अस्पतालों में सफाई सेवा पूरी तरह बंद
राजधानी लखनऊ के सरकारी चिकित्सा संस्थानों और अस्पतालों में स्वच्छता की व्यवस्था अचानक पूरी तरह से बाधित हो गई। प्राप्त जानकारी के अनुसार इन स्वास्थ्य केंद्रों पर साफ-सफाई का कार्य लगातार चौबीस घंटे तक पूरी तरह से ठप रखा गया। इस अचानक आए बड़े व्यवधान के कारण पूरे अस्पताल परिसर में गंदगी का अंबार लगना शुरू हो गया। वार्डों के भीतर और गलियारों में कचरा जमा होने से वहां का माहौल मरीजों के स्वास्थ्य के लिहाज से काफी जोखिम भरा बन गया। इस गंभीर स्थिति के चलते रोगियों को उपचार के दौरान अस्वच्छ वातावरण का सामना करना पड़ा। अस्पताल आने वाले सामान्य लोग और गंभीर रूप से बीमार मरीजों के परिजन इस बदइंतजामी से खासे परेशान नजर आए। स्वास्थ्य विभाग और अस्पताल प्रशासन की तरफ से इस व्यवस्था के अचानक रुकने पर तुरंत कोई वैकल्पिक इंतजाम नहीं किया जा सका। जिस समय यह समस्या उत्पन्न हुई उस समय दूर-दराज के इलाकों से इलाज की उम्मीद में आए तमाम गरीब मरीज अस्पताल में मौजूद थे। अस्पताल के भीतर इस तरह चौबीस घंटे तक सेवाएं बंद रहने से स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खुलकर सामने आ गई है।
मरीजों और तीमारदारों को हुई भारी परेशानी
सरकारी अस्पतालों में सफाई व्यवस्था ठप होने से वहां इलाज कराने पहुंचे मरीजों और उनके तीमारदारों को भारी मुसीबतों का सामना करना पड़ा। चिकित्सालयों के कमरों और शौचालयों के पास गंदगी फैलने से लोगों का वहां टिकना तक मुश्किल हो गया था। अस्पताल के कर्मचारियों और प्रशासनिक अधिकारियों की इस लापरवाही के खिलाफ लोगों में गहरी नाराजगी देखने को मिली। तीमारदारों का कहना था कि अस्पताल जैसी संवेदनशील जगह पर इस तरह की लापरवाही मरीजों की जान से खिलवाड़ के समान है। संक्रमण फैलने के डर से लोग अपने मरीजों को बचाने के लिए खुद ही आस-पास का कचरा हटाने का प्रयास करते नजर आए। इस पूरी घटना के दौरान अस्पताल प्रशासन के किसी भी जिम्मेदार अधिकारी ने मौके पर आकर स्थिति को संभालने की जहमत नहीं उठाई। सफाई कर्मचारियों के काम बंद रखने या किसी अन्य प्रशासनिक वजह से यह संकट पैदा हुआ जिसके बारे में अधिकारी अभी कुछ भी खुलकर बोलने से बच रहे हैं। मरीजों के परिजनों ने मांग की है कि इस तरह की लापरवाही के लिए जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी नौबत दोबारा न आए। अस्पताल परिसर में फैली गंदगी को साफ करने के लिए कोई भी सफाई कर्मी पूरे चौबीस घंटे के दौरान अपनी ड्यूटी पर नजर नहीं आया।
स्वास्थ्य सेवाओं और स्वच्छता का महत्व
सरकारी अस्पतालों में स्वच्छता का सीधा संबंध मरीजों के स्वास्थ्य और उनके शीघ्र स्वस्थ होने की प्रक्रिया से जुड़ा होता है। किसी भी चिकित्सा संस्थान में संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए नियमित और सुचारू सफाई व्यवस्था का होना सबसे अनिवार्य शर्त माना जाता है। यदि अस्पतालों में ही गंदगी के ढेर लगे रहेंगे तो वहां इलाज कराने आने वाले स्वस्थ लोग भी गंभीर बीमारियों की चपेट में आ सकते हैं। इस प्रकार की व्यवस्थाएं जब चौबीस घंटे के लिए ठप हो जाती हैं तो पूरी स्वास्थ्य प्रणाली पर एक बहुत बड़ा प्रश्नचिह्न लग जाता है। आम जनता अपने इलाज के लिए पूरी तरह से सरकारी अस्पतालों पर निर्भर रहती है क्योंकि वे महंगे निजी अस्पतालों का खर्च उठाने में असमर्थ होते हैं। ऐसे में सरकार और स्वास्थ्य विभाग की यह नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि वे अस्पतालों में बुनियादी सुविधाओं को हमेशा सुचारू रूप से संचालित रखें। इस घटना के बाद से स्थानीय नागरिकों और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं ने प्रशासन से मांग की है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए पुख्ता तंत्र विकसित किया जाए। अस्पतालों की साफ-सफाई के कार्यों में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए क्योंकि इससे सीधे तौर पर इंसानी जिंदगियां जुड़ी होती हैं। आने वाले समय में देखना होगा कि इस तरह की गंभीर लापरवाही पर उच्च अधिकारी क्या कदम उठाते हैं।