लखनऊ और गाजियाबाद में प्रदर्शन
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत कार्यरत संविदा कर्मचारी पिछले नौ दिनों से अपनी मांगों को लेकर लगातार धरना दे रहे हैं। इसी क्रम में सोमवार के दिन सभी कर्मचारियों ने अपने नियमित कामकाज को पूरी तरह बंद कर दिया। इसके बाद ये सभी लोग मुख्य चिकित्सा अधिकारी के कार्यालय पर एकत्र हुए और वहां जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान स्थिति को देखते हुए कर्मचारियों ने अपनी आगे की रणनीति बनाई। इनमें से पांच सौ कर्मचारी बसों में सवार होकर अपनी मांगों को मजबूती से रखने के लिए लखनऊ की तरफ रवाना हो गए। वहीं इसके अलावा अन्य पांच सौ कर्मचारी गाजियाबाद में ही धरने पर शांतिपूर्वक बैठे रहे। इन सभी कर्मचारियों की मुख्य मांग सरकारी सेवा में नियमितीकरण हासिल करना और समान कार्य के लिए समान वेतन पाना है। ये कर्मचारी अपनी इन मांगों को लेकर पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। संघ की जिलाध्यक्ष ने इस बात की पूरी जानकारी दी है कि जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जातीं तब तक उनका यह आंदोलन ऐसे ही जारी रहेगा। कार्यालय के बाहर कर्मचारियों की भारी भीड़ जमा रही और उन्होंने सरकार विरोधी नारे लगाए।
स्वास्थ्य सेवाओं और कामकाज पर संकट
कर्मचारियों द्वारा किए जा रहे इस अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार के कारण चिकित्सा व्यवस्था पर बहुत बुरा असर पड़ा है। सोमवार से काम बंद होने के बाद से अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों पर आने वाले आम मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बच्चों और महिलाओं को दी जाने वाली महत्वपूर्ण टीकाकरण सेवाएं पूरी तरह से बाधित हो चुकी हैं। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग से जुड़ी ऑनलाइन रिपोर्टिंग का महत्वपूर्ण कार्य भी पूरी तरह से ठप हो गया है। इन सभी आवश्यक सेवाओं के बंद हो जाने से स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं। संविदा कर्मियों के अचानक काम से हटने के कारण अस्पतालों में व्यवस्थाओं को संभालना काफी कठिन हो गया है। टीकाकरण के अभाव में छोटे बच्चों को समय पर टीके नहीं मिल पा रहे हैं जिससे अभिभावक भी खासे परेशान नजर आ रहे हैं। ऑनलाइन रिपोर्टिंग रुक जाने के कारण उच्चाधिकारियों तक दैनिक स्वास्थ्य आंकड़ों का पहुंचना भी बंद हो गया है। जिला स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की यह स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है और अधिकारी इस पर नजर बनाए हुए हैं। किसी भी स्वास्थ्य केंद्र पर सुचारू रूप से काम नहीं हो पा रहा है क्योंकि कर्मचारी पूरी तरह से धरने और प्रदर्शन में व्यस्त हैं।
अनिश्चितकालीन आंदोलन और भविष्य की राह
एनएचएम संविदा कर्मचारी संघ की जिलाध्यक्ष हिमानी कौशिक ने इस पूरे आंदोलन की स्थिति के बारे में विस्तार से बात रखी। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में बताया है कि जब तक प्रदेश सरकार उनकी दोनों प्रमुख मांगों को स्वीकार नहीं करती है तब तक यह संघर्ष जारी रहेगा। उनकी मुख्य मांगों में संविदा कर्मियों का नियमितीकरण करना और सभी को समान कार्य के बदले समान वेतन देना शामिल है। इन मांगों के पूरा होने तक यह कार्य बहिष्कार और धरना प्रदर्शन अनिश्चितकाल तक लगातार जारी रखा जाएगा। कर्मचारियों का यह रुख साफ करता है कि वे अब पीछे लौटने के मूड में बिल्कुल नहीं हैं और आर-पार की लड़ाई लड़ रहे हैं। पिछले नौ दिनों से चल रहे इस लंबे आंदोलन के कारण सरकार और स्वास्थ्य विभाग पर भी दबाव बढ़ता जा रहा है। आने वाले दिनों में यदि कोई ठोस बातचीत नहीं होती है तो यह विरोध प्रदर्शन और अधिक उग्र रूप ले सकता है। आम जनता और मरीजों की भलाई को ध्यान में रखते हुए इस गतिरोध को समाप्त करना प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। जिलाध्यक्ष के इस बयान के बाद साफ हो गया है कि कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर पूरी तरह एकजुट हैं और अपनी जिद पर कायम हैं।