राजकीय अस्पतालों में भर्ती महिलाओं का बड़ा आंकड़ा सामने आया
जिलेभर के राजकीय चिकित्सालयों में गंभीर बीमारियों का सामना करने वाली महिलाओं की संख्या में भारी उछाल देखा गया है। पिछले छह महीनों के दौरान स्वास्थ्य लाभ के लिए अस्पताल पहुंचने वाली महिलाओं का आंकड़ा पुरुषों की तुलना में लगभग चार गुना अधिक पाया गया है। अप्रैल महीने से शुरू होकर सितंबर महीने तक चले इस छह महीने के अंतराल में कुल 27462 महिलाओं को विभिन्न प्रकार की गंभीर बीमारियों के चलते अस्पतालों के भीतर भर्ती कराना पड़ा। इसी निश्चित समयावधि के भीतर विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं से जूझते हुए अस्पताल में दाखिल होने वाले पुरुषों की कुल संख्या केवल 7863 ही दर्ज की गई। चिकित्सा विभाग द्वारा जुटाए गए इन आंकड़ों से यह साफ हो जाता है कि महिलाओं के स्वास्थ्य की स्थिति अधिक चिंताजनक बनती जा रही है। सामान्य चिकित्सा उपचार प्राप्त करने के लिए आने वाली महिलाओं के साथ साथ आपातकालीन और गंभीर अवस्था में भर्ती होने वाली महिलाओं की संख्या में भी निरंतर वृद्धि दर्ज की जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार यह स्थिति समाज के एक बड़े वर्ग के स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव डाल रही है।
चिकित्सकों ने बढ़ती बीमारियों और लापरवाही के कारण बताए
चिकित्सा विशेषज्ञों और डॉक्टरों का कहना है कि महिलाएं अक्सर पारिवारिक जिम्मेदारियों और काम के बोझ के दबाव में अपनी सेहत को नजरअंदाज कर देती हैं। बीमारी के शुरुआती लक्षणों को समय पर न पहचानने और उचित देखभाल न मिलने के कारण उनकी शारीरिक स्थिति अधिक गंभीर हो जाती है। जब रोग बहुत बढ़ जाता है तब उन्हें मजबूरी में अस्पताल के भीतर भर्ती कराना पड़ता है। डॉक्टरों के अनुसार महिलाओं के शरीर में खून की भारी कमी यानी एनीमिया एक बहुत बड़ी और आम समस्या बनी हुई है। इसके अलावा उनके शरीर में कैल्शियम और विभिन्न प्रकार के विटामिनों की कमी के मामले भी तेजी से सामने आ रहे हैं। हड्डियों और जोड़ों में भयंकर दर्द की शिकायत लेकर आने वाली महिलाओं की संख्या में भी लगातार इजाफा हो रहा है। इसके साथ साथ आधुनिक जीवनशैली के कारण मधुमेह यानी डायबिटीज और उच्च रक्तचाप जैसी पुरानी बीमारियां भी महिलाओं को तेजी से अपनी चपेट में ले रही हैं। डॉक्टरों की यह स्पष्ट सलाह है कि नियमित रूप से स्वास्थ्य की जांच करवाना, संतुलित भोजन खाना और किसी भी तकलीफ पर तुरंत उपचार लेना कई गंभीर खतरों से बचा सकता है।
किशोर वर्ग के आंकड़ों में सामने आया बिल्कुल उलट रुझान
वयस्क महिलाओं की तुलना में किशोर और किशोरी वर्ग के स्वास्थ्य आंकड़ों में बिल्कुल विपरीत तस्वीर देखने को मिली है। राजकीय अस्पतालों के भीतर बनी आंतरिक चिकित्सा इकाइयों से प्राप्त आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार किशोरों और किशोरियों के बीच भर्ती होने की संख्या में साफ अंतर नजर आया है। अप्रैल से सितंबर के बीच के इस छह महीने के समय में राजकीय अस्पतालों की इन इकाइयों में कुल 10126 किशोरों का सफल उपचार किया गया। इसी समान अवधि के दौरान विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं के चलते उपचार प्राप्त करने वाली किशोरियों की कुल संख्या 8164 दर्ज की गई। इस प्रकार से इस विशिष्ट आयु वर्ग के भीतर किशोरियों की तुलना में किशोरों को अधिक संख्या में अस्पताल के अंदर भर्ती कर चिकित्सा सेवाएं प्रदान की गईं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि सभी आयु वर्गों के आंकड़ों का गहन विश्लेषण करने से हमें भविष्य की स्वास्थ्य योजनाओं को बेहतर ढंग से तैयार करने में बड़ी मदद मिल सकती है। समय पर सही उपचार और खानपान में सुधार करके हर वर्ग के लोगों को गंभीर बीमारियों की चपेट में आने से रोका जा सकता है और स्वस्थ समाज का निर्माण किया जा सकता है।