देवरिया बाईपास पर अधूरे कार्य और समस्याएं
सूबा बाजार की ओर से आने वाले मार्ग पर सड़क निर्माण का काम अभी तक अधूरा छोड़ा गया है। राहगीरों और स्थानीय लोगों के लिए यह स्थिति काफी जोखिम भरी साबित हो रही है। नाले के ऊपर लगाए गए कंक्रीट के स्लैब कहीं बहुत ऊंचे रखे गए हैं तो कहीं वे काफी नीचे धंसे हुए हैं। इस प्रकार की बेतरतीब व्यवस्था के कारण वहां से गुजरने वाले छोटे बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों का पैदल चलना बेहद कठिन हो गया है। सिक्टौर की दिशा में आगे बढ़ने पर सड़क के किनारे कई हिस्सों में निर्माण कार्य अधूरा नजर आता है। रुस्तमपुर के निकट नाले का निर्माण कार्य काफी देर से शुरू हुआ था जिसके कारण पूरी परियोजना की गति धीमी पड़ गई। गंगा रिजार्ट के नजदीक गहरा नाला अभी तक बिना पूरा हुए ही अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। उस स्थान पर पुल की रेलिंग बनाकर उस पर रंगाई का काम तो करा दिया गया है लेकिन नाले के गंदे पानी की निकासी के संबंध में अब तक कोई ठोस योजना नहीं बन पाई है। इस तरह की लापरवाही के चलते आम जनता को रोजमर्रा की जिंदगी में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है और दुर्घटनाओं का अंदेशा हर वक्त बना रहता है।
बिजली के पोल और सुरक्षा के गंभीर खतरे
सड़क और नाले के आसपास फैली बिजली की व्यवस्था जनता की जान पर लगातार बड़ा खतरा बनी हुई है। सिक्टौर की तरफ जाने वाले मार्ग पर कई जगह बिजली के पोल सीधे नाले के बीचोंबीच खड़े पाए गए हैं। इन पोलों की मौजूदगी की वजह से नाले के ऊपर कंक्रीट के स्लैब लगाने का काम बाधित हो रहा है। इसके अलावा कुछ पोलों पर ग्यारह हजार वोल्ट क्षमता की खतरनाक हाईटेंशन लाइन के तार तने हुए हैं तो कुछ अन्य पोल बिल्कुल खाली और बिना तारों के ही खड़े नजर आते हैं। बगल से बहने वाले नाले के डक्ट के अंदर गंदे पानी के नीचे बिजली के केबल मुश्किल से दिखाई देते हैं। नियमों के अनुसार इन केबल को ऊपर बने ट्रेंच पर बिछाया जाना अनिवार्य था। हालांकि धरातल पर स्थिति यह है कि ज्यादातर जगहों पर केबल डक्ट के फर्श पर पड़े हैं और उनके ऊपर लोहे के ट्रेंच के टुकड़े गिरे हुए पाए गए हैं। कुछ विशेष स्थानों से लोहे के ट्रेंच पूरी तरह से गायब भी हो चुके हैं। आसपास के निवासियों का कहना है कि चोरों की नजर इन लोहे के एंगल और ट्रेंच पर टिकी हुई है जिसके कारण वहां आए दिन चोरी की घटनाएं हो रही हैं। सहारा एस्टेट के पास पुल की रेलिंग के सहारे ट्रेंच लगाकर बिजली के केबल गुजारे गए हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि इन केबल ट्रेंच को पुल के निचले हिस्से से निकाला जाना चाहिए था लेकिन काम में जल्दबाजी दिखाने के कारण उन्हें ऊपर ही सेट कर दिया गया है। इस पूरी स्थिति के संबंध में लोक निर्माण विभाग के प्रांतीय खंड के अधिशासी अभियंता आरपी सिंह से संपर्क साधने का प्रयास किया गया था। उनके मोबाइल फोन पर कई बार फोन किया गया लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं की। इसके अलावा वाट्सएप के माध्यम से भेजे गए सवालों का भी उनकी तरफ से कोई जवाब नहीं दिया गया।
तय समय सीमा और पारेषण उपकेंद्र की स्थिति
देवरिया बाईपास का यह पूरा निर्माण कार्य पिछले साल यानी मई के महीने में ही पूरी तरह से समाप्त हो जाना चाहिए था। समय सीमा बीत जाने के बावजूद जमीनी स्तर पर काम अब तक जारी है जिससे लोगों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है। दूसरी ओर बिजली वितरण से जुड़ी समस्याएं भी जस की तस बनी हुई हैं और उपभोक्ताओं को राहत नहीं मिल पा रही है। खोराबार इलाके में दो सौ बीस किलोवोल्ट क्षमता का एक नया पारेषण उपकेंद्र लगभग तीन साल से बनकर पूरी तरह तैयार खड़ा है। इस बड़े पारेषण उपकेंद्र से महानगर के कुल सात अलग-अलग वितरण उपकेंद्रों को बिजली की आपूर्ति की जानी है। हालांकि बिजली के केबल सही समय पर न बिछाए जाने के कारण इस महत्वपूर्ण काम में लगातार देरी होती जा रही है। इस प्रशासनिक और तकनीकी देरी का सीधा खामियाजा आम बिजली उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ रहा है जिन्हें निर्बाध बिजली नहीं मिल रही है। अधिकारियों की इस कार्यशैली से लोगों में निराशा का माहौल है। खोराबार के इस पारेषण उपकेंद्र से जब आखिरकार बिजली की आपूर्ति शुरू हो जाएगी तब मोहद्दीपुर पारेषण उपकेंद्र पर पड़ रहा अतिरिक्त बिजली का भार भी काफी हद तक कम हो सकेगा। इस प्रकार बाईपास के अधूरे निर्माण और बिजली तंत्र की सुस्ती ने स्थानीय विकास कार्यों की पोल खोलकर रख दी है।