विश्व रेबीज दिवस के अवसर पर आयोजित किए गए इस विशेष स्वास्थ्य शिविर के दौरान स्थानीय क्षेत्र के पशु चिकित्सा क्लिनिक में कुल पैंतीस पालतू कुत्तों का सफल टीकाकरण किया गया। इस मौके पर शहर के विभिन्न हिस्सों से अपने पालतू श्वानों को लेकर पहुंचे पशु प्रेमियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और क्लिनिक के चिकित्सकों द्वारा दी गई स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठाया। शिविर की शुरुआत सुबह निर्धारित समय पर हुई जहाँ पशु चिकित्सकों की टीम ने पूरी सावधानी के साथ प्रत्येक कुत्ते की स्वास्थ्य जांच करने के बाद उन्हें रेबीज जैसी घातक बीमारी से सुरक्षित रखने वाले टीके लगाए। चिकित्सकों का मुख्य उद्देश्य यही सुनिश्चित करना था कि पालतू जानवर पूरी तरह से सुरक्षित रहें और उनके संपर्क में आने वाले इंसानों को भी इस खतरनाक बीमारी के संक्रमण से बचाया जा सके।
इस तरह के स्वास्थ्य अभियानों की प्रासंगिकता और महत्व वर्तमान समय में और अधिक बढ़ जाता है जब देश भर में आवारा और पालतू जानवरों के काटने के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। रेबीज एक ऐसी लाइलाज और जानलेवा बीमारी है जो यदि एक बार किसी मनुष्य या जानवर को हो जाए, तो इससे बचना लगभग असंभव हो जाता है और यह सीधे तौर पर केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों और पशु अधिकार संगठनों के अनुसार इस बीमारी से बचाव का एकमात्र पुख्ता और वैज्ञानिक तरीका समय पर टीकाकरण कराना ही है। पिछले कुछ वर्षों में शहरों के भीतर पालतू कुत्तों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है, जिसके चलते पशुओं के टीकाकरण और उनके स्वास्थ्य की नियमित निगरानी को लेकर प्रशासन और निजी क्लीनिकों दोनों की जिम्मेदारी काफी बढ़ गई है।
इस सफल टीकाकरण अभियान के समापन पर चिकित्सकों ने उपस्थित पशुपालकों को संबोधित करते हुए रेबीज के शुरुआती लक्षणों, समय पर बूस्टर डोज लगवाने की अनिवार्यता और घरेलू जानवरों की स्वच्छता के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी। आने वाले दिनों में स्थानीय स्तर पर ऐसे और भी कई शिविर आयोजित किए जाने की योजना बनाई जा रही है ताकि अधिक से अधिक पालतू और आवारा जानवरों को इस सुरक्षा कवच के दायरे में लाया जा सके। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रमों से न केवल पशुओं में रेबीज के प्रसार को रोकने में मदद मिलेगी बल्कि आम जनता के बीच भी इस बीमारी के प्रति डर और भ्रांतियां दूर होंगी। विशेषज्ञों ने अपील की है कि सभी पेट ओनर्स अपने जानवरों के वैक्सीनेशन कार्ड को हमेशा अपडेट रखें और समय-सीमा पूरी होने पर बिना किसी लापरवाही के दोबारा टीके लगवाएं ताकि समाज को पूरी तरह से रेबीज मुक्त बनाया जा सके।