ग्लासी स्किन का बढ़ता क्रेज और युवाओं की भूल आजकल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर कांच जैसी चमक वाली यानी ग्लासी स्किन पाने के लिए तमाम तरह के वीडियो और नुस्खे धड़ल्ले से वायरल हो रहे हैं, जिन्हें देखकर युवा बिना किसी चिकित्सीय सलाह के अंधाधुंध रासायनिक सौंदर्य प्रसाधनों का उपयोग कर रहे हैं। इस अंधी दौड़ में वे यह भूल जाते हैं कि हर किसी की त्वचा की प्रकृति अलग होती है और एक ही उपाय हर चेहरे पर अनुकूल असर दिखाए यह बिल्कुल जरूरी नहीं होता है। इंटरनेट पर मिलने वाली अधूरी जानकारियों के आधार पर चेहरे पर तरह-तरह के एसिड, स्क्रब और मजबूत फेशियल पील्स लगाने के कारण युवाओं की त्वचा की मूल परत कमजोर हो रही है। इस प्रकार की लापरवाहियों के चलते चेहरे पर समय से पहले झुर्रियां, अत्यधिक सूखापन, पपड़ी जमना और गंभीर जलन जैसी समस्याएं लगातार बढ़ती जा रही हैं, जो बाद में त्वचा रोग विशेषज्ञों के लिए भी चुनौती बन जाती हैं।
त्वचा विशेषज्ञों की चेतावनी और वैज्ञानिक कारण जाने-माने त्वचा विशेषज्ञों ने इस खतरनाक होती प्रवृत्ति पर गंभीर आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा है कि रासायनिक उत्पादों का अत्यधिक और अनियंत्रित इस्तेमाल त्वचा के प्राकृतिक रक्षा कवच यानी स्किन बैरियर को पूरी तरह से नष्ट कर देता है। जब यह सुरक्षात्मक परत क्षतिग्रस्त हो जाती है, तो बाहरी प्रदूषण, हानिकारक पराबैंगनी किरणें और बैक्टीरिया सीधे त्वचा के भीतर प्रवेश कर जाते हैं, जिससे संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। इसके अलावा, बाजार में मिलने वाले कई उत्पादों में खतरनाक तत्व मौजूद होते हैं जो थोड़े समय के लिए तो चमक दिखा सकते हैं, लेकिन लंबे समय में चेहरे के ऊतकों को स्थाई क्षति पहुंचाते हैं। विशेषज्ञों का स्पष्ट रूप से यह समझाना है कि प्राकृतिक रूप से स्वस्थ त्वचा पाने के लिए आंतरिक पोषण, सही खानपान, पर्याप्त नींद और हाइड्रेशन की आवश्यकता होती है, जिसे किसी भी कृत्रिम क्रीम या सीरम से रातों-रात नहीं बदला जा सकता है।
बचाव के उपाय और भविष्य की दिशा इस विकट स्थिति से निपटने के लिए अब मेडिकल बिरादरी और जागरूक नागरिकों द्वारा युवाओं के बीच व्यापक स्तर पर जागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है ताकि लोग भ्रामक विज्ञापनों के जाल में न फंसे। किसी भी नए उत्पाद को चेहरे पर लगाने से पहले डर्मेटोलॉजिस्ट की सलाह लेना और पैच टेस्ट करना बेहद अनिवार्य कदम है ताकि किसी भी तरह की एलर्जी या साइड इफेक्ट से समय रहते बचा जा सके। माता-पिता और शिक्षण संस्थानों को भी चाहिए कि वे किशोरों को सोशल मीडिया के अनियोजित सौंदर्य प्रसाधनों के दुष्प्रभावों के प्रति शिक्षित करें और उन्हें प्राकृतिक जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करें। यदि समय रहते इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दिनों में कम उम्र के युवाओं में गंभीर त्वचा रोगों और संवेदनशीलता के मामलों में और अधिक खतरनाक उछाल देखने को मिल सकता है।