परतापुर क्षेत्र की घटना
मेरठ जिले के परतापुर क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले एयरपोर्ट एंक्लेव में एक निर्माणाधीन धार्मिक स्थल पर बुलडोजर चलाने की कार्रवाई की जानी थी। इस कार्रवाई को अंजाम देने के लिए मेरठ विकास प्राधिकरण यानी एमडीए की टीम गुरुवार दोपहर के समय मौके पर पहुंची थी। लेकिन हैरान करने वाली बात यह थी कि उस समय टीम के साथ कोई भी स्थानीय पुलिस बल मौजूद नहीं था। जैसे ही प्राधिकरण के कर्मचारियों ने मंदिर को गिराने के प्रयास शुरू किए, वहां मौजूद महिलाओं ने तुरंत कड़ा विरोध जताना शुरू कर दिया। महिलाओं ने अपने हाथों में ढोलक और मंजीरे थापते हुए भजन गाना शुरू कर दिया और मंदिर परिसर में ही बैठ गईं। देखते ही देखते इस अनोखे और शांतिपूर्ण प्रदर्शन के वीडियो सोशल मीडिया पर बहुत तेजी से वायरल होने लगे। इस अप्रत्याशित विरोध प्रदर्शन के कारण प्राधिकरण के अधिकारियों को बिना कोई भी विध्वंस कार्रवाई किए ही बैरंग अपने दफ्तर वापस लौटना पड़ गया। मौके पर पुलिस बल का न होना और महिलाओं का यह भजन कीर्तन वाला विरोध मुख्य वजह बना जिससे पूरी कार्रवाई टल गई और अमला असफल होकर लौट आया।
मौके पर उमड़ी भारी भीड़
निर्माणाधीन मंदिर के खिलाफ की जा रही इस अचानक कार्रवाई की खबर आग की तरह पूरे इलाके में फैल गई। जानकारी मिलते ही मंदिर समिति के तमाम जिम्मेदार सदस्य तुरंत घटनास्थल की तरफ दौड़ पड़े। उनके साथ ही पार्षद पुत्र आकाश काशी और विभिन्न हिंदू संगठनों से जुड़े सक्रिय कार्यकर्ता भी बड़ी संख्या में मौके पर पहुंच गए। इन लोगों के पहुंचते ही वहां भारी भीड़ जमा हो गई जिससे स्थिति पूरी तरह बदल गई। स्थानीय निवासियों और कार्यकर्ताओं ने एक स्वर में प्राधिकरण की इस कार्रवाई का खुलकर विरोध किया। लोगों का साफ तौर पर कहना था कि किसी भी धार्मिक स्थल पर कोई भी एक्शन लेने से पहले प्रशासन को संबंधित पक्षों के साथ बातचीत करनी चाहिए थी। इसके अलावा स्थानीय जनता का यह भी आरोप था कि नियमों के मुताबिक कोई भी बुलडोजर कार्रवाई करने से पहले प्रशासन की ओर से किसी प्रकार का कोई पूर्व नोटिस तक नहीं दिया गया था। दूसरी तरफ प्रशासन और प्राधिकरण के अधिकारियों का अपना अलग तर्क सामने आया है। अधिकारियों का कहना है कि यह पूरा मंदिर पूरी तरह से अवैध तरीके से सरकारी जमीन पर बन रहा था। इसी अवैध निर्माण के कार्य को रुकवाने के लिए हमारी टीम वहां मौके पर गई थी, लेकिन बढ़ते विरोध के आगे उन्हें पीछे हटना पड़ा।
क्षेत्र में चर्चा और पृष्ठभूमि
इस पूरी घटना के बाद से मेरठ के पूरे परतापुर क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। फिलहाल मौके पर बुलडोजर चलने की कार्रवाई पूरी तरह से टल चुकी है और सब की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्राधिकरण अब अगला कदम क्या उठाएगा। हालांकि इस मामले में मेरठ विकास प्राधिकरण की तरफ से कार्रवाई का सटीक आधार और आगे की पूरी रणनीति अभी तक आधिकारिक तौर पर पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो सकी है। गौर करने वाली बात यह है कि इससे पहले भी उत्तर प्रदेश के दूसरे जिलों में सरकारी जमीन पर बने धार्मिक स्थलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा चुकी है। पिछले महीने ही सहारनपुर जिले में इसी तरह की एक कार्रवाई के दौरान एक मस्जिद को पूरी तरह से गिरा दिया गया था। सहारनपुर की उस घटना पर भी भारी विवाद खड़ा हुआ था और वह संवेदनशील मामला अभी अदालत में विचाराधीन है। उत्तर प्रदेश में सरकारी जमीनों और धार्मिक निर्माणों से जुड़े मामलों पर प्रशासन लगातार सख्त कदम उठा रहा है, जिससे कई बार इस तरह के विवादित हालात पैदा हो जाते हैं। फिलहाल मेरठ के इस मामले में अब देखना होगा कि स्थानीय प्रशासन आगे क्या रुख अपनाता है और मंदिर समिति के साथ उसकी क्या बातचीत होती है।