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स्वास्थ्य सेवाओं में डिजिटल क्रांति: देश के दूरदराज इलाकों के लिए शुरू हुई पहली मोबाइल टेलीमेडिसिन बस सेवा

राजस्थान के रेगिस्तानी जिलों में स्वास्थ्य सुविधाओं को घर-घर तक पहुंचाने के लिए एक अनूठी पहल की शुरुआत की गई है। राज्य के चिकित्सा विभाग ने उन्नत उपग्रह संचार तकनीक से लैस विशेष मोबाइल टेलीमेडिसिन बसों को हरी झंडी दिखाई है।

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Kantap News डेस्क
18 अग 2026, 14:24
स्वास्थ्य सेवाओं में डिजिटल क्रांति: देश के दूरदराज इलाकों के लिए शुरू हुई पहली मोबाइल टेलीमेडिसिन बस सेवा
राजस्थान के बाड़मेर और जैसलमेर जैसे सुदूरवर्ती और मरुस्थलीय जिलों में रहने वाले नागरिकों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से आज एक क्रांतिकारी स्वास्थ्य परियोजना का शुभारंभ किया गया। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री और राज्य के मुख्यमंत्री ने संयुक्त रूप से पांच विशेष रूप से डिजाइन की गई 'मोबाइल टेलीमेडिसिन बसों' को रवाना किया। ये बसें किसी चलते-फिरते हाई-टेक अस्पताल जैसी हैं, जिनमें देश के बड़े मेडिकल संस्थानों के विशेषज्ञ डॉक्टरों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सीधा संवाद करने की व्यवस्था की गई है। इन बसों में अत्याधुनिक पैथोलॉजिकल जांच उपकरण, रक्तचाप और मधुमेह मापने की मशीनें तथा ईसीजी की सुविधाएं भी मौजूद हैं, जिससे मौके पर ही मरीजों की प्राथमिक जांच करके उन्हें तुरंत डिजिटल पर्ची और दवाइयां उपलब्ध कराई जा सकेंगी।

विशेषज्ञ डॉक्टरों से सीधा परामर्श अब गांव के द्वार पर

रेगिस्तान के उन इलाकों में जहां पक्की सड़कें नहीं हैं और निकटतम प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भी दर्जनों किलोमीटर दूर स्थित है, ये बसें संजीवनी साबित होंगी। स्थानीय ग्रामीणों को अब छोटी-छोटी बीमारियों या नियमित जांच के लिए जिला मुख्यालयों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। बस के भीतर मौजूद प्रशिक्षित पैरामेडिकल स्टाफ डॉक्टरों के निर्देशों के अनुसार मरीजों की जांच करता है और सैटेलाइट इंटरनेट के माध्यम से पलक झपकते ही रिपोर्ट देश के शीर्ष अस्पतालों के सर्वर पर भेज देता है। विशेषज्ञ डॉक्टर तुरंत ऑनलाइन परामर्श देकर उपचार तय करते हैं। इस परियोजना के पहले चरण में राज्य के छह जिलों के दो सौ से अधिक गांवों को शामिल किया गया है, जहां प्रति माह हजारों मरीजों के स्वास्थ्य परीक्षण का लक्ष्य रखा गया है।

ग्रामीण स्वास्थ्य ढांचे में सुधार की दिशा में बड़ा कदम

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इस मॉडल की सराहना करते हुए कहा है कि यदि इसे देश के अन्य राज्यों के ग्रामीण क्षेत्रों में भी इसी प्रकार लागू किया जाए, तो भारत के सार्वजनिक स्वास्थ्य ढांचे में अभूतपूर्व सुधार देखने को मिल सकता है। सरकार ने यह भी घोषणा की है कि इस वर्ष के अंत तक ऐसे पचास और वाहनों को बेड़े में शामिल किया जाएगा ताकि कोई भी नागरिक चिकित्सा अभाव के कारण संकट में न पड़े। इस बीच, ग्रामीण इलाकों के लोगों ने इस बस सेवा के पहुंचते ही अपनी स्वास्थ्य जांच करवाना शुरू कर दिया है और डॉक्टरों से सीधे बात कर पाने की सुविधा पाकर बेहद उत्साहित नजर आए।
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