ग्वालियर में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली
ग्वालियर शहर के भीतर स्थित एक प्रमुख सरकारी अस्पताल इन दिनों भारी संकट के दौर से गुजर रहा है। अस्पताल परिसर के भीतर मरीजों को दी जाने वाली बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाएं पूरी तरह से बेहाल हो चुकी हैं। हालात यह हैं कि रोजाना दूर-दराज के इलाकों से अपना इलाज कराने आने वाले गरीब और जरूरतमंद मरीजों को भारी निराशा हाथ लग रही है। अस्पताल के भीतर रेडियोलॉजिस्ट का पद लंबे समय से खाली चल रहा है। इस गंभीर प्रशासनिक कमी के कारण अस्पताल की मुख्य जांच सेवाएं पूरी तरह से बंद पड़ी हुई हैं। मरीजों को डॉक्टर की सलाह के बाद भी अस्पताल के भीतर ही एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड कराने की सुविधा नहीं मिल पा रही है। ओपीडी में आने वाले मरीजों को अपनी बीमारियों का सटीक पता लगाने के लिए इन बेहद जरूरी जांचों की सख्त जरूरत होती है। जांच सेवाएं ठप होने से मरीजों की तकलीफें और अधिक बढ़ गई हैं। अस्पताल प्रबंधन इस गंभीर समस्या का कोई भी तात्कालिक समाधान निकालने में अब तक पूरी तरह से नाकाम साबित हुआ है। सामान्य दिनों में इस सरकारी चिकित्सा संस्थान में रोजाना सैकड़ों की संख्या में मरीज अपने स्वास्थ्य परीक्षण के लिए पहुंचते हैं।
रेडियोलॉजिस्ट न होने से रुकी जांचें
सरकारी चिकित्सालयों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी का खामियाजा सीधा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। ग्वालियर के इस अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट के नहीं होने से एक्स-रे और सोनोग्राफी जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रियाएं पूरी तरह से थम गई हैं। अस्पताल में आने वाले हर एक मरीज को यह उम्मीद होती है कि उसे एक ही छत के नीचे डॉक्टर की सलाह और सभी प्रकार की जांचों की सुविधा मिल जाएगी। लेकिन रेडियोलॉजिस्ट के अभाव में सोनोग्राफी मशीनें ताले में बंद पड़ी हैं और एक्स-रे कक्ष के बाहर भी सन्नाटा पसरा रहता है। मजबूरी में मरीजों को अपनी जेब से भारी रकम खर्च करके बाहर निजी डायग्नोस्टिक सेंटर का रुख करना पड़ रहा है। निजी केंद्रों पर गरीब तबके के लोगों को इन मेडिकल जांचों के लिए मुंह मांगे पैसे चुकाने पड़ते हैं जो उनकी आर्थिक स्थिति पर बहुत बड़ा बोझ साबित हो रहा है। अस्पताल प्रशासन के पास फिलहाल इस बात का कोई पुख्ता जवाब नहीं है कि इस खाली पद पर नए डॉक्टर की नियुक्ति कब तक की जाएगी। स्थानीय लोगों और तीमारदारों के बीच इस व्यवस्था को लेकर गहरा आक्रोश पनप रहा है। मरीजों का कहना है कि समय पर जांच न होने के कारण उनकी गंभीर बीमारियों का सही समय पर इलाज शुरू नहीं हो पा रहा है।
मरीजों की परेशानी और स्वास्थ्य तंत्र की स्थिति
चिकित्सा क्षेत्र के जानकारों के अनुसार सरकारी अस्पतालों में रेडियोलॉजिस्ट जैसे विशेष पदों का रिक्त रहना पूरे स्वास्थ्य ढांचे की पोल खोल देता है। ग्वालियर जैसी महत्वपूर्ण जगह पर यदि प्रमुख चिकित्सा संस्थानों में बुनियादी जांच मशीनें बंद पड़ी रहें तो स्वास्थ्य नीतियों के क्रियान्वयन पर बड़े सवाल खड़े होते हैं। किसी भी अस्पताल में एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड ऐसी बुनियादी मेडिकल प्रक्रियाएं हैं जिनके बिना डॉक्टर किसी भी अंदरूनी बीमारी या फ्रैक्चर का सही आकलन नहीं कर सकते हैं। समय रहते यदि इन रिक्त पदों पर डॉक्टरों की तैनाती नहीं की गई तो हालात और अधिक भयावह हो सकते हैं। आम नागरिकों के अधिकारों और सुलभ स्वास्थ्य सेवाओं के हक को ध्यान में रखते हुए शासन स्तर पर विशेष प्रयास किए जाने की आवश्यकता है। सरकारी अस्पतालों की बदहाल स्थिति से यह साफ जाहिर होता है कि सुदूर और शहरी इलाकों के चिकित्सा केंद्रों में डॉक्टरों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए ठोस कार्ययोजना की सख्त जरूरत है। आने वाले दिनों में यदि प्रशासन ने इस ओर ध्यान नहीं दिया तो मरीजों का यह संघर्ष और अधिक बढ़ जाएगा। स्वास्थ्य सेवाओं को पटरी पर लाने के लिए रेडियोलॉजिस्ट की नियुक्ति ही एकमात्र और सबसे जरूरी उपाय बचा है।