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आंकड़ों में बड़ा अंतर: जम्मू में रोहिंग्या नागरिकों की वास्तविक संख्या पर सवाल

जम्मू क्षेत्र में रोहिंग्या नागरिकों की कुल तादाद को लेकर सरकारी रिकॉर्ड और स्थानीय दावों में भारी अंतर सामने आया है। प्रशासन की रिपोर्ट और जमीन पर मौजूद सूत्रों के बयानों में अलग-अलग संख्या बताई जा रही है। सुरक्षा चिंताओं और स्थानीय नागरिकों की शिकायतों के बीच इस मामले में ठोस तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की मांग उठ रही है।

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Ankit Yadav
11 अक्ट 2026, 14:10
आंकड़ों में बड़ा अंतर: जम्मू में रोहिंग्या नागरिकों की वास्तविक संख्या पर सवाल

सरकारी रिकॉर्ड और स्थानीय दावों में भिन्नता

भारतीय केंद्र शासित प्रदेश के इस प्रमुख जिले में रोहिंग्या नागरिकों की सही आबादी को लेकर स्पष्टता का अभाव बना हुआ है। आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार इन विदेशी नागरिकों की संख्या पांच हजार के आसपास है। इसके विपरीत जमीनी स्तर से मिलने वाले सूत्रों का यह दावा है कि केवल इसी जिले की सीमा के भीतर चौदह हजार से अधिक रोहिंग्या रह रहे हैं। इन बस्तियों का फैलाव कई प्रमुख इलाकों में बताया जाता है जिनमें नरवाल और बठिंडी जैसे रिहायशी क्षेत्र शामिल हैं। इसके अलावा चौआदी, छन्नी रामा और सुंजवां के साथ तालाब तिल्लो तथा सिदड़ा जैसी जगहों पर भी इनकी रिहाइश होने की बात स्थानीय लोग करते हैं। इन तमाम अलग-अलग आंकड़ों के बीच अभी तक आधिकारिक तौर पर इनकी पुष्टि होना बाकी है। वर्ष 2021 के दौरान चलाए गए सत्यापन अभियान में दो सौ सत्तर से ज्यादा ऐसे लोगों को हिरासत में लिया गया था। पकड़े जाने के बाद इन सभी को हीरानगर में बनाए गए विशेष होल्डिंग सेंटर में भेज दिया गया था। इस कार्रवाई के बाद से ही इनकी कानूनी स्थिति और देश वापसी का मुद्दा लगातार चर्चा के केंद्र में बना हुआ है।

कानूनी प्रावधान और विदेशी नागरिकों की स्थिति

भारत सरकार के मौजूदा नियमों के तहत देश में रह रहे विदेशी नागरिकों के लिए विशिष्ट कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाता है। देश साल 1951 के शरणार्थी सम्मेलन का सदस्य नहीं है जिसके कारण यहां शरणार्थियों से जुड़े नियम देश के अपने कानूनों द्वारा संचालित होते हैं। रोहिंग्या नागरिकों के पास संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायोग के पहचान पत्र होने के बावजूद उन्हें किसी प्रकार की भारतीय नागरिकता या स्थायी निवास का अधिकार नहीं मिलता है। इसके बावजूद कानून यह स्पष्ट करता है कि प्रशासन किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध बिना पूरी कानूनी प्रक्रिया अपनाए अपनी मर्जी से कोई कार्रवाई नहीं कर सकता है। देश में रहने वाले प्रत्येक विदेशी नागरिक का पूरा रिकॉर्ड संबंधित कार्यालयों में उपलब्ध होना अनिवार्य है। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हर व्यक्ति की नागरिकता और यहां ठहरने की कानूनी स्थिति पूरी तरह पारदर्शी हो। यदि किसी भी व्यक्ति के दस्तावेजों उसकी गतिविधियों या संपर्कों को लेकर थोड़ा भी संदेह पैदा होता है तो देश की सुरक्षा एजेंसियों को तथ्यात्मक जांच करनी चाहिए। केवल किसी की राष्ट्रीयता या उसकी धार्मिक पहचान के आधार पर उसे सीधे तौर पर सुरक्षा के लिए खतरा मान लेना उचित कदम नहीं माना जा सकता है।

प्रशासनिक कार्रवाई और सुरक्षा संबंधी आवश्यकताएं

स्थानीय निवासियों की शिकायतों के समाधान और सुरक्षा संबंधी चिंताओं को दूर करने के लिए तथ्य आधारित कदमों की सख्त आवश्यकता है। प्रशासन को रोहिंग्या नागरिकों की वास्तविक संख्या का पता लगाने के लिए एक समयबद्ध योजना तैयार करने की जरूरत है। इस कार्य योजना के तहत सभी संबंधित दस्तावेजों की गहराई से जांच की जानी चाहिए और अवैध कब्जों के मामलों में नियमों के अनुसार कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। सुरक्षा के मामलों में कोई भी निष्कर्ष केवल ठोस जानकारियों और पूरी जांच पड़ताल पर ही आधारित होना चाहिए। वर्ष 2022 के दौरान सामने आए पुराने आंकड़ों के मुताबिक जम्मू और सांबा जिलों में रोहिंग्या तथा बांग्लादेशी नागरिकों समेत कुल विदेशी लोगों की संयुक्त संख्या तेरह हजार सात सौ से अधिक दर्ज की गई थी। हालांकि अधिकारियों का यह स्पष्ट कहना है कि वह पुराना आंकड़ा वर्तमान स्थिति का प्रतिनिधित्व नहीं करता है। प्रशासन द्वारा इस दिशा में उठाए जाने वाले हर कदम का उद्देश्य पारदर्शिता लाना और कानूनी प्रक्रियाओं का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित करना होना चाहिए ताकि किसी प्रकार की प्रशासनिक अस्पष्टता न रहे।

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