिए एक छत के नीचे सभी चिकित्सा सुविधाएं देने वाले समर्पित अस्पतालों की भारी कमी है। राज्यभर में पंद्रह से उनतालीस वर्ष की आयु वर्ग की बड़ी आबादी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही है। सरकारी स्तर पर व्यापक और एकीकृत महिला देखभाल तंत्र विकसित करने की मांग जोर पकड़ रही है।

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Ankit Yadav
11 अक्ट 2026, 14:12
स्वास्थ्य संकट: बिहार की महिलाओं के लिए समर्पित चिकित्सा संस्थानों का अभाव

समग्र स्वास्थ्य सुविधाओं की भारी कमी

देश के इस बड़े हिस्से में महिला आबादी के स्वास्थ्य की जरूरतों के अनुरूप व्यापक उपचार की व्यवस्था नहीं पाई जाती है। यहां किशोरी अवस्था से लेकर बुजुर्ग होने तक की विभिन्न बीमारियों का निदान एक ही स्थान पर संभव नहीं हो पाता है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार राज्य में पंद्रह से उनतालीस वर्ष आयु वर्ग की लगभग तिहत्तर प्रतिशत से अधिक महिलाएं खून की गंभीर कमी से पीड़ित हैं। इसके अलावा किशोरियों में मासिक धर्म से जुड़ी तमाम गड़बड़ियां और खून की कमी जैसी परेशानियां आम हो चुकी हैं। युवा वर्ग की युवतियां पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम और हार्मोनल असंतुलन जैसी जटिल समस्याओं का सामना कर रही हैं। गर्भावस्था के दौरान उच्च जोखिम और अत्यधिक रक्तस्राव जैसी स्थितियां कई बार जानलेवा साबित हो सकती हैं। समय रहते स्तन कैंसर और सर्वाइकल कैंसर की पहचान करना भी बेहद आवश्यक माना गया है। मेनोपॉज यानी रजोधर्म रुकने के बाद महिलाओं में हड्डियों की कमजोरी और हृदय संबंधी रोगों का खतरा काफी बढ़ जाता है। पीएमसीएच और एम्स पटना जैसे प्रमुख चिकित्सा संस्थानों में स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग तो काम कर रहे हैं। परंतु महिलाओं की स्वास्थ्य जरूरतें केवल प्रसूति और स्त्री रोग तक ही सीमित नहीं होती हैं। उन्हें चिकित्सा विज्ञान के अन्य प्रमुख विभागों की सेवाएं भी एक साथ और बिना किसी परेशानी के मिलनी चाहिए।

विभिन्न विभागों की एकीकृत जरूरतें

विशेषज्ञों का कहना है कि महिला रोगियों को मेडिसिन, हृदय रोग, हड्डी रोग, कैंसर, रेडियोलॉजी और पैथोलॉजी की सेवाएं एक ही परिसर में मिलनी चाहिए। आवश्यकता ऐसे महिला केंद्रित अस्पतालों की है जहां विशेषज्ञ परामर्श के साथ आपातकालीन और गंभीर बीमारियों का इलाज तुरंत हो सके। पटना ऑब्स्टेट्रिक एंड गायनेकोलॉजिकल सोसायटी की अध्यक्ष प्रज्ञा मिश्रा चौधरी का मानना है कि महिलाओं के स्वास्थ्य की जरूरतें गर्भावस्था से बहुत आगे तक जाती हैं। उन्हें एनीमिया, हार्मोनल विकार, कैंसर, मेनोपॉज और हड्डियों से जुड़ी तमाम बीमारियों के लिए समग्र चिकित्सा व्यवस्था की दरकार होती है। कुर्जी होली फैमिली अस्पताल की प्रसूति एवं महिला रोग विभाग की अध्यक्ष डॉ पूनम लाल का कहना है कि गंभीर रूप से पीड़ित प्रसूताओं को कई प्रकार की एक साथ सेवाओं की आवश्यकता पड़ती है। गर्भावस्था में अत्यधिक रक्तस्राव, उच्च रक्तचाप और गंभीर संक्रमण के मामलों में तुरंत उपचार जीवन बचा सकता है। ऐसे संवेदनशील मामलों में स्त्री रोग विशेषज्ञ के साथ एनेस्थेटिस्ट, आपरेशन थिएटर, ब्लड बैंक और गहन चिकित्सा कक्ष की संयुक्त जरूरत होती है। यदि ये सभी चिकित्सा सुविधाएं एक ही छत के नीचे मिल जाएं तो इलाज में होने वाली अनावश्यक देरी को आसानी से टाला जा सकता है। उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था इकाई और नवजात शिशुओं की समुचित देखभाल के लिए भी पुख्ता प्रबंध होना बहुत जरूरी है।

देश के अन्य राज्यों का बेहतर मॉडल

बिहार के मुकाबले देश के कई अन्य राज्यों में महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए अलग से विशेष प्रबंध किए गए हैं। उत्तर प्रदेश के कई जिलों में विशेष रूप से जिला महिला अस्पतालों का सफल संचालन किया जा रहा है। उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में भी महिलाओं और बच्चों के लिए पूरी तरह अलग अस्पताल बनाए गए हैं। बिहार में भी बड़े सरकारी चिकित्सा संस्थानों से इसकी शुरुआत करके इस नेटवर्क को जिला स्तर तक बढ़ाया जा सकता है। महिलाओं को मेडिसिन विभाग में खून की कमी, मधुमेह, थायरॉइड और विभिन्न संक्रमणों की जांच व इलाज मिलना चाहिए। हृदय रोग विभाग में इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम, इकोकार्डियोग्राफी, विशेषज्ञ परामर्श और आपातकालीन उपचार की सुविधा अनिवार्य रूप से होनी चाहिए। हड्डी रोग विभाग में ऑस्टियोपोरोसिस के खतरे को रोकने के लिए नियमित जांच, परामर्श और फिजियोथेरेपी की सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए। कैंसर विभाग में शुरुआती पहचान के लिए स्क्रीनिंग, संदिग्ध मामलों की बायोप्सी और परामर्श की समय पर व्यवस्था होनी चाहिए। रेडियोलॉजी और पैथोलॉजी विभागों के एक ही जगह पर होने से डॉक्टरों को त्वरित उपचार का निर्णय लेने में मदद मिलती है। मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं के तहत गर्भावस्था और प्रसवोत्तर तनाव के लिए गोपनीय काउंसलिंग की व्यवस्था भी अत्यंत आवश्यक है।

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