सुरहा गांव में ताला बंद स्वास्थ्य केंद्र
सुरहा गांव के भीतर स्थानीय लोगों को बेहतर और सुलभ चिकित्सा सेवाएं मुहैया कराने के लिए एक आयुष्मान आरोग्य मंदिर का निर्माण कराया गया था ताकि जरूरतमंदों को समय पर उपचार मिल सके। वर्तमान स्थिति यह है कि इस अस्पताल के मुख्य प्रवेश द्वार पर बड़ा ताला लटका हुआ नजर आता है। अस्पताल का यह दरवाजा बंद रहने की वजह से वहां आने वाले हर मरीज को निराशा ही हाथ लगती है। भवन की देखभाल ठीक प्रकार से न होने के कारण इसके पूरे परिसर के भीतर भारी गंदगी और अनचाही झाड़ियां बड़े पैमाने पर फैल चुकी हैं। देखरेख के अभाव में यह स्वास्थ्य केंद्र पूरी तरह से बदहाली की मार झेल रहा है। गांव के निवासियों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग की इस बड़ी लापरवाही के चलते यह जरूरी ढांचा केवल एक शोपीस बनकर रह गया है। अस्पताल परिसर की साफ-सफाई न होने के कारण वहां जहरीले जीवों का खतरा भी लगातार बना रहता है। मुख्य गेट पर ताला हमेशा बंद रहने से कोई भी जरूरतमंद व्यक्ति अंदर प्रवेश नहीं कर पाता है। स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभाग की ओर से इस केंद्र की सुध न लेने से ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है।
ग्रामीणों की स्वास्थ्य विभाग से तीखी मांग
स्थानीय निवासियों ने अपनी प्रतिक्रिया में बताया कि यह स्वास्थ्य केंद्र उनके पूरे गांव और आसपास के इलाकों में रहने वाले तमाम लोगों के लिए बेहद जरूरी और महत्वपूर्ण है। हर सामान्य बीमारी और किसी भी प्रकार की प्राथमिक चिकित्सा के लिए लोगों को हमेशा यह उम्मीद रहती है कि उन्हें अपने ही गांव की सीमा के भीतर यह सुविधा आसानी से मिल जाएगी। परंतु अस्पताल हमेशा बंद रहने के कारण बीमार व्यक्तियों को मजबूरन इलाज के लिए लंबी दूरियां तय करके दूसरी जगहों का रुख करना पड़ता है। इस गंभीर समस्या से परेशान होकर ग्रामीणों ने अब स्वास्थ्य विभाग के समक्ष अपनी कुछ प्रमुख और ठोस मांगें रखी हैं। उन्होंने मांग की है कि इस बंद पड़े अस्पताल की उच्च स्तर पर तुरंत जांच कराई जानी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके। इसके अलावा परिसर के अंदर फैली तमाम गंदगी और बड़ी-बड़ी झाड़ियों को साफ करने के लिए नियमित सफाई अभियान चलाया जाना चाहिए। ग्रामीणों का यह भी साफ कहना है कि इस केंद्र को पूरी तरह से तयशुदा नियमों के हिसाब से संचालित किया जाए ताकि जनता को फायदा मिल सके। केंद्र भवन मौजूद होने के बावजूद यदि उसका सही लाभ जनता तक नहीं पहुंचता है तो इस पूरी व्यवस्था का मूल मकसद ही पूरी तरह से विफल हो जाता है।
अस्पताल बंद होने से जनता की परेशानी
ग्रामीणों के अनुसार जब इस तरह के चिकित्सा केंद्रों का निर्माण कराया जाता है तो इसके पीछे सरकार का मुख्य उद्देश्य आम जनता को उनके घर के पास ही चिकित्सीय मदद देना होता है। लेकिन सुरहा गांव में जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल विपरीत है क्योंकि यहां के आयुष्मान आरोग्य मंदिर के ताले कभी खुलते ही नहीं हैं। प्राथमिक इलाज के अभाव में बच्चों और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है जो आपातकालीन स्थिति में दूरदराज के अस्पतालों तक नहीं जा सकते हैं। इस प्रकार की व्यवस्थागत कमियों के कारण ग्रामीण लगातार स्वास्थ्य सेवाओं के लाभ से वंचित होते जा रहे हैं और उनका भरोसा कम हो रहा है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस केंद्र को चालू नहीं किया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग को चाहिए कि वह जल्द से जल्द इस दिशा में कोई ठोस कदम उठाए और इस केंद्र का ताला खुलवाकर डॉक्टरों की तैनाती करे। ग्रामीण चाहते हैं कि नियमों के अनुसार इस स्वास्थ्य केंद्र को नियमित रूप से चलाया जाए ताकि उनके पैसों और संसाधनों का सही उपयोग हो सके।